नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम् — Word-by-Word Meaning
नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम्
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
नवग्रहों की पीड़ा हरने वाली स्तुति — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु व केतु — जो लोकरक्षक सूर्य से आरंभ होकर प्रत्येक ग्रह से शांति व कृपा की याचना करती है।
Origin & History
Source: Traditional
Author: Traditional
Period: Classical
नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम् एक प्रिय पारंपरिक स्तुति है। यह नवग्रहों — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — की पीड़ा हरने वाली एक स्तुति है, जो लोकरक्षक सूर्य से आरंभ होकर प्रत्येक ग्रह से शान्ति और कृपा की याचना करती है।
Frequently Asked Questions
नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम् क्या है?▼
नवग्रहों — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — की पीड़ा हरने वाली एक स्तुति, जो लोकरक्षक सूर्य से आरंभ होकर प्रत्येक ग्रह से शान्ति और कृपा की याचना करती है।
इसकी रचना किसने की और इसका पाठ कब किया जाता है?▼
यह एक पारंपरिक स्तोत्र है। इसका पाठ प्रातः या संध्या में श्रद्धापूर्वक किया जाता है, विशेषकर रविवार को तथा रथ सप्तमी व रविवार के दिनों में।
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