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मीनाक्षी स्तोत्रम्

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः या संध्या; विशेषकर शुक्रवार को·📜 Traditional

अन्य नाम / खोज: gaurim kancanapadminitatagriham shrisundareshapriyam · meenakshi stotram lyrics · meenakshi stotra

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अर्थ

मीनाक्षी स्तोत्रम् देवी मीनाक्षी — मदुरै की मीन-नयना देवी और सुन्दरेश्वर की प्रिया — की स्तुति है। यह उनके स्वर्णिम, कमल-नयन सौंदर्य व दक्षिण की महान माता की कृपा को वंदन करती है। इसका भक्ति-भाव से पाठ करने से मन शांत और हृदय स्थिर होता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional · Traditional · Classical

मीनाक्षी स्तोत्रम् एक प्रिय परम्परागत स्तोत्र है। यह देवी मीनाक्षी — मदुरै की मीन-नयना देवी, सुन्दरेश्वर की प्रिया — की स्तुति है, जो उनके स्वर्णिम, कमल-नयन सौंदर्य व दक्षिण की महान माता की कृपा को वंदन करती है।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि मीनाक्षी स्तोत्रम् का सच्चे और भक्तिपूर्ण हृदय से पाठ करना भगवती की कृपा के निकट जाना है, जो प्रेमपूर्वक उन्हें पुकारने वालों को कभी नहीं त्यागतीं।

मंत्र

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गौरीं काञ्चनपद्मिनीतटगृहां श्रीसुन्दरेशप्रियां नीपारण्यसुवर्णकन्दुकपरिक्रीडाविलोलामिमाम् श्रीमत्पाण्ड्यकुलाचलाग्रविलसद्रत्नप्रदीपायितां मीनाक्षीं मधुरेश्वरीं शुकधरां श्रीपाण्ड्यबालां भजे १॥ गौरीं वेदकदम्बकाननशुकीं शास्त्राटवीकेकिनीं वेदान्ताखिलधर्महेमनलिनीहंसीं शिवां शाम्भवीम् ओङ्कारम्बुजनीलमत्तमधुपां मन्त्राम्रशाखाम्बिकां मीनाक्षीं मधुरेश्वरीं शुकधरां श्रीपाण्ड्यबालां भजे २॥ गौरीं नूपुरशोभिताङ्घ्रिकमलां तूणोल्लसज्जङ्घिकां रत्नादर्शसमानजानुयुगलां रम्भानिभोरूद्वयाम् काञ्चीबद्धमनोज्ञपीनजघनामावर्तनाभीहृदां मीनाक्षीं मधुरेश्वरीं शुकधरां श्रीपाण्ड्यबालां भजे ३॥ गौरीं व्योमसमानमध्यमयुतामुत्तुङ्गवक्षोरुहां वीणामञ्जुलशारीकान्वितकरां शङ्खाभकण्ठोज्ज्वलाम् राकाचन्द्रसमानचारुवदनां रोलम्वनीलालकां मीनाक्षीं मधुरेश्वरीं शुकधरां श्रीपाण्ड्यबालां भजे ४॥ गौरीं मञ्जुलमीननेत्रयुगलां कोदण्डसुभ्रूलतां बिम्बोष्ठीं स्मितकुन्ददन्तरुचिरां चाम्पेयनासोज्ज्वलाम् अर्धेन्दुप्रतिबिम्बफालरुचिरामादर्शगण्डस्थलां मीनाक्षीं मधुरेश्वरीं शुकधरां श्रीपाण्ड्यबालां भजे ५॥ गौरीं कुङ्कुमपङ्कलेपितलसद्वक्षोजकुम्भोज्ज्वलां कस्तूरीतिलकालकां मलयजां गन्धोलसत्कन्धराम् लाक्षाकर्दमशोभिपादयुगलां सिन्दूरसीमन्तिनीं मीनाक्षीं मधुरेश्वरीं शुकधरां श्रीपाण्ड्यबालां भजे ६॥ गौरीं चम्पकमल्लिकासुकुसुमैः पुन्नागसौगन्धिका- द्रोणेन्दीवरकुन्दजातिवकुलैराबद्धचूलीयुताम् मन्दारारुणपद्मकेतकदलश्रेणीलसद्वेणिकां मीनाक्षीं मधुरेश्वरीं शुकधरां श्रीपाण्ड्यबालां भजे ७॥ इति श्रीमीनाक्षीस्तोत्रं सम्पूर्णम्

