Mantra.Tips

मेरे तो गिरधर गोपाल PDF

मेरे तो गिरधर गोपाल की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई। जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई॥

Mere to Giridhar Gopal, doosro na koi Jaake sir mor mukut, mero pati soi

मेरे तो बस गिरधर गोपाल हैं, दूसरा कोई नहीं। जिनके सिर पर मोर मुकुट है, वही मेरे पति हैं।

तात मात भ्रात बंधु, आपनो न कोई। छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करिहै कोई॥

Taat maat bhraat bandhu, aapno na koi Chhaandi dayi kul ki kaani, kaha karihai koi

पिता, माता, भाई, बंधु — कोई अपना नहीं। मैंने कुल की मर्यादा का मोह छोड़ दिया; अब कोई क्या कर लेगा।

संतन ढिग बैठि बैठि, लोक लाज खोई। चुनरी के किए टूक, ओढ़ लीन्ही लोई॥

Santan dhig baithi baithi, lok laaj khoi Chunari ke kiye took, odh leenhi loi

संतों के पास बैठ-बैठकर मैंने लोक-लाज खो दी। चुनरी के टुकड़े कर दिए और मोटी लोई ओढ़ ली।

आँसुन जल सींचि सींचि, प्रेम बेलि बोई। अब तो बेलि फैल गई, आणंद फल होई॥

Aansun jal seenchi seenchi, prem beli boi Ab to beli phail gayi, aanand phal hoi

आँसुओं के जल से सींच-सींचकर मैंने प्रेम की बेल बोई; अब वह बेल फैल गई है और आनंद का फल दे रही है।

मीरा प्रभु गिरधर नागर, मिल्या मोहि सोई॥

Meera prabhu Girdhar Nagar, milya mohi soi

मीरा के प्रभु गिरधर नागर हैं; वही मुझे मिल गए हैं।