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श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे

🕉️ hindu·📿 11× जप·🕐 प्रातः या सायं भजन के समय, जन्माष्टमी और एकादशी पर, अथवा स्मरण के लिए किसी भी समय·📜 Traditional Krishna bhajan (naam-kirtan)

अन्य नाम / खोज: he nath narayan vasudeva · krishna govind hare murari · shri krishna govind hare murare

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अर्थ

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे एक प्रिय कृष्ण नाम-कीर्तन है, जो भगवान के सबसे प्यारे नामों — गोविन्द, हरि, मुरारि, नारायण, वासुदेव — को एक सरल माला में पिरोता है। इसे बार-बार धुन के रूप में गाया जाता है और कोई भी इसमें सरलता से सम्मिलित हो सकता है। यह मन को शांति देता है और हृदय को कृष्ण-भक्ति से भर देता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Krishna bhajan (naam-kirtan) · Traditional · Traditional, sung across the bhakti tradition

भक्ति परम्परा में, केवल भगवान के नामों का गायन (नाम-कीर्तन) एक पूर्ण आध्यात्मिक साधना मानी जाती है। यह धुन कृष्ण के सबसे प्रिय नामों को दो छोटी पंक्तियों में एकत्र करती है ताकि हर आयु और सामर्थ्य के भक्त इसमें भाग ले सकें। यह लम्बे समय से सामूहिक गायन के लिए प्रिय रही है, जहाँ दिव्य नामों की पुनरावृत्ति एक साधारण मंडली को साझी उपासना में बदल देती है।

शास्त्रों में वर्णित

संत सिखाते हैं कि भगवान और उनके नाम में कोई अंतर नहीं है — 'गोविन्द' या 'नारायण' को प्रेम से उच्चारित करना उनकी उपस्थिति को निमंत्रण देना है। जो भक्त इस धुन को नियमित रूप से गाते हैं वे हृदय में हल्केपन और मन की स्थिरता का अनुभव करते हैं, जो कृष्ण के निरंतर स्मरण का स्वाभाविक फल है।

मंत्र

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श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवा॥

Shri Krishna Govinda Hare Murare He Natha Narayana Vasudeva

अर्थ:हे श्री कृष्ण, गोविन्द, हरि, मुरारि; हे नाथ नारायण, वासुदेव — मैं आपके नामों का स्मरण करता हूँ।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

श्री कृष्ण🔊Shri Krishnaश्री कृष्ण — श्रीयुक्त कृष्ण — सर्व-आकर्षक भगवान
गोविन्द🔊Govindaगोविन्द — गौओं के रक्षक; इन्द्रियों और पृथ्वी को आनन्द देने वाले
हरे🔊Hareहरे — हे हरि — दुःख हरने वाले और हृदय चुराने वाले
मुरारे🔊Murareमुरारे — हे मुर दैत्य के शत्रु
हे नाथ🔊He Nathaहे नाथ — हे प्रभु, हे स्वामी
नारायण🔊Narayanaनारायण — समस्त प्राणियों के आश्रय व विश्रामस्थल
वासुदेव🔊Vasudevaवासुदेव — वसुदेव-पुत्र; सर्वव्यापी

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे पाठ के लाभ

एक सरल नाम-कीर्तन जो कृष्ण के सबसे प्रिय नामों को एक साथ पिरोता है

सत्संग, मंदिर और घरों में एक सहज सामूहिक धुन के रूप में व्यापक रूप से गाया जाता है

कोमल, पुनरावृत्त धुन जिसमें कोई भी शब्द पहले से जाने बिना सम्मिलित हो सकता है

प्रत्येक नाम — गोविन्द, हरि, मुरारि, नारायण, वासुदेव — स्वयं में एक पूर्ण स्मरण है

मन को शांत करता है और हृदय को कृष्ण के प्रति भक्ति से भर देता है

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे जप विधि

जप संख्या11बार
उत्तम समयप्रातः या सायं भजन के समय, जन्माष्टमी और एकादशी पर, अथवा स्मरण के लिए किसी भी समय

इसे एक प्रवाहमान धुन के रूप में गाएँ, दोनों पंक्तियों को तालियों या सरल वाद्यों के साथ प्रश्न-उत्तर रूप में दोहराएँ। धीरे-धीरे आरम्भ करें और राग को मंडली को अपने साथ ले जाने दें। अकेले में, चलते समय या सोने से पहले कृष्ण के नामों के स्मरण रूप में इसे धीरे-धीरे दोहराएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह एक लोकप्रिय कृष्ण नाम-कीर्तन है — एक भक्ति-गान जो पूर्णतः भगवान के नामों (कृष्ण, गोविन्द, हरि, मुरारि, नारायण, वासुदेव) से बना है। बार-बार गाया जाने वाला, यह सबसे सरल और सर्वाधिक प्रिय कृष्ण भजनों में से एक है।
'मुरारे' कृष्ण को मुर नामक दैत्य के संहारक के रूप में सम्बोधित करता है, यह उपाधि उन्हें मुरारि नाम भी देती है — भगवान का स्मरण जो रक्षक के रूप में बुराई को दूर करते हैं।
एक धुन के रूप में — सामूहिक गायन में तालियों के साथ एक पुनरावृत्त, प्रवाहमान राग। इसका अनुसरण करना सरल है, इसलिए पूरी मंडली पहली बार सुनने पर भी इसमें सम्मिलित हो सकती है।

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