नासै रोग हरै सब पीरा — Word-by-Word Meaning
नासै रोग हरै सब पीरा
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
नासै
nase
नष्ट हो जाता है, मिट जाता है
रोग
rog
रोग, बीमारी
हरै
harai
हर लिया जाता है, दूर हो जाता है
सब
sab
सब, समस्त
पीरा
peera
पीड़ा, दुःख, कष्ट
जपत
japat
जप करने से / (नाम) दोहराने से
निरंतर
nirantar
निरन्तर, बिना रुके, लगातार
हनुमत
Hanumat
हनुमान
बीरा
beera (vira)
वीर, शूरवीर — हे वीर हनुमान
Complete Translation
वीर हनुमान का निरन्तर जप करने से समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं और सारी पीड़ा दूर हो जाती है॥
Origin & History
Source: Hanuman Chalisa (chaupai)
Author: Tulsidas
Period: 16th century CE
हनुमान चालीसा में भूत-प्रेत भगाने की हनुमानजी की शक्ति का वर्णन करने के पश्चात् गोस्वामी तुलसीदास उनकी आरोग्यदायिनी शक्ति की ओर मुड़ते हैं। यह पद वचन देता है कि वीर हनुमान के नाम का निरन्तर जप समस्त रोगों का नाश और हर पीड़ा का हरण करता है — यह उपदेश विशेष रूप से स्वयं तुलसीदासजी से जुड़ा है, जिनके विषय में परम्परा कहती है कि उन्होंने तीव्र शारीरिक कष्ट से मुक्ति हेतु हनुमानजी की कृपा माँगते हुए हनुमान बाहुक की रचना की थी।
Frequently Asked Questions
'नासै रोग हरै सब पीरा' का क्या अर्थ है?▼
इसका अर्थ है 'समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं और सारी पीड़ा दूर हो जाती है।' पूरी पंक्ति कहती है कि यह वीर हनुमान (हनुमत बीरा) के नाम का निरन्तर जप (जपत निरंतर) करने से होता है।
क्या यह पद आरोग्य और स्वास्थ्य के लिए जपा जाता है?▼
हाँ। यह हनुमान चालीसा का स्वास्थ्य के लिए प्रमुख पद है। भक्त रोग से मुक्ति, पीड़ा से राहत तथा सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हनुमानजी की आरोग्यदायिनी कृपा में विश्वास रखते हुए इसका जप करते हैं।
रोगी के लिए इस पद का जप कैसे करना चाहिए?▼
पद स्वयं कहता है 'जपत निरंतर' — निरन्तर जप करें। श्रद्धा से इसे दोहराएँ, प्रायः माला पर 108 बार, अपने लिए या रोगी प्रियजन के पास बैठकर। रोग के समय प्रतिदिन जप करने की सलाह दी जाती है।
'हनुमत बीरा' कौन हैं?▼
'हनुमत बीरा' का अर्थ है 'वीर हनुमान' (हनुमत = हनुमान, बीरा/वीरा = शूरवीर, वीर)। यह पद सिखाता है कि इस वीर, करुणामय हनुमान का निरन्तर स्मरण रोग और पीड़ा को दूर कर देता है।
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