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केतु मंत्र

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 शनिवार और मंगलवार को, प्रातःकाल·📜 The Vedic Navagraha mantra of Ketu (the south lunar node)

अन्य नाम / खोज: om kem ketave namah

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अर्थ

केतु मंत्र ("ॐ कें केतवे नमः") नवग्रह में केतु का वैदिक मंत्र है, जिसे कुंडली में इस ग्रह को बलवान बनाने और इसके अशुभ प्रभावों को शांत करने हेतु जपा जाता है। केतु अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष और गुप्त ज्ञान का कारक है। इसे ज्योतिषीय उपाय रूप में, विशेषकर शनिवार और मंगलवार को जपा जाता है।

उत्पत्ति और कथा

The Vedic Navagraha mantra of Ketu (the south lunar node) · Traditional (Vedic Jyotish)

वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रह जीवन की दिशा को आकार देते हैं, और प्रत्येक का आशीर्वाद व उपाय हेतु अपना मंत्र है। "ॐ कें केतवे नमः" केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) का मंत्र है, जो अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, गुप्त ज्ञान — तथा केतु एवं कालसर्प दोष का कारक है। जब ग्रह कुंडली में कमजोर या अशुभ हो, तब ऋषियों ने इसके मंत्र के जप का विधान किया — दान, इसके दिन (शनिवार और मंगलवार) व्रत, इसके देवता की उपासना और इसके रत्न (लहसुनिया/वैडूर्य) के साथ — ताकि इसकी कृपा बढ़े और कठिनाइयाँ शांत हों।

मंत्र

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कें केतवे नमः

Om Kem Ketave Namah.

अर्थ:ॐ। केतु को नमस्कार — इसकी कृपा बढ़ाने तथा अशुभ प्रभाव शांत करने हेतु।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

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🔊Omआदि-ध्वनि
कें केतवे🔊Kem Ketaveकेतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) का नाम/बीज
नमः🔊Namahनमस्कार / मैं नमन करता हूँ

केतु मंत्र पाठ के लाभ

केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) का वैदिक मंत्र, जिसे कुंडली में ग्रह को बलवान बनाने और इसके अशुभ प्रभावों को शांत करने हेतु जपा जाता है

केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) की कठिन अवधियों (महादशा, अंतर्दशा या गोचर) का सामना कर रहे लोगों द्वारा ज्योतिषीय उपाय के रूप में जपा जाता है

केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, गुप्त ज्ञान — तथा केतु एवं कालसर्प दोष का कारक है; जीवन के इन क्षेत्रों को आशीर्वाद व रक्षा देने हेतु यह मंत्र जपा जाता है

शनिवार और मंगलवार को, ग्रह के दिन, सर्वाधिक शक्तिशाली; परंपरागत रूप से 7,000 जप के पूर्ण अनुष्ठान रूप में, अथवा प्रतिदिन 108 बार पूर्ण किया जाता है

प्रायः ग्रह के रत्न — लहसुनिया (वैडूर्य) — को ज्योतिषीय परामर्श के पश्चात धारण करने, ग्रह की वस्तुओं के दान, और इसके अधिष्ठाता देवता की उपासना के साथ संयुक्त किया जाता है

ग्रहों की परेशानियों के समय मन की शांति और स्थिरता लाता है; सभी नौ ग्रहों के संतुलन हेतु नवग्रह मंत्र के साथ जपा जाता है

केतु मंत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयशनिवार और मंगलवार को, प्रातःकाल

स्नान के पश्चात प्रातःकाल पूर्व की ओर मुख कर "ॐ कें केतवे नमः" माला पर 108 बार जपें, आदर्श रूप से शनिवार और मंगलवार को। कमजोर या पीड़ित केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) के पूर्ण उपाय के रूप में, मंत्र को परंपरागत रूप से एक निश्चित अवधि में 7,000 जप के रूप में पूर्ण किया जाता है, साथ ही ग्रह से संबंधित दान, और ज्योतिषी से परामर्श के पश्चात इसके रत्न (लहसुनिया/वैडूर्य) के धारण के साथ। श्रद्धा और शांत, सात्विक अनुशासन के साथ जप करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) का वैदिक मंत्र है — "ॐ कें केतवे नमः"। इसे जन्मकुंडली में केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) को बलवान बनाने और ग्रह के कमजोर या अशुभ होने पर उत्पन्न कठिनाइयों को कम करने हेतु जपा जाता है।
केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, गुप्त ज्ञान — तथा केतु एवं कालसर्प दोष का कारक है। इसके मंत्र का जप इन क्षेत्रों को आशीर्वाद देने, ग्रह की कठिन अवधियों (दशा और गोचर) को सरल करने, और मन की शांति व रक्षा लाने का एक प्रसिद्ध ज्योतिषीय उपाय है।
यह शनिवार और मंगलवार को सर्वाधिक शक्तिशाली है। इसे माला पर प्रतिदिन 108 बार जपें; पूर्ण उपाय के रूप में इसे परंपरागत रूप से एक निश्चित अवधि में 7,000 जप के रूप में किया जाता है।
केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) का रत्न लहसुनिया (वैडूर्य) है। इसे (सही धातु और अंगुली में जड़वाकर) केवल किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श के पश्चात, मंत्र और ग्रह की वस्तुओं के दान के साथ धारण किया जाता है।
जब केतु (दक्षिण चंद्र-बिंदु) कमजोर, पीड़ित, या प्रतिकूल दशा/गोचर में हो, तब मंत्र जपा जाता है (प्रतिदिन 108 बार, अथवा पूर्ण 7,000 जप), जिसके साथ ग्रह की वस्तुओं का दान, इसके दिन व्रत या उपासना, और — ज्योतिषीय मार्गदर्शन सहित — इसका रत्न जोड़ा जाता है। समग्र ग्रह संतुलन हेतु इसे नवग्रह मंत्र के साथ जपें।

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