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नवग्रह मंत्र Meaning — Line by Line

नवग्रह मंत्र

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of नवग्रह मंत्र with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

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  1. Verse 1. Om Suryaya Namah
  2. Verse 2. Om Chandraya Namah
  3. Verse 3. Om Angarakaya Namah
  4. Verse 4. Om Budhaya Namah
  5. Verse 5. Om Brihaspataye Namah
  6. Verse 6. Om Shukraya Namah
  7. Verse 7. Om Shanaishcharaya Namah
  8. Verse 8. Om Rahave Namah
  9. Verse 9. Om Ketave Namah
Verse 1#

Om Suryaya Namah

सूर्याय नमः

Om Suryaya Namah

Meaningॐ सूर्याय नमः — सूर्य को नमस्कार, जो प्रकाश, जीवन और ओज के स्रोत हैं।

Verse 2#

Om Chandraya Namah

चन्द्राय नमः

Om Chandraya Namah

Meaningॐ चन्द्राय नमः — चन्द्र को नमस्कार, जो मन और भावनाओं के स्वामी हैं।

Verse 3#

Om Angarakaya Namah

अंगारकाय नमः

Om Angarakaya Namah

Meaningॐ अंगारकाय नमः — मंगल को नमस्कार, साहस और ऊर्जा के ग्रह।

Verse 4#

Om Budhaya Namah

बुधाय नमः

Om Budhaya Namah

Meaningॐ बुधाय नमः — बुध को नमस्कार, बुद्धि और संवाद के ग्रह।

Verse 5#

Om Brihaspataye Namah

बृहस्पतये नमः

Om Brihaspataye Namah

Meaningॐ बृहस्पतये नमः — बृहस्पति (गुरु) को नमस्कार, महान गुरु और ज्ञान के स्रोत।

Verse 6#

Om Shukraya Namah

शुक्राय नमः

Om Shukraya Namah

Meaningॐ शुक्राय नमः — शुक्र को नमस्कार, प्रेम, सौन्दर्य और कलाओं के ग्रह।

Verse 7#

Om Shanaishcharaya Namah

शनैश्चराय नमः

Om Shanaishcharaya Namah

Meaningॐ शनैश्चराय नमः — शनि को नमस्कार, कर्म, अनुशासन और न्याय के स्वामी।

Verse 8#

Om Rahave Namah

राहवे नमः

Om Rahave Namah

Meaningॐ राहवे नमः — राहु को नमस्कार, इच्छा का उत्तर चन्द्र-बिन्दु।

Verse 9#

Om Ketave Namah

केतवे नमः

Om Ketave Namah

Meaningॐ केतवे नमः — केतु को नमस्कार, मोक्ष का दक्षिण चन्द्र-बिन्दु।

Word-by-Word Breakdown

सूर्य
Surya
सूर्य — आत्मा, ओज, अधिकार, पिता
चन्द्र
Chandra
चन्द्र — मन, भावनाएँ, माता, पोषण
अंगारक
Angaraka
मंगल (अंगारक) — साहस, ऊर्जा, भाई-बहन, युद्ध
बुध
Budha
बुध — बुद्धि, संवाद, व्यापार, वाणी
बृहस्पति
Brihaspati
बृहस्पति (गुरु) — ज्ञान, आध्यात्म, शिक्षक, विस्तार
शुक्र
Shukra
शुक्र — प्रेम, सौन्दर्य, कलाएँ, विलास, विवाह
शनैश्चर
Shanaishchara
शनैश्चर (शनि) — अनुशासन, कर्म, न्याय, दीर्घायु
राहु
Rahu
राहु — उत्तर चन्द्र-बिन्दु — इच्छा, माया, आसक्ति, विदेश
केतु
Ketu
केतु — दक्षिण चन्द्र-बिन्दु — वैराग्य, मोक्ष, आध्यात्म

Origin & History

Source: Navagraha Suktam (Vedic texts) and Brihat Parashara Hora Shastra

Author: Vedic Rishis and Sage Parashara

Period: Ancient Vedic period

नवग्रह मंत्रों की उत्पत्ति वैदिक खगोलीय परंपरा से हुई है, जहाँ ऋषियों ने देखा कि नौ खगोलीय पिंड मानव जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। ऋषि पराशर ने इस ज्ञान को बृहत् पराशर होरा शास्त्र में व्यवस्थित किया, जो वैदिक ज्योतिष का मूलभूत ग्रंथ है। नवग्रह को समर्पित मंदिर पूरे दक्षिण भारत में हैं, जहाँ भक्त नौ ग्रह-देवताओं की प्रदक्षिणा कर उनका आशीर्वाद माँगते हैं।

Frequently Asked Questions

नवग्रह क्या हैं?
वैदिक ज्योतिष में नौ खगोलीय पिंड: सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, और दो चन्द्र-बिन्दु राहु तथा केतु।
मुझे नवग्रह मंत्र कब जपना चाहिए?
ग्रह-संक्रमण, ग्रह दोष काल, या किसी विशेष ग्रह से संबंधित कठिनाइयों के समय जप करें। प्रत्येक ग्रह का अपना दिन है: सूर्य-रविवार, चन्द्र-सोमवार, मंगल-मंगलवार, बुध-बुधवार, गुरु-गुरुवार, शुक्र-शुक्रवार, शनि-शनिवार।
नवग्रह मंत्र कैसे कार्य करते हैं?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, नौ ग्रह जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करते हैं। उनके मंत्रों का जप उनकी ऊर्जाओं को शांत करता है, नकारात्मक प्रभावों को कम करता है और आपकी जन्म-कुंडली में सकारात्मक प्रभावों को सुदृढ़ करता है।

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