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नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि — Word-by-Word Meaning

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

न एनं छिन्दन्ति शस्त्राणि
Na enam chhindanti shastrani
शस्त्र इस (आत्मा) को काट नहीं सकते
न एनं दहति पावकः
Na enam dahati pavakah
अग्नि इसे जला नहीं सकती
न च एनं क्लेदयन्ति आपः
Na cha enam kledayanti apah
जल इसे भिगो नहीं सकता
न शोषयति मारुतः
Na shoshayati marutah
वायु इसे सुखा नहीं सकती

Complete Translation

आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न अग्नि जला सकती है; न जल भिगो सकता है, न वायु सुखा सकती है।

Origin & History

Source: Bhagavad Gita, Chapter 2, Verse 23

Author: Veda Vyasa (Lord Krishna's teaching)

Period: Itihasa (Mahabharata)

जब अर्जुन कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र पर मृत्यु की संभावना से शोकग्रस्त हुए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने शाश्वत आत्मा का सत्य प्रकट किया: कि आत्मा न कभी जन्म लेती है, न कभी मरती है, और किसी भी तत्व से उसकी हानि नहीं हो सकती। यह श्लोक, अपने सहयोगी 2.22 के साथ, अमर आत्मा पर गीता के सबसे प्रकाशमान उपदेशों में से है।

Frequently Asked Questions

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि का अर्थ क्या है?
भगवद्गीता 2.23 से: 'आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते, अग्नि जला नहीं सकती, जल भिगो नहीं सकता, और वायु सुखा नहीं सकती।' श्रीकृष्ण सिखाते हैं कि आत्मा शाश्वत और अविनाशी है, समस्त हानि से परे।
नैनं छिन्दन्ति किस अध्याय और श्लोक में है?
यह भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय (सांख्य योग) का तेईसवाँ श्लोक है, जहाँ श्रीकृष्ण अर्जुन के मृत्यु-भय को सांत्वना देने के लिए आत्मा के अमर, अपरिवर्तनीय स्वरूप की व्याख्या करते हैं।
यह श्लोक अंत्येष्टि में क्यों पढ़ा जाता है?
क्योंकि यह सिखाता है कि आत्मा कभी नहीं मरती — इसे काटा, जलाया, भिगोया या सुखाया नहीं जा सकता। इसे अंत्येष्टि और शोक में पढ़ने से यह सांत्वना मिलती है कि दिवंगत आत्मा शाश्वत और अछूती है, और मृत्यु का भय विलीन होता है।

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