जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
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✦ अर्थ
यह हनुमान चालीसा की प्रथम चौपाई है, दो आरम्भिक दोहों के बाद स्तुति का पहला पद। इसमें हनुमानजी को 'ज्ञान गुन सागर' — ज्ञान और गुणों का अपार सागर — तथा 'कपीस' अर्थात् वानरों के स्वामी कहा गया है, जिनकी कीर्ति तीनों लोकों को प्रकाशित करती है ('तिहुँ लोक उजागर')। विजय-घोष के रूप में अकेले गाई जाने वाली यह पंक्ति सम्पूर्ण चालीसा का भक्तिमय स्वर निर्धारित करती है और हिन्दू प्रार्थना की सर्वाधिक प्रसिद्ध पंक्तियों में से एक है।
उत्पत्ति और कथा
Hanuman Chalisa (opening chaupai, verse 1) · Tulsidas · 16th century CE
गोस्वामी तुलसीदास, जिन्होंने रामचरितमानस की रचना की, उन्हीं महान सन्त-कवि ने अवधी में हनुमान चालीसा को चालीस चौपाइयों के रूप में रचा, जो आरम्भिक एवं समापन दोहों से घिरी हैं। दो आरम्भिक दोहों में अपने मन को पवित्र कर तथा बल, बुद्धि एवं विद्या की प्रार्थना करने के पश्चात्, वे इस विजयी अभिवादन से स्तुति का आरम्भ करते हैं, हनुमान को ज्ञान के सागर एवं तीनों लोकों के प्रकाशक के रूप में नमन करते हुए।
✦ शास्त्रों में वर्णित
भक्तजन मानते हैं कि 'ज्ञान के सागर' को इस जयकारे से चालीसा का आरम्भ करना ही बुद्धि को तीक्ष्ण कर देता है; अनेक विद्यार्थी एवं साधक अध्ययन से पूर्व इस एक पंक्ति का पाठ करते हैं, इस विश्वास से कि ज्ञान गुन सागर हनुमान स्पष्टता प्रदान करेंगे एवं भ्रम को दूर करेंगे।
मंत्र
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जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
Jai Hanuman Gyan Gun Sagar. Jai Kapis Tihun Lok Ujagar.
अर्थ:हे हनुमान! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं, आपकी जय हो! हे कपीश्वर! आप तीनों लोकों को प्रकाशित करने वाले हैं, आपकी जय हो॥
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर पाठ के लाभ
हनुमान को ज्ञान के सागर रूप में आवाहित करता है — बुद्धि एवं ज्ञान की स्पष्टता की कामना हेतु पढ़ा जाता है
किसी भी हनुमान उपासना के आरम्भ का शुभ विजय-मंगलाचरण
पाठ के आरम्भ में ही मन को भक्ति एवं आत्मविश्वास से भर देता है
हनुमान को 'कपीस' एवं 'तिहुँ लोक उजागर' कहना भक्त को उनकी सर्वव्यापी कीर्ति से जोड़ता है
मन्दिरों एवं शोभायात्राओं में प्रायः अकेले जयकारे (विजय-घोष) के रूप में गाया जाता है
मन की जड़ता को दूर करता है और आध्यात्मिक अध्ययन हेतु उत्साह जगाता है
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर जप विधि
इस आरम्भिक चौपाई को ऊँचे, आनन्दमय स्वर में हनुमान के जयकारे के रूप में गाएँ। सम्पूर्ण हनुमान चालीसा का आरम्भ करते समय यह प्रथम पंक्ति के रूप में आदर्श है, अथवा इसे ज्ञान एवं दिन के शुभ आरम्भ हेतु अकेले 11 या 21 बार दोहराया जा सकता है। हनुमान की प्रतिमा या उगते सूर्य की ओर मुख करके बैठें, 'जय हनुमान' पर हाथ जोड़ें, और हृदय को उनके असीम ज्ञान (ज्ञान गुन सागर) के भाव से भर जाने दें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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