Mantra.Tips

जगन्नाथाष्टकम् — Word-by-Word Meaning

जगन्नाथाष्टकम्

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Complete Translation

आदि शंकराचार्य रचित पुरी के भगवान जगन्नाथ की आठ श्लोकों की स्तुति, जिनमें प्रत्येक "वही जगन्नाथ स्वामी मेरे नयनपथ में आएँ" से समाप्त होता है। पूर्वी सागर के महान मंदिर का अति प्रिय स्तोत्र।

Origin & History

Source: Ascribed to Adi Shankaracharya

Author: Adi Shankaracharya

Period: Classical

जगन्नाथाष्टकम् परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य द्वारा रचित मानी जाती है। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित पुरी के भगवान जगन्नाथ की आठ श्लोकों की स्तुति, जिनमें प्रत्येक 'वही जगन्नाथ स्वामी मेरे नयनपथ में आएँ' से समाप्त होता है। पूर्वी सागर के महान मंदिर का अति प्रिय स्तोत्र।

Frequently Asked Questions

जगन्नाथाष्टकम् क्या है?
आदि शंकराचार्य द्वारा रचित पुरी के भगवान जगन्नाथ की आठ श्लोकों की स्तुति, जिनमें प्रत्येक 'वही जगन्नाथ स्वामी मेरे नयनपथ में आएँ' से समाप्त होता है। पूर्वी सागर के महान मंदिर का अति प्रिय स्तोत्र।
जगन्नाथाष्टकम् की रचना किसने की और इसका पाठ कब किया जाता है?
यह आदि शंकराचार्य को समर्पित है। इसका पाठ प्रातः या संध्या समय श्रद्धा सहित किया जाता है, और विशेष रूप से गुरुवार तथा एकादशी को एवं एकादशी और विष्णु के पर्वों पर।

Ready to start chanting?

See Benefits & How to Chant →