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लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु Meaning — Line by Line

लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Verse 1#

Om Lokah Samastah Sukhino Bhavantu

लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु। लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु। लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु॥

Om Lokah Samastah Sukhino Bhavantu Lokah Samastah Sukhino Bhavantu Lokah Samastah Sukhino Bhavantu

Meaningसमस्त लोकों के सभी प्राणी सुखी हों। ॐ शान्ति, शान्ति, शान्ति।

Verse 2#

Om Shanti Shanti Shanti

शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

Om Shanti Shanti Shanti

Meaningयह सार्वभौमिक मंगलकामना की प्रार्थना है — केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सर्वत्र हर जीव के सुख और मुक्ति के लिए।

Word-by-Word Breakdown

लोकाः
Lokah
लोकाः — सभी लोक, समस्त भुवन और उनमें निवास करने वाले सब प्राणी
समस्ताः
Samastah
समस्ताः — सब, सम्पूर्ण रूप से, बिना किसी अपवाद के
सुखिनः
Sukhinah
सुखिनः — सुखी, संतुष्ट, स्वस्थ
भवन्तु
Bhavantu
भवन्तु — वे हो जाएँ / वे रहें
शान्तिः
Shanti
शान्तिः — शान्ति — तीन बार उच्चारित, शरीर, मन और आत्मा के लिए

Origin & History

Source: Traditional Sanskrit prayer of universal goodwill (loka-kshema), echoing Vedic and Puranic well-wishing

Author: Ancient tradition

Period: Ancient

यह आशीर्वचन हिन्दू आदर्श 'वसुधैव कुटुम्बकम्' — सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है — को एक ही पंक्ति में सार रूप में व्यक्त करता है। व्यक्तिगत लाभ माँगने के बजाय प्रार्थी प्रत्येक लोक के हर प्राणी के सुख और मुक्ति की कामना करता है। वैश्विक योग आंदोलन द्वारा भारत से बहुत दूर तक पहुँचकर यह पृथ्वी पर सर्वाधिक जपी जाने वाली संस्कृत प्रार्थनाओं में से एक बन गई है।

Frequently Asked Questions

लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु का क्या अर्थ है?
'सर्वत्र समस्त प्राणी सुखी और मुक्त हों।' यह सार्वभौमिक कल्याण की प्रार्थना है जिसमें आप केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के सुख और मुक्ति की कामना करते हैं।
इसका जप कब किया जाता है?
इसका जप प्रायः योग कक्षाओं और ध्यान के अंत में किया जाता है, जिससे साधना सभी प्राणियों के कल्याण को समर्पित होती है। इसे किसी भी समय एक सरल आशीर्वाद के रूप में भी कहा जा सकता है।
इसे कितनी बार दोहराना चाहिए?
परंपरागत रूप से तीन बार, उसके पश्चात 'ॐ शान्ति शान्ति शान्ति'। तीन बार की पुनरावृत्ति शरीर, मन और आत्मा में संकल्प को सुदृढ़ करती है।

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