हनुमत् पञ्चरत्नम् — Word-by-Word Meaning
हनुमत् पञ्चरत्नम्
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
आदि शंकराचार्य के हनुमान की स्तुति में "पाँच रत्न" — पवन-पुत्र, सीता-राम के भक्त सेवक, बल के सागर व भक्ति के मूर्तरूप को वंदन करते पाँच रत्न-श्लोक।
Origin & History
Source: Ascribed to Adi Shankaracharya
Author: Adi Shankaracharya
Period: Classical
हनुमत् पञ्चरत्नम् परम्परा से आदि शंकराचार्य को आरोपित है। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित हनुमान की स्तुति में 'पाँच रत्न' — पवनपुत्र, सीता-राम के भक्त सेवक, बल के सागर और भक्ति के मूर्तरूप को वंदन करते पाँच रत्न-श्लोक।
Frequently Asked Questions
हनुमत् पञ्चरत्नम् क्या है?▼
आदि शंकराचार्य द्वारा रचित हनुमान की स्तुति में 'पाँच रत्न' — पवनपुत्र, सीता-राम के भक्त सेवक, बल के सागर और भक्ति के मूर्तरूप को वंदन करते पाँच रत्न-श्लोक।
इसकी रचना किसने की और इसका पाठ कब किया जाता है?▼
यह आदि शंकराचार्य को आरोपित है (आदि शंकराचार्य कृत मानी जाती है)। इसका पाठ प्रातः अथवा सायं भक्ति सहित किया जाता है, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को तथा हनुमान जयन्ती के समय।
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