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जो बोले सो निहाल — सत श्री अकाल — Word-by-Word Meaning

जो बोले सो निहाल — सत श्री अकाल

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

जो बोले
Jo Bole
जो (प्रभु का नाम) बोलता है
सो निहाल
So Nihal
वह निहाल, कृतार्थ, आनंदित हो जाएगा
सत श्री अकाल
Sat Sri Akal
सत्य है वह महान कालातीत — शाश्वत, अमर प्रभु (अकाल)

Complete Translation

'जो (प्रभु-नाम) बोले, वह निहाल हो जाएगा — सत्य है वह महान कालातीत (अकाल) प्रभु!' यह सिखों का जयकारा है — संगत द्वारा उठाई जाने वाली आनंद व विजय की उद्घोषणा। एक जन 'जो बोले सो निहाल' पुकारता है और सब उत्तर देते हैं 'सत श्री अकाल'।

Origin & History

Source: Sikh tradition — the jaikara of the Khalsa

Author: Sikh tradition (Khalsa)

Period: From the time of Guru Gobind Singh (late 17th century) onward

जयकारा — एक 'विजय की उद्घोषणा' — गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा स्थापित खालसा, समर्पितों की संगत, की प्रेरक पुकार बन गई। 'जो बोले सो निहाल' उन सभी को आशीर्वाद का वचन देता है जो परमात्मा का स्मरण करते हैं; 'सत श्री अकाल' उस कालातीत, अमर प्रभु को नमन करता है जिसमें सिख शरण लेता है। पूरी संगत द्वारा एक स्वर में उठाया जाकर यह भक्ति और चढ़दी कला की निर्भय भावना दोनों लिए होता है।

Frequently Asked Questions

'जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' का क्या अर्थ है?
'जो (प्रभु-नाम) बोलेगा वह निहाल और कृतार्थ हो जाएगा — सत्य है वह कालातीत, अमर प्रभु।' यह पुष्टि करता है कि परमात्मा का स्मरण आशीर्वाद लाता है, और अकाल पुरख — समय से परे अमर प्रभु — को नमन करता है।
सिख जयकारा कब उठाया जाता है?
यह अरदास (सिख प्रार्थना) के अंत में, संगत में, विवाह व उत्सवों में, नगर-कीर्तन में, तथा कठिनाई के क्षणों में चढ़दी कला — सदा उठती, निर्भय भावना — को जगाने के लिए उठाया जाता है। यह सदा एक जन और संगत के बीच पुकार-उत्तर के रूप में होता है।
अभिवादन के रूप में 'सत श्री अकाल' का क्या अर्थ है?
सिख 'सत श्री अकाल' को नित्य अभिवादन के रूप में भी प्रयोग करते हैं। इसका अर्थ है 'सत्य है वह कालातीत प्रभु' (सत = सत्य/शाश्वत, श्री = आदरणीय/महान, अकाल = कालातीत, अमर) — हर भेंट में शाश्वत प्रभु का स्मरण।

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