जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर — Word-by-Word Meaning
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
जय
jai
जय — जय हो, विजय, नमन
हनुमान
Hanuman
हनुमान — भगवान हनुमान, पवनदेव के पुत्र
ज्ञान
gyan
ज्ञान — ज्ञान, बुद्धि
गुन
gun
गुन — गुण, सद्गुण
सागर
sagar
सागर — सागर — अर्थात् ज्ञान एवं गुणों का सागर
जय
jai
जय — जय हो, विजय
कपीस
kapis
कपीस — वानरों के स्वामी (कपि + ईश)
तिहुँ
tihun
तिहुँ — तीनों (लोकों) का
लोक
lok
लोक — लोक, भुवन
उजागर
ujagar
उजागर — प्रकाशित करने वाले, जो उजाला फैलाते एवं यशस्वी बनाते हैं
Complete Translation
हे हनुमान! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं, आपकी जय हो! हे कपीश्वर! आप तीनों लोकों को प्रकाशित करने वाले हैं, आपकी जय हो॥
Origin & History
Source: Hanuman Chalisa (opening chaupai, verse 1)
Author: Tulsidas
Period: 16th century CE
गोस्वामी तुलसीदास, जिन्होंने रामचरितमानस की रचना की, उन्हीं महान सन्त-कवि ने अवधी में हनुमान चालीसा को चालीस चौपाइयों के रूप में रचा, जो आरम्भिक एवं समापन दोहों से घिरी हैं। दो आरम्भिक दोहों में अपने मन को पवित्र कर तथा बल, बुद्धि एवं विद्या की प्रार्थना करने के पश्चात्, वे इस विजयी अभिवादन से स्तुति का आरम्भ करते हैं, हनुमान को ज्ञान के सागर एवं तीनों लोकों के प्रकाशक के रूप में नमन करते हुए।
Frequently Asked Questions
'जय हनुमान ज्ञान गुन सागर' का क्या अर्थ है?▼
इसका अर्थ है 'जय हो हनुमान, ज्ञान और गुणों के सागर की।' 'ज्ञान' अर्थात् बुद्धि, 'गुन' अर्थात् सद्गुण, और 'सागर' अर्थात् समुद्र — अतः हनुमान को ज्ञान एवं सद्गुण दोनों के असीम सागर के रूप में स्तुत किया गया है।
'जय कपीस तिहुँ लोक उजागर' का क्या अर्थ है?▼
'कपीस' अर्थात् वानरों के स्वामी (वानरराज हनुमान), और 'तिहुँ लोक उजागर' अर्थात् तीनों लोकों — पृथ्वी, स्वर्ग एवं पाताल — को प्रकाशित करने वाले। एक साथ यह हनुमान को उस सत्ता के रूप में नमन करता है जिनकी कीर्ति सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में चमकती है।
यह पंक्ति हनुमान चालीसा में कहाँ आती है?▼
यह हनुमान चालीसा की सर्वप्रथम चौपाई है, जो दो आरम्भिक दोहों ('श्री गुरु चरन सरोज रज' एवं 'बुद्धिहीन तनु जानिके') के तुरन्त बाद गाई जाती है। यहीं से चालीस स्तुति-पदों का आरम्भ होता है।
क्या मैं इस पंक्ति को अकेले गा सकता हूँ?▼
हाँ। भक्तजन प्रायः 'जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर' को अकेले विजय-घोष (जयकारे) के रूप में गाते हैं या ज्ञान एवं शुभ आरम्भ हेतु एक छोटी प्रार्थना के रूप में दोहराते हैं, विशेषकर मंगलवार एवं शनिवार को।
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