gaurīṃ kāñcanapadminītaṭagṛhāṃ śrīsundareśapriyāṃ nīpāraṇyasuvarṇakandukaparikrīḍāvilolāmimām | śrīmatpāṇḍyakulācalāgravilasadratnapradīpāyitāṃ mīnākṣīṃ madhureśvarīṃ śukadharāṃ śrīpāṇḍyabālāṃ bhaje || 1|| gaurīṃ vedakadambakānanaśukīṃ śāstrāṭavīkekinīṃ vedāntākhiladharmahemanalinīhaṃsīṃ śivāṃ śāmbhavīm | oṅkārambujanīlamattamadhupāṃ mantrāmraśākhāmbikāṃ mīnākṣīṃ madhureśvarīṃ śukadharāṃ śrīpāṇḍyabālāṃ bhaje || 2|| gaurīṃ nūpuraśobhitāṅghrikamalāṃ tūṇollasajjaṅghikāṃ ratnādarśasamānajānuyugalāṃ rambhānibhorūdvayām | kāñcībaddhamanojñapīnajaghanāmāvartanābhīhṛdāṃ mīnākṣīṃ madhureśvarīṃ śukadharāṃ śrīpāṇḍyabālāṃ bhaje || 3|| gaurīṃ vyomasamānamadhyamayutāmuttuṅgavakṣoruhāṃ vīṇāmañjulaśārīkānvitakarāṃ śaṅkhābhakaṇṭhojjvalām | rākācandrasamānacāruvadanāṃ rolamvanīlālakāṃ mīnākṣīṃ madhureśvarīṃ śukadharāṃ śrīpāṇḍyabālāṃ bhaje || 4|| gaurīṃ mañjulamīnanetrayugalāṃ kodaṇḍasubhrūlatāṃ bimboṣṭhīṃ smitakundadantarucirāṃ cāmpeyanāsojjvalām | ardhendupratibimbaphālarucirāmādarśagaṇḍasthalāṃ mīnākṣīṃ madhureśvarīṃ śukadharāṃ śrīpāṇḍyabālāṃ bhaje || 5|| gaurīṃ kuṅkumapaṅkalepitalasadvakṣojakumbhojjvalāṃ kastūrītilakālakāṃ malayajāṃ gandholasatkandharām | lākṣākardamaśobhipādayugalāṃ sindūrasīmantinīṃ mīnākṣīṃ madhureśvarīṃ śukadharāṃ śrīpāṇḍyabālāṃ bhaje || 6|| gaurīṃ campakamallikāsukusumaiḥ punnāgasaugandhikā- droṇendīvarakundajātivakulairābaddhacūlīyutām | mandārāruṇapadmaketakadalaśreṇīlasadveṇikāṃ mīnākṣīṃ madhureśvarīṃ śukadharāṃ śrīpāṇḍyabālāṃ bhaje || 7|| || iti śrīmīnākṣīstotraṃ sampūrṇam ||

अर्थ:देवी मीनाक्षी — मदुरै की मीन-नयना देवी, सुन्दरेश्वर की प्रिया — की स्तुति, जो उनके स्वर्णिम, कमल-नयन सौंदर्य व दक्षिण की महान माता की कृपा को वंदन करती है।

मीनाक्षी स्तोत्रम् पाठ के लाभ

मीनाक्षी स्तोत्रम् का पाठ भगवती की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।

यह भक्ति को बढ़ाता है, मन को शांत करता है और भगवती के स्मरण में हृदय को स्थिर करता है।

शुक्रवार को, तथा नवरात्रि के दौरान इसका पाठ सर्वाधिक शुभ होता है।

एक छोटी, मधुर स्तुति जिसे कोई भी सीख सकता है और श्रद्धा से प्रतिदिन पाठ कर सकता है।

मीनाक्षी स्तोत्रम् जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः या संध्या; विशेषकर शुक्रवार को
दिशाEast or North

स्नान करके देवी की प्रतिमा के सामने पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। दीप जलाएँ और मीनाक्षी स्तोत्रम् का धीरे-धीरे भक्ति-भाव से पाठ करें। इसे प्रतिदिन, अथवा विशेषकर नवरात्रि और शुक्रवार को पाठ किया जा सकता है। कृपा और रक्षा की प्रार्थना के साथ समापन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवी मीनाक्षी — मदुरै की मीन-नयना देवी, सुन्दरेश्वर की प्रिया — की स्तुति, जो उनके स्वर्णिम, कमल-नयन सौंदर्य व दक्षिण की महान माता की कृपा को वंदन करती है।
यह एक परम्परागत स्तोत्र है (परम्परागत)। इसका पाठ प्रातः या संध्या को भक्ति के साथ किया जाता है, और विशेषकर शुक्रवार को तथा नवरात्रि के दौरान।

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