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जो बोले सो निहाल — सत श्री अकाल

🕉️ sikh·📿 1× जप·🕐 अरदास के समापन पर, संगत में, विवाह व समारोहों में, और जब भी साहस और उत्साह की आवश्यकता हो·📜 Sikh tradition — the jaikara of the Khalsa

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अर्थ

'जो बोले सो निहाल — सत श्री अकाल' सिखों का जयकारा है — संगत द्वारा एक स्वर में उठाई जाने वाली आनंद व विजय की उद्घोषणा। इसका अर्थ है — जो (प्रभु-नाम) बोलेगा वह निहाल हो जाएगा, और सत्य है वह कालातीत, अकाल प्रभु। एक जन 'जो बोले सो निहाल' पुकारता है और सब उत्तर देते हैं 'सत श्री अकाल'।

उत्पत्ति और कथा

Sikh tradition — the jaikara of the Khalsa · Sikh tradition (Khalsa) · From the time of Guru Gobind Singh (late 17th century) onward

जयकारा — एक 'विजय की उद्घोषणा' — गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा स्थापित खालसा, समर्पितों की संगत, की प्रेरक पुकार बन गई। 'जो बोले सो निहाल' उन सभी को आशीर्वाद का वचन देता है जो परमात्मा का स्मरण करते हैं; 'सत श्री अकाल' उस कालातीत, अमर प्रभु को नमन करता है जिसमें सिख शरण लेता है। पूरी संगत द्वारा एक स्वर में उठाया जाकर यह भक्ति और चढ़दी कला की निर्भय भावना दोनों लिए होता है।

शास्त्रों में वर्णित

जयकारा इसके लिए प्रसिद्ध है कि यह किसी समूह को कैसे बदल देता है: 'जो बोले सो निहाल' की एक पुकार थके या भयभीत जनसमूह को 'सत श्री अकाल' का उत्तर देती एक दृढ़ आवाज़ में बदल सकती है। सिख इतिहास बताता है कि इसे रणक्षेत्रों और परीक्षाओं में उठाया गया, जिसने हृदयों को चढ़दी कला — वह अदम्य, उठती भावना जिसे कोई कठिनाई कुचल नहीं सकती — में उठाया।

मंत्र

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जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल

Jo Bole So Nihal — Sat Sri Akal

अर्थ:'जो (प्रभु-नाम) बोले, वह निहाल हो जाएगा — सत्य है वह महान कालातीत (अकाल) प्रभु!' यह सिखों का जयकारा है — संगत द्वारा उठाई जाने वाली आनंद व विजय की उद्घोषणा। एक जन 'जो बोले सो निहाल' पुकारता है और सब उत्तर देते हैं 'सत श्री अकाल'।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

जो बोले🔊Jo Boleजो (प्रभु का नाम) बोलता है
सो निहाल🔊So Nihalवह निहाल, कृतार्थ, आनंदित हो जाएगा
सत श्री अकाल🔊Sat Sri Akalसत्य है वह महान कालातीत — शाश्वत, अमर प्रभु (अकाल)

जो बोले सो निहाल — सत श्री अकाल पाठ के लाभ

सिखों का जयकारा (विजय की उद्घोषणा) — गुरुद्वारे में और हर आनंदमय अवसर पर उठाया जाता है

एक पुकार-उत्तर जो पूरी संगत को श्रद्धा और साहस की एक आवाज़ में जोड़ देता है

अकाल — कालातीत, अमर प्रभु — की पुष्टि करता है, जो जन्म-मृत्यु से परे है

विवाह, अरदास, नगर-कीर्तन और कठिनाई के समय चढ़दी कला के लिए उठाया जाता है

तीन छोटे वाक्य जिनमें कोई भी सुनते ही सम्मिलित हो सकता है

जो बोले सो निहाल — सत श्री अकाल जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयअरदास के समापन पर, संगत में, विवाह व समारोहों में, और जब भी साहस और उत्साह की आवश्यकता हो

इसे पुकार-उत्तर के रूप में उठाएँ: एक स्वर पुकारता है 'जो बोले सो निहाल!' और सब पूरे जोश से उत्तर देते हैं 'सत श्री अकाल!' इसे आनंद और दृढ़ संकल्प के साथ उच्चारित किया जाता है — अरदास के अंत में, उत्सव के क्षणों में, और कठिन समय में भावना (चढ़दी कला) को ऊँचा उठाने के लिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'जो (प्रभु-नाम) बोलेगा वह निहाल और कृतार्थ हो जाएगा — सत्य है वह कालातीत, अमर प्रभु।' यह पुष्टि करता है कि परमात्मा का स्मरण आशीर्वाद लाता है, और अकाल पुरख — समय से परे अमर प्रभु — को नमन करता है।
यह अरदास (सिख प्रार्थना) के अंत में, संगत में, विवाह व उत्सवों में, नगर-कीर्तन में, तथा कठिनाई के क्षणों में चढ़दी कला — सदा उठती, निर्भय भावना — को जगाने के लिए उठाया जाता है। यह सदा एक जन और संगत के बीच पुकार-उत्तर के रूप में होता है।
सिख 'सत श्री अकाल' को नित्य अभिवादन के रूप में भी प्रयोग करते हैं। इसका अर्थ है 'सत्य है वह कालातीत प्रभु' (सत = सत्य/शाश्वत, श्री = आदरणीय/महान, अकाल = कालातीत, अमर) — हर भेंट में शाश्वत प्रभु का स्मरण।

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