लक्ष्मी गायत्री मंत्र
अन्य नाम / खोज: om mahalakshmyai cha vidmahe vishnu patnyai cha dhimahi
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✦ अर्थ
लक्ष्मी गायत्री मंत्र देवी लक्ष्मी का गायत्री मंत्र है, जो पवित्र गायत्री छंद के माध्यम से उनकी कृपा का आह्वान करता है। यह धन, समृद्धि, ऐश्वर्य और मंगल के लिए तथा बुद्धि को जाग्रत व प्रकाशित करने के लिए जपा जाता है। यह एक पूर्ण दैनिक वैदिक मंत्र है जो ध्यान, जप और पूजा के आरंभ के लिए उपयुक्त है।
उत्पत्ति और कथा
The Gayatri mantra of Goddess Lakshmi · Traditional (Vedic)
सार्वभौमिक गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परंपरा प्रत्येक महान देवता को उनकी अपनी गायत्री प्रदान करती है — पवित्र गायत्री छंद में एक प्रार्थना जो उस देवता से बुद्धि को प्रकाशित करने का आह्वान करती है। लक्ष्मी गायत्री मंत्र धन, समृद्धि, ऐश्वर्य और मंगल की दात्री देवी लक्ष्मी का आह्वान, सनातन रीति "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" में करता है — "हम जानें, हम ध्यान करें, वह देवी हमारे मन को प्रेरित करें"। संध्या समयों पर जपा जाने वाला यह एक पूर्ण और सौम्य दैनिक साधना है।
मंत्र
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ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि । तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥
Om Mahalakshmyai cha Vidmahe Vishnu-patnyai cha Dhimahi. Tanno Lakshmih Prachodayat.
अर्थ:ॐ। हम Goddess Lakshmi को जानें, उनका ध्यान करें; वे Goddess Lakshmi हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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लक्ष्मी गायत्री मंत्र पाठ के लाभ
देवी लक्ष्मी का गायत्री मंत्र — पवित्र गायत्री छंद, जो वैदिक छंदों में सर्वाधिक शक्तिशाली है, के माध्यम से देवी लक्ष्मी की कृपा का आह्वान करता है।
धन, समृद्धि, ऐश्वर्य और मंगल के लिए तथा बुद्धि को जाग्रत व प्रकाशित करने (प्रत्येक गायत्री का हृदय) के लिए जपा जाता है।
देवी लक्ष्मी का एक पूर्ण, दैनिक वैदिक मंत्र, जो ध्यान, जप और पूजा के आरंभ के लिए उपयुक्त है।
शुक्रवार को, तीनों संध्या समयों (प्रातः, मध्याह्न, सायं) पर, पूर्व की ओर मुख करके सर्वाधिक प्रभावशाली।
शांत और एकाग्र मन से माला पर 108 बार जपा जाता है; कहा जाता है कि यह स्पष्टता, शांति और देवी लक्ष्मी का स्थिर आशीर्वाद लाता है।
प्रायः दैनिक साधना के अंग के रूप में महान गायत्री मंत्र ("ॐ भूर्भुवः स्वः…") के साथ जपा जाता है।
लक्ष्मी गायत्री मंत्र जप विधि
स्नान के पश्चात, प्रातःकाल पूर्व की ओर मुख करके शांत मन से बैठें और "ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्" माला पर 108 बार जपें। सभी गायत्री मंत्रों की भाँति इसे आदर्श रूप से संध्या समयों (प्रातः, मध्याह्न, सायं) पर जपा जाता है। देवी लक्ष्मी को हृदय में धारण करें और मंत्र को मन को स्थिर करने दें। इसे सार्वभौमिक गायत्री मंत्र के साथ एक पूर्ण साधना के रूप में प्रतिदिन जपा जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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