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केतु मंत्र — Word-by-Word Meaning

केतु मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
आदि-ध्वनि
कें केतवे
Kem Ketave
केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) का नाम/बीज
नमः
Namah
नमस्कार / मैं नमन करता हूँ

Complete Translation

ॐ। केतु को नमस्कार — इसकी कृपा बढ़ाने तथा अशुभ प्रभाव शांत करने हेतु।

Origin & History

Source: The Vedic Navagraha mantra of Ketu (the south lunar node)

Author: Traditional (Vedic Jyotish)

वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रह जीवन की दिशा को आकार देते हैं, और प्रत्येक का आशीर्वाद व उपाय हेतु अपना मंत्र है। "ॐ कें केतवे नमः" केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) का मंत्र है, जो अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, गुप्त ज्ञान — तथा केतु एवं कालसर्प दोष का कारक है। जब ग्रह कुंडली में कमजोर या अशुभ हो, तब ऋषियों ने इसके मंत्र के जप का विधान किया — दान, इसके दिन (शनिवार और मंगलवार) व्रत, इसके देवता की उपासना और इसके रत्न (लहसुनिया/वैडूर्य) के साथ — ताकि इसकी कृपा बढ़े और कठिनाइयाँ शांत हों।

Frequently Asked Questions

केतु मंत्र क्या है?
यह केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) का वैदिक मंत्र है — "ॐ कें केतवे नमः"। इसे जन्मकुंडली में केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) को बलवान बनाने और ग्रह के कमजोर या अशुभ होने पर उत्पन्न कठिनाइयों को कम करने हेतु जपा जाता है।
केतु मंत्र के क्या लाभ हैं?
केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, गुप्त ज्ञान — तथा केतु एवं कालसर्प दोष का कारक है। इसके मंत्र का जप इन क्षेत्रों को आशीर्वाद देने, ग्रह की कठिन अवधियों (दशा और गोचर) को सरल करने, और मन की शांति व रक्षा लाने का एक प्रसिद्ध ज्योतिषीय उपाय है।
केतु मंत्र किस दिन जपना चाहिए?
यह शनिवार और मंगलवार को सर्वाधिक शक्तिशाली है। इसे माला पर प्रतिदिन 108 बार जपें; पूर्ण उपाय के रूप में इसे परंपरागत रूप से एक निश्चित अवधि में 7,000 जप के रूप में किया जाता है।
केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) से कौन-सा रत्न संबंधित है?
केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) का रत्न लहसुनिया (वैडूर्य) है। इसे (सही धातु और अंगुली में जड़वाकर) केवल किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श के पश्चात, मंत्र और ग्रह की वस्तुओं के दान के साथ धारण किया जाता है।
केतु मंत्र को ज्योतिषीय उपाय के रूप में कैसे प्रयोग किया जाता है?
जब केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) कमजोर, पीड़ित, या प्रतिकूल दशा/गोचर में हो, तब मंत्र जपा जाता है (प्रतिदिन 108 बार, अथवा पूर्ण 7,000 जप), जिसके साथ ग्रह की वस्तुओं का दान, इसके दिन व्रत या उपासना, और — ज्योतिषीय मार्गदर्शन सहित — इसका रत्न जोड़ा जाता है। समग्र ग्रह संतुलन हेतु इसे नवग्रह मंत्र के साथ जपें।

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