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मेरे तो गिरधर गोपाल Meaning — Line by Line

मेरे तो गिरधर गोपाल

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of मेरे तो गिरधर गोपाल with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

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  1. Verse 1. Mere to Giridhar Gopal, doosro na koi
  2. Verse 2. Taat maat bhraat bandhu, aapno na koi
  3. Verse 3. Santan dhig baithi baithi, lok laaj khoi
  4. Verse 4. Aansun jal seenchi seenchi, prem beli boi
  5. Verse 5. Meera prabhu Girdhar Nagar, milya mohi soi
Verse 1#

Mere to Giridhar Gopal, doosro na koi

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो कोई। जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई॥

Mere to Giridhar Gopal, doosro na koi Jaake sir mor mukut, mero pati soi

Meaningमेरे तो बस गिरधर गोपाल हैं, दूसरा कोई नहीं। जिनके सिर पर मोर मुकुट है, वही मेरे पति हैं।

Verse 2#

Taat maat bhraat bandhu, aapno na koi

तात मात भ्रात बंधु, आपनो कोई। छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करिहै कोई॥

Taat maat bhraat bandhu, aapno na koi Chhaandi dayi kul ki kaani, kaha karihai koi

Meaningपिता, माता, भाई, बंधु — कोई अपना नहीं। मैंने कुल की मर्यादा का मोह छोड़ दिया; अब कोई क्या कर लेगा।

Verse 3#

Santan dhig baithi baithi, lok laaj khoi

संतन ढिग बैठि बैठि, लोक लाज खोई। चुनरी के किए टूक, ओढ़ लीन्ही लोई॥

Santan dhig baithi baithi, lok laaj khoi Chunari ke kiye took, odh leenhi loi

Meaningसंतों के पास बैठ-बैठकर मैंने लोक-लाज खो दी। चुनरी के टुकड़े कर दिए और मोटी लोई ओढ़ ली।

Verse 4#

Aansun jal seenchi seenchi, prem beli boi

आँसुन जल सींचि सींचि, प्रेम बेलि बोई। अब तो बेलि फैल गई, आणंद फल होई॥

Aansun jal seenchi seenchi, prem beli boi Ab to beli phail gayi, aanand phal hoi

Meaningआँसुओं के जल से सींच-सींचकर मैंने प्रेम की बेल बोई; अब वह बेल फैल गई है और आनंद का फल दे रही है।

Verse 5#

Meera prabhu Girdhar Nagar, milya mohi soi

मीरा प्रभु गिरधर नागर, मिल्या मोहि सोई॥

Meera prabhu Girdhar Nagar, milya mohi soi

Meaningमीरा के प्रभु गिरधर नागर हैं; वही मुझे मिल गए हैं।

Word-by-Word Breakdown

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
Mere to Giridhar Gopal, doosro na koi
गिरधर गोपाल (कृष्ण) ही मेरे हैं; दूसरा कोई नहीं
जाके सिर मोर मुकुट
Jaake sir mor mukut
जो मोर-पंख का मुकुट धारण करते हैं
मेरो पति सोई
mero pati soi
वही मेरे पति हैं
छाँड़ि दई कुल की कानि
chhaandi dayi kul ki kaani
मैंने कुल की मर्यादा का मोह त्याग दिया है
संतन ढिग बैठि बैठि, लोक लाज खोई
santan dhig baithi, lok laaj khoi
संतों के बीच बैठकर मैंने सारी लोक-लाज खो दी है
प्रेम बेलि बोई
prem beli boi
मैंने प्रेम की बेल बोई है
आणंद फल होई
aanand phal hoi
और अब वह आनंद का फल देती है

Origin & History

Source: Composed by Meera Bai (16th-century bhakti tradition)

Author: Meera Bai

Period: 16th century

राजपूत राजकुमारी के रूप में जन्मी मीरा बाई ने कृष्ण के प्रेम के लिए राजसी जीवन और रूढ़ियों को त्याग दिया, जिन्हें वे गिरधर गोपाल कहती थीं। इस पद में वे पारिवारिक बंधनों और लोक-निंदा के भय को त्यागकर संतों की संगति और संन्यासिनी का मोटा वस्त्र चुनती हैं। उनके आँसुओं से सींची गई 'प्रेम की बेल' हिंदी भक्ति-काव्य की सबसे प्रिय छवियों में से एक है।

Frequently Asked Questions

मेरे तो गिरधर गोपाल किसने लिखा?
मीरा बाई ने, जो सोलहवीं सदी की राजपूत संत-कवयित्री और कृष्ण की भक्त थीं। यह उनके सबसे प्रसिद्ध पदों में से एक है, जो भगवान के प्रति उनके अविभाजित प्रेम को व्यक्त करता है।
'गिरधर गोपाल' का क्या अर्थ है?
'गिरधर' का अर्थ है 'पर्वत को उठाने वाला' — कृष्ण, जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को उठाया; 'गोपाल' गोपों के स्वामी हैं। मीरा इन्हीं कृष्ण को अपना एकमात्र पति और आश्रय घोषित करती हैं।
यह भजन किस विषय पर है?
मीरा द्वारा कृष्ण के प्रेम के लिए परिवार, स्थिति और लोक-लाज का त्याग — और वह आनंद जो उनकी भक्ति, आँसुओं से सींची जाकर, अंततः फल के रूप में लाई।

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