कालिका अष्टकम् — Word-by-Word Meaning
कालिका अष्टकम्
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
आदि शंकराचार्य रचित देवी कालिका (काली) की आठ श्लोकों की स्तुति — जो उनके उग्र, श्याम, मुक्तिदायी स्वरूप के ध्यान से आरंभ होती है: मुण्डमालाधारिणी, काल को ग्रसने वाली व अभय देने वाली माता।
Origin & History
Source: Ascribed to Adi Shankaracharya
Author: Adi Shankaracharya
Period: Classical
कालिका अष्टकम् परंपरा से आदि शंकराचार्य को आरोपित है। आदि शंकराचार्य द्वारा देवी कालिका (काली) की आठ श्लोकों की यह स्तुति उनके उग्र, श्याम, मुक्तिदायी स्वरूप के ध्यान से आरंभ होती है — मुण्डमालाधारिणी, काल को ग्रसने वाली व अभय देने वाली माता।
Frequently Asked Questions
कालिका अष्टकम् क्या है?▼
आदि शंकराचार्य द्वारा देवी कालिका (काली) की आठ श्लोकों की स्तुति — जो उनके उग्र, श्याम, मुक्तिदायी स्वरूप के ध्यान से आरंभ होती है: मुण्डमालाधारिणी, काल को ग्रसने वाली व अभय देने वाली माता।
कालिका अष्टकम् की रचना किसने की, और इसे कब पढ़ा जाता है?▼
इसका श्रेय आदि शंकराचार्य को दिया जाता है। इसे प्रातः या सायं भक्तिपूर्वक पढ़ा जाता है, और विशेषकर शुक्रवार को तथा नवरात्रि में।
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