गुणैरुत्तमतां याति — Word-by-Word Meaning
गुणैरुत्तमतां याति
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
गुणैः
guṇaiḥ
गुणों से, सद्गुणों से, योग्यता से
उत्तमताम्
uttamatām
उत्तमता, श्रेष्ठता, उच्च / श्रेष्ठ स्थिति
याति
yāti
प्राप्त करता है, पहुँचता है
न
na
नहीं
उच्चैः-आसन-संस्थितः
uccair āsana-saṁsthitaḥ
(केवल) ऊँचे आसन / उच्च पद पर बैठ जाने से
प्रासाद-शिखर-स्थः
prāsāda-śikhara-sthaḥ
राजमहल की चोटी पर बैठा / स्थित
अपि
api
भी, यद्यपि
काकः
kākaḥ
एक कौआ
किम्
kim
क्या...? (प्रश्नवाचक)
गरुडायते
garuḍāyate
गरुड़ (दिव्य पक्षीराज) के समान आचरण करता / बन जाता है
Complete Translation
मनुष्य अपने गुणों से श्रेष्ठता को प्राप्त करता है, केवल ऊँचे आसन पर बैठ जाने से नहीं। भले ही वह राजमहल की चोटी पर जा बैठे, क्या कौआ इससे गरुड़ बन जाता है? चाणक्य सिखाते हैं कि पद और ऊँचे आसन सच्चा मूल्य नहीं देते — वह तो केवल मनुष्य के गुण एवं चरित्र से ही प्राप्त होता है।
Origin & History
Source: Chanakya Niti
Author: Chanakya (Vishnugupta / Kautilya)
Period: Ancient India (c. 4th–3rd century BCE)
चाणक्य, जिन्होंने राजाओं की सेवा की किन्तु पद से ऊपर योग्यता को मूल्यवान माना, प्रायः उच्च पद के अभिमान को चूर्ण करते थे। इस श्लोक में वे आग्रह करते हैं कि श्रेष्ठता केवल गुणों से प्राप्त होती है, और एक अविस्मरणीय चित्र से रिक्त अभिमान का उपहास करते हैं — महल के बुर्ज पर बैठा कौआ जो अब भी कौआ ही है, गरुड़ नहीं — यह सिखाते हुए कि सच्ची उन्नति चरित्र की होती है, आसन की नहीं।
Frequently Asked Questions
'गुणैरुत्तमतां याति' कहाँ से आया है?▼
यह चाणक्य नीति (नीति दर्पण) का एक प्रसिद्ध श्लोक है — चाणक्य (कौटिल्य / विष्णुगुप्त), नीति, राजनीति एवं व्यावहारिक ज्ञान के प्राचीन भारतीय आचार्य को आरोपित सूक्तियों का संग्रह।
कौआ-और-गरुड़ के चित्र का क्या अर्थ है?▼
गरुड़ भव्य पक्षीराज हैं। श्लोक पूछता है: भले ही एक साधारण कौआ राजमहल के सर्वोच्च शिखर पर बैठ जाए, क्या वह गरुड़ बन जाता है? निश्चय ही नहीं। उसी प्रकार, अल्प योग्यता वाला व्यक्ति मात्र ऊँचे पद पर बैठ जाने से महान् नहीं बन जाता।
इस श्लोक की व्यावहारिक शिक्षा क्या है?▼
कि सच्ची श्रेष्ठता गुणों एवं चरित्र से अर्जित होती है, पदवी, आसन या स्थिति से नहीं। यह पद पर आधारित अहंकार के विरुद्ध चेतावनी देता है और हमें वास्तविक गुण विकसित करने तथा दूसरों को उनके पद के बजाय योग्यता से आँकने को प्रोत्साहित करता है।
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