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नासै रोग हरै सब पीरा

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 मंगलवार और शनिवार की प्रातः; रोग के समय प्रतिदिन, तथा रोगी की शय्या के पास·📜 Hanuman Chalisa (chaupai)

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अर्थ

यह हनुमान चालीसा का महान् आरोग्य-पद है। तुलसीदासजी आश्वासन देते हैं कि वीर हनुमान ('हनुमत बीरा') का निरन्तर जप करने (जपत निरंतर) से समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं और सारी पीड़ा दूर हो जाती है। रोग से मुक्ति, कष्ट से राहत तथा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए यह सर्वप्रमुख पंक्ति है, जिसका पाठ रोगी के पास और आरोग्य की प्रार्थना में किया जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Hanuman Chalisa (chaupai) · Tulsidas · 16th century CE

हनुमान चालीसा में भूत-प्रेत भगाने की हनुमानजी की शक्ति का वर्णन करने के पश्चात् गोस्वामी तुलसीदास उनकी आरोग्यदायिनी शक्ति की ओर मुड़ते हैं। यह पद वचन देता है कि वीर हनुमान के नाम का निरन्तर जप समस्त रोगों का नाश और हर पीड़ा का हरण करता है — यह उपदेश विशेष रूप से स्वयं तुलसीदासजी से जुड़ा है, जिनके विषय में परम्परा कहती है कि उन्होंने तीव्र शारीरिक कष्ट से मुक्ति हेतु हनुमानजी की कृपा माँगते हुए हनुमान बाहुक की रचना की थी।

शास्त्रों में वर्णित

व्यापक मान्यता है कि जो अटूट श्रद्धा से इस पद का जप करते हैं, वे दीर्घ रोग और पीड़ा से मुक्त हो जाते हैं; अनेक भक्त बताते हैं कि रोगी की शय्या के पास 'हनुमत बीरा' के निरन्तर जप से वहाँ भी अप्रत्याशित आरोग्य मिला जहाँ उपचार विफल हो चुके थे।

मंत्र

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नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

Nase Rog Harai Sab Peera. Japat Nirantar Hanumat Beera.

अर्थ:वीर हनुमान का निरन्तर जप करने से समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं और सारी पीड़ा दूर हो जाती है॥

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

नासै🔊naseनष्ट हो जाता है, मिट जाता है
रोग🔊rogरोग, बीमारी
हरै🔊haraiहर लिया जाता है, दूर हो जाता है
सब🔊sabसब, समस्त
पीरा🔊peeraपीड़ा, दुःख, कष्ट
जपत🔊japatजप करने से / (नाम) दोहराने से
निरंतर🔊nirantarनिरन्तर, बिना रुके, लगातार
हनुमत🔊Hanumatहनुमान
बीरा🔊beera (vira)वीर, शूरवीर — हे वीर हनुमान

नासै रोग हरै सब पीरा पाठ के लाभ

रोग से मुक्ति और शारीरिक पीड़ा (रोग और पीरा) से राहत के लिए जपा जाता है

हनुमानजी के नाम के निरन्तर जप से समस्त व्याधियों के नाश की मान्यता है

रोगी और पीड़ित जनों को सान्त्वना और बल प्रदान करता है

शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ मानसिक वेदना और व्यथा को भी शान्त करता है

परम्परा से रोगी की शय्या के पास आरोग्य हेतु इसका पाठ किया जाता है

रोग के समय श्रद्धा, आशा और धैर्य का संचार करता है

नासै रोग हरै सब पीरा जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयमंगलवार और शनिवार की प्रातः; रोग के समय प्रतिदिन, तथा रोगी की शय्या के पास

पद स्वयं विधि बताता है — 'जपत निरंतर', निरन्तर जप। इस चौपाई को स्थिरता से दोहराएँ, श्रेष्ठतः माला पर 108 बार, वीर हनुमान की आरोग्यदायिनी कृपा में हार्दिक श्रद्धा के साथ। इसका जप अपने लिए या किसी रोगी प्रियजन के पास बैठकर उसकी ओर से भी किया जा सकता है। दीर्घ रोग में इसे दैनिक साधना बनाएँ। सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए यह पूर्ण हनुमान चालीसा के पाठ के अंग रूप में भी पढ़ा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसका अर्थ है 'समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं और सारी पीड़ा दूर हो जाती है।' पूरी पंक्ति कहती है कि यह वीर हनुमान (हनुमत बीरा) के नाम का निरन्तर जप (जपत निरंतर) करने से होता है।
हाँ। यह हनुमान चालीसा का स्वास्थ्य के लिए प्रमुख पद है। भक्त रोग से मुक्ति, पीड़ा से राहत तथा सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हनुमानजी की आरोग्यदायिनी कृपा में विश्वास रखते हुए इसका जप करते हैं।
पद स्वयं कहता है 'जपत निरंतर' — निरन्तर जप करें। श्रद्धा से इसे दोहराएँ, प्रायः माला पर 108 बार, अपने लिए या रोगी प्रियजन के पास बैठकर। रोग के समय प्रतिदिन जप करने की सलाह दी जाती है।
'हनुमत बीरा' का अर्थ है 'वीर हनुमान' (हनुमत = हनुमान, बीरा/वीरा = शूरवीर, वीर)। यह पद सिखाता है कि इस वीर, करुणामय हनुमान का निरन्तर स्मरण रोग और पीड़ा को दूर कर देता है।

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