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ਜਾਪੁ ਸਾਹਿਬ — Word-by-Word Meaning

ਜਾਪੁ ਸਾਹਿਬ

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Complete Translation

Origin & History

Source: Dasam Granth

Author: Guru Gobind Singh Ji

Period: 17th–18th century CE

जाप साहिब दसम ग्रंथ की आरंभिक बाणी है और खालसा की नित्य साधना का एक स्तंभ है। दिव्य नामों की अपनी विस्तृत माला के द्वारा यह मन को हर रूप में और सभी रूपों से परे परमात्मा का सिमरन करना सिखाती है, जिससे भक्ति व निर्भय संकल्प दोनों जागृत होते हैं।

Frequently Asked Questions

जाप साहिब किसने रचा?
जाप साहिब को दसवें सिख गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने रचा। यह दसम ग्रंथ के आरंभ में आती है।
जाप साहिब किस विषय में है?
यह सैकड़ों नामों व गुणों के द्वारा परमात्मा की महिमा करती है, परमेश्वर को निराकार, कालरहित, जन्म-मृत्यु से परे, बैर व जाति से रहित, फिर भी सबमें विद्यमान बताती है।
जाप साहिब कब पढ़ी जाती है?
यह नित्य प्रातःकालीन नितनेम की बाणियों में से एक है, जो जपजी साहिब के बाद पढ़ी जाती है।

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