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लक्ष्मी गायत्री मंत्र — Word-by-Word Meaning

लक्ष्मी गायत्री मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
आदिनाद, प्रणव
विद्महे
Vidmahe
हम जानें / हम जानना चाहते हैं — महालक्ष्मी (सौभाग्य की महान देवी)
धीमहि
Dhimahi
हम ध्यान करें — विष्णु की पत्नी (विष्णुपत्नी)
तन्नः … प्रचोदयात्
Tannah … Prachodayat
वह लक्ष्मी हमारी बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करें

Complete Translation

ॐ। हम Goddess Lakshmi को जानें, उनका ध्यान करें; वे Goddess Lakshmi हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।

Origin & History

Source: The Gayatri mantra of Goddess Lakshmi

Author: Traditional (Vedic)

सार्वभौमिक गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परंपरा प्रत्येक महान देवता को उनकी अपनी गायत्री प्रदान करती है — पवित्र गायत्री छंद में एक प्रार्थना जो उस देवता से बुद्धि को प्रकाशित करने का आह्वान करती है। लक्ष्मी गायत्री मंत्र धन, समृद्धि, ऐश्वर्य और मंगल की दात्री देवी लक्ष्मी का आह्वान, सनातन रीति "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" में करता है — "हम जानें, हम ध्यान करें, वह देवी हमारे मन को प्रेरित करें"। संध्या समयों पर जपा जाने वाला यह एक पूर्ण और सौम्य दैनिक साधना है।

Frequently Asked Questions

लक्ष्मी गायत्री मंत्र क्या है?
यह देवी लक्ष्मी का गायत्री मंत्र है: "ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्"। पवित्र गायत्री छंद में रचित यह "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" की रीति में देवी लक्ष्मी से बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करने की प्रार्थना करता है।
लक्ष्मी गायत्री मंत्र के क्या लाभ हैं?
यह धन, समृद्धि, ऐश्वर्य और मंगल के लिए तथा मन की स्पष्टता और ज्ञान को जाग्रत करने के लिए जपा जाता है। गायत्री मंत्र होने के कारण इसे विशेष रूप से शुद्ध करने वाला और स्थिर करने वाला माना जाता है, जो देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद दैनिक जीवन में लाता है।
इसे कब और कितनी बार जपना चाहिए?
इसे माला पर 108 बार जपें, आदर्श रूप से प्रातः और अन्य संध्या समयों पर, पूर्व की ओर मुख करके। शुक्रवार इसका विशेष दिन है। इसे दैनिक गायत्री साधना का अंग बनाया जा सकता है।
"विद्महे धीमहि प्रचोदयात्" का क्या अर्थ है?
प्रत्येक गायत्री इसी रीति का अनुसरण करती है: "विद्महे" — हम जानें; "धीमहि" — हम ध्यान करें; "प्रचोदयात्" — वह देवता हमारी बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करें। इस प्रकार यह मंत्र देवता से हमारे भीतर ज्ञान जाग्रत करने की प्रार्थना है।
क्या कोई भी लक्ष्मी गायत्री मंत्र जप सकता है?
हाँ — देवता के गायत्री मंत्र कोई भी भक्तिपूर्वक जप सकता है। इन्हें स्नान के पश्चात प्रातः, स्वच्छ मन से, आदर्श रूप से शुक्रवार को जपा जाता है, और ये एक सौम्य, पूर्ण दैनिक अभ्यास हैं।

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