गोपाल गोपाल देवकीनन्दन गोपाल
अन्य नाम / खोज: gopala gopala devaki nandana gopala · gopala dhun · devaki nandana gopala · gopala krishna dhun
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✦ अर्थ
यह सर्वाधिक लोकप्रिय कृष्ण धुनों में से एक है, जिसमें 'गोपाल' (गौओं के रक्षक) और 'देवकीनन्दन' (देवकी के प्रिय पुत्र) नामों को प्रेमपूर्वक दोहराया जाता है। सरल, मधुर और लयबद्ध यह धुन कीर्तनों, सत्संगों और घरों में गाई जाती है और हृदय को कृष्णमय कर देती है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Krishna dhun / nama-kirtan · Unknown (traditional / devotional folk) · Medieval to modern Bhakti tradition
हरे कृष्ण महामन्त्र की भाँति यह धुन नाम-संकीर्तन की जीवन्त परम्परा से सम्बन्धित है — पवित्र नामों का सामूहिक गायन। 'गोपाल' और 'देवकीनन्दन' को दोहराकर भक्त कृष्ण की वृन्दावन के ग्वाल रक्षक के रूप में अन्तरंग भूमिका और इस संसार में देवकी-पुत्र के रूप में उनके अवतरण दोनों का स्मरण करते हैं। यह मन्दिरों और घरों में समान रूप से सबसे सरल और सर्वाधिक प्रिय कृष्ण कीर्तनों में से एक है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
सन्त सिखाते हैं कि पवित्र नाम स्वयं भगवान से अभिन्न है; जो भक्त इस सरल धुन में स्वयं को खो देते हैं वे प्रेम के अश्रु और कृष्ण की निकटता की स्पष्ट अनुभूति का वर्णन करते हैं, क्योंकि बार-बार दोहराए गए नाम चिन्ता को घोल देते हैं और हृदय को आनन्द से भर देते हैं।
मंत्र
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गोपाल गोपाल देवकीनन्दन गोपाल । गोपाल गोपाल देवकीनन्दन गोपाल ॥
Gopala Gopala Devaki-nandana Gopala Gopala Gopala Devaki-nandana Gopala
अर्थ:हे गोपाल, गोपाल — देवकी के लाडले पुत्र, हे गोपाल! (श्रीकृष्ण, ग्वालों के स्वामी और देवकी माता के पुत्र के पवित्र नामों का प्रेमपूर्वक कीर्तन।)
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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गोपाल गोपाल देवकीनन्दन गोपाल पाठ के लाभ
कृष्ण के पवित्र नामों का जप (नाम-जप) हृदय और मन को शुद्ध करता है
अत्यन्त सरल और मधुर, समूह कीर्तन, सत्संग और बच्चों के लिए उपयुक्त
कृष्ण का आवाहन गोपाल — समस्त प्राणियों के प्रेमी रक्षक एवं पालक — के रूप में करता है
चंचल मन को शान्त करता है और भक्ति में गहन, आनन्दमय तल्लीनता लाता है
घंटों निरन्तर जपा जा सकता है, मन को एकाग्र स्मरण की ओर ले जाता है
कृष्ण के देवकी-पुत्र रूप में जन्म का स्मरण कराता है, प्रेम (भक्ति) के बन्धन को गहरा करता है
गोपाल गोपाल देवकीनन्दन गोपाल जप विधि
नामों को एक सरल, पुनरावर्ती स्वर में गाएँ, अकेले अथवा समूह में कीर्तन की प्रश्न-उत्तर शैली के साथ। लय को मन को कृष्ण के नामों में ले जाने दें। कोई निश्चित संख्या नहीं — इसे माला पर (108 बार) जपा जा सकता है अथवा हृदय की इच्छानुसार जितनी देर चाहें आनन्दपूर्वक गाया जा सकता है। ताली, हारमोनियम या सरल वाद्य तल्लीनता को गहरा करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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