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कृष्ण मंत्र

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 प्रातः या सायं; विशेषकर जन्माष्टमी, बुधवार और कार्तिक मास में·📜 The beej mantra of Lord Krishna

अन्य नाम / खोज: om kleem krishnaya namah

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अर्थ

कृष्ण मंत्र "ॐ क्लीं कृष्णाय नमः" भगवान कृष्ण का मूल बीज मंत्र है, जो दिव्य प्रेम और आकर्षण के बीज 'क्लीं' पर आधारित है। यह भक्ति, प्रेम-सम्बन्धों, वैवाहिक सौहार्द्र और हृदय की कामनाओं की पूर्ति के लिए जपा जाता है। यह कृष्ण की कृपा खींचता है और हृदय को आनन्द व दिव्य प्रेम से भर देता है।

उत्पत्ति और कथा

The beej mantra of Lord Krishna · Traditional (Vedic / Puranic)

"ॐ क्लीं कृष्णाय नमः" भगवान कृष्ण का बीज मंत्र है — प्रेम के सर्व-आकर्षक स्वामी और विष्णु के आठवें अवतार का। इसका बीज "क्लीं", दिव्य आकर्षण का अक्षर, इसे कृष्ण की मधुरता और कृपा का मंत्र बनाता है। भक्त इसे चिरकाल से अपनी भक्ति को गहरा करने, अपने सम्बन्धों को आशीष देने, और वृन्दावन के स्वामी द्वारा सहज दिए जाने वाले आनन्द का आस्वादन करने के लिए जपते आए हैं।

मंत्र

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क्लीं कृष्णाय नमः

Om Kleem Krishnaya Namah.

अर्थ:ॐ। दिव्य प्रेम के बीज सहित भगवान कृष्ण को नमस्कार है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

🔊Omआदिनाद (परम ध्वनि)
क्लीं🔊Kleemदिव्य प्रेम और आकर्षण का बीज — कृष्ण को प्रिय काम-बीज
कृष्णाय🔊Krishnayaभगवान कृष्ण को
नमः🔊Namahनमस्कार / मैं प्रणाम करता हूँ

कृष्ण मंत्र पाठ के लाभ

भगवान कृष्ण का मूल बीज मंत्र, जो "क्लीं" — दिव्य प्रेम, मोहकता और आकर्षण के बीज — पर आधारित है

भक्ति, प्रेममय सम्बन्धों, वैवाहिक सौहार्द्र, मोहकता और हृदय की कामनाओं की पूर्ति के लिए जपा जाता है

कहा जाता है कि यह कृष्ण की कृपा खींचता है, शोक और भय मिटाता है, और हृदय को आनन्द व दिव्य प्रेम से भर देता है

कृष्ण जन्माष्टमी पर, बुधवार को और कार्तिक मास में विशेष रूप से प्रभावशाली

प्रातः या सायं कृष्ण की प्रतिमा के सम्मुख तुलसीदल, मुरली या दीप के साथ 108 बार जपा जाता है

कृष्ण-भक्ति के मार्ग पर चलने वालों के लिए एक सरल दैनिक मंत्र, हरे कृष्ण महामंत्र के साथ

कृष्ण मंत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयप्रातः या सायं; विशेषकर जन्माष्टमी, बुधवार और कार्तिक मास में

स्नान के पश्चात्, तुलसीदल और घी के दीप के साथ भगवान कृष्ण की प्रतिमा के सम्मुख बैठें। "ॐ क्लीं कृष्णाय नमः" तुलसी की माला पर 108 बार जपें, कृष्ण को प्रेमपूर्वक हृदय में धारण करते हुए। इसे भक्ति के लिए, प्रेम और विवाह में सौहार्द्र के लिए, तथा आन्तरिक आनन्द के लिए जपा जा सकता है। इसे हरे कृष्ण महामंत्र और कृष्ण की लीलाओं के पाठ के साथ जपें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवान कृष्ण का बीज मंत्र है "ॐ क्लीं कृष्णाय नमः"। "क्लीं" दिव्य प्रेम और आकर्षण का बीज (काम-बीज) है, जो इसे कृष्ण की प्रेममयी, सर्व-आकर्षक कृपा का मंत्र बनाता है।
यह भक्ति, प्रेममय और सौहार्द्रपूर्ण सम्बन्धों, वैवाहिक सुख, मोहकता और सच्ची कामनाओं की पूर्ति के लिए तथा हृदय को कृष्ण-भक्ति के आनन्द से भरने के लिए जपा जाता है।
इसे प्रतिदिन तुलसी की माला पर 108 बार जपें, प्रातः या सायं। इसे दिनभर कृष्ण के सरल स्मरण के रूप में भी जपा जा सकता है।
"क्लीं" एक बीज (बीजाक्षर) है जो दिव्य प्रेम, आकर्षण और कामना की पूर्ति से जुड़ा है। इस मंत्र में यह भगवान कृष्ण के प्रेममय, सर्व-आकर्षक स्वरूप का आह्वान करता है।
इस मंत्र के साथ हरे कृष्ण महामंत्र, कृष्ण चालीसा, "अच्युतम् केशवम्" और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का पाठ करें।

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