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ह्रीं बीज मंत्र — Word-by-Word Meaning

ह्रीं बीज मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
सृष्टि की आदि ध्वनि — सार्वभौमिक स्पन्दन जो सबको धारण करता है
ह्रीं
Hreem
महान माया-बीज — देवी का आदिशक्ति एवं भुवनेश्वरी रूप का बीज, ब्रह्माण्ड की शासिका
Ha
शिव और आकाश/अन्तरिक्ष तत्त्व का प्रतीक — शुद्ध चेतना
Ra
अग्नि तत्त्व — देवी की पावन एवं ऊर्जादायी शक्ति
Ee
महामाया — परम स्त्री सृजन-शक्ति जो लोकों को जन्म देती है
ं (बिन्दु)
Anusvara (Bindu)
नासिक अनुनाद और शक्ति का बिन्दु — दुःख का हरण करने वाला (दुःख-हर)
नमः
Namah
मैं नमन करता हूँ, समर्पित होता हूँ — स्वयं को दिव्य माता को अर्पित करते हुए
भुवनेश्वर्यै
Bhuvaneshwaryai
भुवनेश्वरी को — वह देवी जो समस्त लोकों (भुवनों) की रानी एवं शासिका हैं
माया
Maya
माया — वह ब्रह्माण्डीय सृजन-शक्ति जिससे देवी विश्व को प्रकट करती हैं
शक्ति
Shakti
शक्ति — गतिशील दिव्य ऊर्जा एवं स्त्री-शक्ति जो समस्त सृष्टि को सजीव करती है
आदि शक्ति
Adi Shakti
आदि शक्ति — आदिमा देवी, वह मूल शक्ति जिससे देवी के समस्त रूप उत्पन्न होते हैं
भुवन
Bhuvana
भुवन — लोक, ब्रह्माण्ड — देवी द्वारा शासित अस्तित्व के समस्त क्षेत्र
बीज
Beej
बीज — एक अक्षर जो देवता की समस्त शक्ति को धारण करता है
तेज
Teja
तेज — देवी द्वारा प्रदत्त तेज एवं आध्यात्मिक दीप्ति
ह्रीं-कार
Hreemkara
ह्रीं-कार — ह्रीं का पवित्र ध्वनि-रूप, जो स्वयं देवी का शरीर माना जाता है
ऐश्वर्य
Aishwarya
ऐश्वर्य — सार्वभौमत्व एवं वैभव — भुवनेश्वरी की रानी-समान शक्ति एवं कृपा

Complete Translation

ॐ ह्रीं — मैं दिव्य माता के महान बीज-मंत्र को प्रणाम करता हूँ, जो आदिशक्ति का माया-बीज है और भुवनेश्वरी रूप में समस्त लोकों का शासन करती हैं। ॐ ह्रीं, विश्व की रानी भुवनेश्वरी को नमस्कार।

Origin & History

Source: Tantric tradition; Shakta Agamas, Devi Bhagavata and bija-mantra texts

Author: Tantric and Vedic seers (traditional)

Period: Ancient

शाक्त तंत्रों में ह्रीं माया-बीज और दिव्य माता के ही ध्वनि-शरीर रूप में पूजित है। यह 'ह' (शिव/आकाश), 'र' (अग्नि), 'ई' (महामाया) और बिन्दु (शक्ति का बिन्दु) से बना है। भुवनेश्वरी — जिनका स्वरूप समस्त ब्रह्माण्ड है — के बीज रूप में ह्रीं सृष्टि, पालन और संहार को एक अक्षर में समेटे हुए कहा जाता है, यही कारण है कि यह इतने सारे देवी मंत्रों के हृदय में स्थित है।

Frequently Asked Questions

ह्रीं बीज मंत्र का क्या अर्थ है?
ह्रीं (ह्रीं) महान 'माया-बीज' है — दिव्य माता का आदिशक्ति रूप में, और विशेषतः समस्त लोकों की शासिका भुवनेश्वरी का बीज ध्वनि। इसका कोई शब्दकोशीय अर्थ नहीं, किन्तु यह स्त्री-दिव्यता की संपूर्ण सृजन-शक्ति को धारण करने वाली एक सघन ध्वनि है। इसे प्रायः 'शक्ति-प्रणव', देवी का ॐ कहा जाता है।
ह्रीं किस देवी से सम्बन्धित है?
ह्रीं मुख्यतः भुवनेश्वरी और सार्वभौमिक आदिशक्ति / महामाया का बीज है। चूँकि यह देवी को उनके सर्वाधिक सार्वभौमिक रूप में दर्शाता है, यह दुर्गा, लक्ष्मी, काली, तारा और अन्य महाविद्याओं के मंत्रों में भी एक केन्द्रीय बीज रूप में आता है।
क्या ह्रीं मंत्र स्वयं जपना सुरक्षित है?
'ॐ ह्रीं नमः' को भक्ति एवं शुद्ध हृदय से जपना व्यापक रूप से सुरक्षित और कल्याणकारी माना जाता है। चूँकि ह्रीं एक शक्तिशाली शक्ति-बीज है, परम्परागत गुरु गहन साधना हेतु इसे किसी योग्य गुरु से ग्रहण करने की सलाह देते हैं, किन्तु माता की कृपा हेतु भक्तिपूर्ण जप सबके लिए स्वागत-योग्य है।
ह्रीं जपने का सर्वोत्तम समय कौन सा है?
ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल पूर्व का समय) और शुक्रवार उत्तम हैं, और नवरात्रि — विशेषतः अष्टमी और नवमी की रात्रियाँ — ह्रीं से देवी साधना को तीव्र करने का वर्ष का सर्वाधिक शुभ काल है।

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