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णमोकार मंत्र Meaning — Line by Line

णमोकार मंत्र

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of णमोकार मंत्र with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Verse 1#

Namo Arihantanam

णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्व साहूणं

Namo Arihantanam Namo Siddhanam Namo Aayariyanam Namo Uvajjhayanam Namo Loe Savva Sahunam

Meaningअरिहन्तों को नमस्कार, सिद्धों को नमस्कार, आचार्यों को नमस्कार, उपाध्यायों को नमस्कार, लोक के समस्त साधुओं को नमस्कार।

Verse 2#

Eso Panch Namokkaro

एसो पंच णमोक्कारो सव्व पावप्पणासणो मंगलाणं सव्वेसिं पढमं हवइ मंगलं

Eso Panch Namokkaro Savva Pavappanasano Mangalanam Cha Savvesim Padhamam Havai Mangalam

Meaningयह पञ्च-नमस्कार समस्त पापों का नाश करने वाला है, और सब मंगलों में प्रथम (सर्वश्रेष्ठ) मंगल है।

Word-by-Word Breakdown

णमो
Namo
मैं नमन करता हूँ / नमस्कार करता हूँ
अरिहंताणं
Arihantanam
अरिहंत — जिन्होंने आंतरिक शत्रुओं (कषायों) पर विजय प्राप्त की है
सिद्धाणं
Siddhanam
सिद्ध — मुक्त आत्माएँ जिन्होंने मोक्ष प्राप्त किया है
आयरियाणं
Aayariyanam
आचार्य — आध्यात्मिक गुरु और संघ के प्रमुख
उवज्झायाणं
Uvajjhayanam
उपाध्याय — शास्त्रों की शिक्षा देने वाले गुरु
लोए सव्व साहूणं
Loe Savva Sahunam
संसार के समस्त साधु (मुनि और साध्वियाँ)
पंच णमोक्कारो
Panch Namokkaro
यह पंच नमस्कार
सव्व पावप्पणासणो
Savva Pavappanasano
समस्त पापों का नाश करता है
मंगलं
Mangalam
मंगल, समस्त मंगलों में सर्वश्रेष्ठ

Origin & History

Source: Jain Agamas (ancient Jain scriptures)

Author: Ancient Jain tradition (pre-Mahavira)

Period: Over 2,500 years old

णमोकार मंत्र 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर (599-527 ई.पू.) से भी पूर्व का है। इसे नित्य (शाश्वत) माना जाता है — किसी के द्वारा रचा नहीं गया, बल्कि अनादि काल से विद्यमान। जब महावीर ने केवल ज्ञान (सर्वज्ञता) प्राप्त किया, तब देवताओं ने उत्सव में इस मंत्र का उच्चारण किया। यह प्रत्येक जैन बालक को सिखाई जाने वाली पहली प्रार्थना है और मृत्यु के समय जैन के होठों पर अंतिम प्रार्थना है।

Frequently Asked Questions

णमोकार मंत्र क्या है?
णमोकार (नवकार) मंत्र जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है। यह पाँच परमेष्ठियों — अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और समस्त साधुओं — को नमस्कार करता है। यह किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पूर्णता के गुणों की उपासना करता है।
क्या अजैन भी णमोकार मंत्र का जप कर सकते हैं?
हाँ। णमोकार मंत्र सार्वभौमिक है क्योंकि इसमें किसी विशेष देव, व्यक्ति या संप्रदाय का उल्लेख नहीं है। यह गुणों को नमस्कार करता है — आध्यात्मिक विजय, मुक्ति, शिक्षण और त्याग — जो सार्वभौमिक आदर्श हैं।
णमोकार मंत्र में ईश्वर का उल्लेख क्यों नहीं है?
जैन धर्म सिखाता है कि प्रत्येक आत्मा आत्म-प्रयास से ईश्वर (अरिहंत/सिद्ध) बनने की क्षमता रखती है। णमोकार मंत्र उन्हें नमस्कार करता है जिन्होंने यह सिद्धि प्राप्त की और जो दूसरों का मार्गदर्शन करते हैं — किसी सृष्टिकर्ता देव में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उपलब्धि में दिव्यता को पहचानता है।

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