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मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो Meaning — Line by Line

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Verse 1#

Maiya mori main nahin makhan khayo

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो। ख्याल परै ये सखा सबै मिलि, मेरैं मुख लपटायो॥

Maiya mori main nahin makhan khayo Khyal parai ye sakha sabai mili, merain mukh lapatayo

Meaningमैया मेरी, मैंने माखन नहीं खाया! इन सखाओं ने मिलकर मेरे मुँह पर लपेट दिया।

Verse 2#

Dekhi tuhi chheenke par bhajan, oonche dhari latkayo

देखि तुही छींके पर भाजन, ऊँचे धरि लटकायो। हौं जु कहत नान्हें कर अपने, मैं कैसें करि पायो॥

Dekhi tuhi chheenke par bhajan, oonche dhari latkayo Haun ju kahat naanhe kar apne, main kaisen kari payo

Meaningतू ही देख — छींके पर बर्तन तो ऊँचे लटका हुआ था; और मेरे ये नन्हे हाथ — मैं भला कैसे पा सकता था?

Verse 3#

Mukh dadhi lepan kar puni goras, daari sabani ke aage

मुख दधि लेपन कर पुनि गोरस, डारि सबनि के आगे। लकुटी कांधे गोधन गैयाँ, चलत भयो पग लागे॥

Mukh dadhi lepan kar puni goras, daari sabani ke aage Lakuti kaandhe godhan gaiyan, chalat bhayo pag laage

Meaning(फिर भी) मुख पर दही लपेटे, सबके आगे गोरस ढुलकाकर, कंधे पर लकुटी रखे गायों के संग चल पड़े, नन्हे पग लड़खड़ाते हुए।

Verse 4#

Surdas tab bihansi Jasoda, lai ur kanth lagayo

सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥

Surdas tab bihansi Jasoda, lai ur kanth lagayo

Meaningसूरदास कहते हैं: तब यशोदा हँसकर बालकृष्ण को हृदय से लगा लेती हैं।

Word-by-Word Breakdown

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो
Maiya mori main nahin makhan khayo
मैया, मैंने माखन नहीं खाया!
ये सखा सबै मिलि मेरैं मुख लपटायो
ye sakha sabai mili merain mukh lapatayo
इन सखाओं ने मिलकर मेरे मुँह पर लपेट दिया
छींके पर भाजन ऊँचे धरि लटकायो
chheenke par bhajan oonche dhari latkayo
छींके पर बर्तन तो ऊँचे लटका हुआ था
हौं जु कहत नान्हें कर अपने
haun ju kahat naanhe kar apne
और देख, मेरे ये नन्हे हाथ —
मैं कैसें करि पायो
main kaisen kari payo
मैं भला कैसे पा सकता था?
सूरदास तब बिहँसि जसोदा
Surdas tab bihansi Jasoda
सूरदास कहते हैं: तब यशोदा हँसकर,
लै उर कंठ लगायो
lai ur kanth lagayo
उसे हृदय से लगाकर गले लगा लिया

Origin & History

Source: Composed by Surdas (Sur Sagar; 16th-century Braj bhakti tradition)

Author: Surdas

Period: 16th century

ब्रज के नेत्रहीन गायक सूरदास ने कृष्ण के बचपन पर हज़ारों पद गाए। इस सबसे प्रसिद्ध पद में नन्हा कृष्ण, होठों पर माखन लगे हुए, यशोदा के सामने ऐसी अप्रतिरोध्य तर्क-बुद्धि से अपनी निर्दोषता का दावा करता है कि वह केवल मुस्कुराकर उसे गले लगा लेती हैं। यह सभी माखन-चोरी गीतों में सबसे प्रिय है, वात्सल्य भक्ति का सच्चा हृदय माना जाता है।

Frequently Asked Questions

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो किसने लिखा?
सोलहवीं शताब्दी के नेत्रहीन संत-कवि सूरदास ने, जो कृष्ण की बाल-लीलाओं के सबसे महान कवि थे और जिनके पद सूरसागर में संगृहीत हैं।
यह भजन किस विषय में है?
माखन के साथ पकड़ा गया बालकृष्ण माता यशोदा से निर्दोष भाव से कहता है कि उसने माखन नहीं खाया — सखाओं ने उसके मुख पर लपेट दिया, और वैसे भी बर्तन तो इतना ऊँचा लटका था कि उसके नन्हे हाथ वहाँ पहुँच ही नहीं सकते थे। यह उसकी माखन-चोरी लीला का एक प्रसिद्ध दृश्य है।
वात्सल्य भक्ति क्या है?
ईश्वर को संतान के प्रति माता-पिता के भाव से प्रेम करना। सूरदास के इस जैसे बाल-लीला पद वात्सल्य भक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति हैं, जिनमें शरारती, अप्रतिरोध्य बालकृष्ण के रूप में दिव्यता की आराधना की जाती है।

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