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hreemhrimbhuvaneshwarishakti

ह्रीं बीज मंत्र

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल पूर्व), शुक्रवार, नवरात्रि और अष्टमी/नवमी·📜 Tantric tradition; Shakta Agamas, Devi Bhagavata and bija-mantra texts

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अर्थ

ह्रीं (ह्रीं) सर्वोच्च माया-बीज है — दिव्य माता का आदिशक्ति एवं विशेषतः भुवनेश्वरी (लोकों की रानी) रूप में महान बीज मंत्र। इसे प्रायः शक्ति-प्रणव ('देवी का ॐ') कहा जाता है, जो स्त्री-दिव्यता की संपूर्ण सृजन-शक्ति को धारण करता है और असंख्य देवी मंत्रों का हृदय है। यह दिव्य कृपा, आंतरिक शक्ति, ज्ञान-प्रकाश और दुःख-नाश हेतु जपा जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Tantric tradition; Shakta Agamas, Devi Bhagavata and bija-mantra texts · Tantric and Vedic seers (traditional) · Ancient

शाक्त तंत्रों में ह्रीं माया-बीज और दिव्य माता के ही ध्वनि-शरीर रूप में पूजित है। यह 'ह' (शिव/आकाश), 'र' (अग्नि), 'ई' (महामाया) और बिन्दु (शक्ति का बिन्दु) से बना है। भुवनेश्वरी — जिनका स्वरूप समस्त ब्रह्माण्ड है — के बीज रूप में ह्रीं सृष्टि, पालन और संहार को एक अक्षर में समेटे हुए कहा जाता है, यही कारण है कि यह इतने सारे देवी मंत्रों के हृदय में स्थित है।

शास्त्रों में वर्णित

भुवनेश्वरी के भक्त मानते हैं कि ह्रीं का दृढ़ जप शोक और भय को विलीन कर देता है और धीरे-धीरे एक सार्वभौम, अडिग शांति प्रदान करता है, मानो लोकों की रानी स्वयं हृदय की रक्षा कर रही हों। तांत्रिक परम्परा ह्रीं को इतना पूर्ण बताती है कि समस्त श्रीविद्या इस एक पवित्र ध्वनि में समाहित की जा सकती है।

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

ह्रीं

Om Hreem

अर्थ:ॐ ह्रीं — मैं दिव्य माता के महान बीज-मंत्र को प्रणाम करता हूँ, जो आदिशक्ति का माया-बीज है और भुवनेश्वरी रूप में समस्त लोकों का शासन करती हैं। ॐ ह्रीं, विश्व की रानी भुवनेश्वरी को नमस्कार।

श्लोक 2

ह्रीं नमः

Om Hreem Namah

श्लोक 3

ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः

Om Hreem Bhuvaneshwaryai Namah

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

🔊Omसृष्टि की आदि ध्वनि — सार्वभौमिक स्पन्दन जो सबको धारण करता है
ह्रीं🔊Hreemमहान माया-बीज — देवी का आदिशक्ति एवं भुवनेश्वरी रूप का बीज, ब्रह्माण्ड की शासिका
🔊Haशिव और आकाश/अन्तरिक्ष तत्त्व का प्रतीक — शुद्ध चेतना
🔊Raअग्नि तत्त्व — देवी की पावन एवं ऊर्जादायी शक्ति
🔊Eeमहामाया — परम स्त्री सृजन-शक्ति जो लोकों को जन्म देती है
ं (बिन्दु)🔊Anusvara (Bindu)नासिक अनुनाद और शक्ति का बिन्दु — दुःख का हरण करने वाला (दुःख-हर)
नमः🔊Namahमैं नमन करता हूँ, समर्पित होता हूँ — स्वयं को दिव्य माता को अर्पित करते हुए
भुवनेश्वर्यै🔊Bhuvaneshwaryaiभुवनेश्वरी को — वह देवी जो समस्त लोकों (भुवनों) की रानी एवं शासिका हैं
माया🔊Mayaमाया — वह ब्रह्माण्डीय सृजन-शक्ति जिससे देवी विश्व को प्रकट करती हैं
शक्ति🔊Shaktiशक्ति — गतिशील दिव्य ऊर्जा एवं स्त्री-शक्ति जो समस्त सृष्टि को सजीव करती है
आदि शक्ति🔊Adi Shaktiआदि शक्ति — आदिमा देवी, वह मूल शक्ति जिससे देवी के समस्त रूप उत्पन्न होते हैं
भुवन🔊Bhuvanaभुवन — लोक, ब्रह्माण्ड — देवी द्वारा शासित अस्तित्व के समस्त क्षेत्र
बीज🔊Beejबीज — एक अक्षर जो देवता की समस्त शक्ति को धारण करता है
तेज🔊Tejaतेज — देवी द्वारा प्रदत्त तेज एवं आध्यात्मिक दीप्ति
ह्रीं-कार🔊Hreemkaraह्रीं-कार — ह्रीं का पवित्र ध्वनि-रूप, जो स्वयं देवी का शरीर माना जाता है
ऐश्वर्य🔊Aishwaryaऐश्वर्य — सार्वभौमत्व एवं वैभव — भुवनेश्वरी की रानी-समान शक्ति एवं कृपा

ह्रीं बीज मंत्र पाठ के लाभ

दिव्य माता की शक्ति का आवाहन करता है — ह्रीं आदिशक्ति एवं भुवनेश्वरी की ऊर्जा को जागृत करता है, जपकर्ता को ब्रह्माण्डीय स्त्री-स्रोत से सीधे जोड़ता है।

कृपा, वैभव और सार्वभौमत्व प्रदान करता है — लोकों की रानी भुवनेश्वरी के बीज रूप में यह गरिमा, अधिकार और अपने जीवन पर अधिपत्य देने वाला कहा जाता है।

दुःख और नकारात्मकता को दूर करता है — ह्रीं को परम्परागत रूप से दुःख-हर माना जाता है, जो हृदय से भारीपन और निराशा को दूर करता है।

मन को शुद्ध एवं प्रकाशित करता है — आकाश और अग्नि तत्त्वों को मिलाकर यह भीतर की अशुद्धियों को भस्म करता है और आध्यात्मिक स्पष्टता एवं दीप्ति लाता है।

समस्त देवी उपासना को सबल करता है — असंख्य देवी मंत्रों का केन्द्र होने से ह्रीं का जप दुर्गा, लक्ष्मी, काली और महाविद्याओं की भक्ति को गहरा करता है।

आंतरिक शक्ति और अंतर्ज्ञान को जागृत करता है — नियमित अभ्यास सूक्ष्म ऊर्जा को सक्रिय करता, अंतर्ज्ञान को तीव्र करता और आंतरिक बल एवं निर्भयता विकसित करता है, ऐसा कहा जाता है।

ह्रीं बीज मंत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल पूर्व), शुक्रवार, नवरात्रि और अष्टमी/नवमी

स्वच्छ, शांत स्थान में देवी के दीप या प्रतिमा के सम्मुख पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। श्वास को स्थिर करें, फिर रुद्राक्ष या स्फटिक माला से 'ॐ ह्रीं नमः' (अथवा केवल 'ह्रीं') 108 बार जपें। 'ह-री-म्' को स्पष्ट उच्चारित करें, 'म्' (बिन्दु) को सहस्रार की ओर ऊपर अनुनादित होने दें। जपते समय देवी को समस्त लोकों की प्रेममयी शासिका के रूप में अनुभव करें और अपनी चिन्ताओं को उन्हें समर्पित कर दें। नवरात्रि और शुक्रवार विशेष रूप से शक्तिशाली हैं, और 40 दिन का संकल्प प्रभाव को गहरा करता है। जहाँ सम्भव हो ह्रीं को किसी योग्य गुरु से ग्रहण करें, क्योंकि यह एक प्रबल शक्ति-बीज है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ह्रीं (ह्रीं) महान 'माया-बीज' है — दिव्य माता का आदिशक्ति रूप में, और विशेषतः समस्त लोकों की शासिका भुवनेश्वरी का बीज ध्वनि। इसका कोई शब्दकोशीय अर्थ नहीं, किन्तु यह स्त्री-दिव्यता की संपूर्ण सृजन-शक्ति को धारण करने वाली एक सघन ध्वनि है। इसे प्रायः 'शक्ति-प्रणव', देवी का ॐ कहा जाता है।
ह्रीं मुख्यतः भुवनेश्वरी और सार्वभौमिक आदिशक्ति / महामाया का बीज है। चूँकि यह देवी को उनके सर्वाधिक सार्वभौमिक रूप में दर्शाता है, यह दुर्गा, लक्ष्मी, काली, तारा और अन्य महाविद्याओं के मंत्रों में भी एक केन्द्रीय बीज रूप में आता है।
'ॐ ह्रीं नमः' को भक्ति एवं शुद्ध हृदय से जपना व्यापक रूप से सुरक्षित और कल्याणकारी माना जाता है। चूँकि ह्रीं एक शक्तिशाली शक्ति-बीज है, परम्परागत गुरु गहन साधना हेतु इसे किसी योग्य गुरु से ग्रहण करने की सलाह देते हैं, किन्तु माता की कृपा हेतु भक्तिपूर्ण जप सबके लिए स्वागत-योग्य है।
ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल पूर्व का समय) और शुक्रवार उत्तम हैं, और नवरात्रि — विशेषतः अष्टमी और नवमी की रात्रियाँ — ह्रीं से देवी साधना को तीव्र करने का वर्ष का सर्वाधिक शुभ काल है।

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