नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम्
अन्य नाम / खोज: grahanamadiradityo lokarakshanakarakah · navagraha pidahara stotram lyrics · navagraha pidahara stotra
अपनी भाषा/लिपि में पढ़ें
✦ अर्थ
नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम् नवग्रहों — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — की पीड़ा हरने वाली एक स्तुति है। यह लोकरक्षक सूर्य से आरंभ होकर प्रत्येक ग्रह से शान्ति और कृपा की याचना करती है। श्रद्धा सहित नित्य पाठ करने योग्य यह एक पावन संस्कृत स्तोत्र है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional · Traditional · Classical
नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम् एक प्रिय पारंपरिक स्तुति है। यह नवग्रहों — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु — की पीड़ा हरने वाली एक स्तुति है, जो लोकरक्षक सूर्य से आरंभ होकर प्रत्येक ग्रह से शान्ति और कृपा की याचना करती है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम् का सच्चे और भक्तिपूर्ण हृदय से पाठ करना उस दिव्य कृपा के निकट पहुँचना है, जो प्रेमपूर्वक पुकारने वालों को कभी नहीं त्यागती।
मंत्र
किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें
ग्रहाणामादिरादित्यो लोकरक्षणकारकः । विषमस्थानसंभूतां पीडां हरतु मे रविः ॥ १॥ रोहिणीशः सुधामूर्तिः सुधागात्रः सुधाशनः । विषमस्थानसंभूतां पीडां हरतु मे विधुः ॥ २॥ भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत् सदा । वृष्टिकृद्वृष्टिहर्ता च पीडां हरतु मे कुजः ॥ ३॥ उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युतिः । सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीडां हरतु मे बुधः ॥ ४॥ देवमन्त्री विशालाक्षः सदा लोकहिते रतः । अनेकशिष्यसम्पूर्णः पीडां हरतु मे गुरुः ॥ ५॥ दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामतिः । प्रभुस्ताराग्रहाणां च पीडां हरतु मे भृगुः ॥ ६॥ सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्षः शिवप्रियः । मन्दचारः प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनिः ॥ ७॥ महाशिरा महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबलः । अतनुश्चोर्ध्वकेशश्च पीडां हरतु मे तमः ॥ ८॥ अनेकरूपवर्णैश्च शतशोऽथ सहस्रशः । उत्पातरूपो जगतां पीडां हरतु मे शिखी ॥ ९॥ ॥ इति नवग्रहपीडाहरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
grahāṇāmādirādityo lokarakṣaṇakārakaḥ | viṣamasthānasaṃbhūtāṃ pīḍāṃ haratu me raviḥ || 1|| rohiṇīśaḥ sudhāmūrtiḥ sudhāgātraḥ sudhāśanaḥ | viṣamasthānasaṃbhūtāṃ pīḍāṃ haratu me vidhuḥ || 2|| bhūmiputro mahātejā jagatāṃ bhayakṛt sadā | vṛṣṭikṛdvṛṣṭihartā ca pīḍāṃ haratu me kujaḥ || 3|| utpātarūpo jagatāṃ candraputro mahādyutiḥ | sūryapriyakaro vidvān pīḍāṃ haratu me budhaḥ || 4|| devamantrī viśālākṣaḥ sadā lokahite rataḥ | anekaśiṣyasampūrṇaḥ pīḍāṃ haratu me guruḥ || 5|| daityamantrī gurusteṣāṃ prāṇadaśca mahāmatiḥ | prabhustārāgrahāṇāṃ ca pīḍāṃ haratu me bhṛguḥ || 6|| sūryaputro dīrghadeho viśālākṣaḥ śivapriyaḥ | mandacāraḥ prasannātmā pīḍāṃ haratu me śaniḥ || 7|| mahāśirā mahāvaktro dīrghadaṃṣṭro mahābalaḥ | atanuścordhvakeśaśca pīḍāṃ haratu me tamaḥ || 8|| anekarūpavarṇaiśca śataśo'tha sahasraśaḥ | utpātarūpo jagatāṃ pīḍāṃ haratu me śikhī || 9|| || iti navagrahapīḍāharastotraṃ sampūrṇam ||
अर्थ:नवग्रहों की पीड़ा हरने वाली स्तुति — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु व केतु — जो लोकरक्षक सूर्य से आरंभ होकर प्रत्येक ग्रह से शांति व कृपा की याचना करती है।
नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम् पाठ के लाभ
नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम् के पाठ से देवता की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्राप्त होती है।
भक्ति को बढ़ाता है, मन को शांत करता है और प्रभु के स्मरण में हृदय को स्थिर करता है।
रविवार को, तथा रथ सप्तमी व रविवार के दिनों में सर्वाधिक शुभ।
एक अमूल्य संस्कृत स्तोत्र, श्रद्धा सहित नित्य पाठ के लिए उपयुक्त।
नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम् जप विधि
स्नान कर पूर्व की ओर, सूर्य की ओर मुख करके देवता की प्रतिमा के समक्ष बैठें। दीप जलाएँ और नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम् का धीरे-धीरे, भक्तिपूर्वक पाठ करें। इसका पाठ नित्य किया जा सकता है, अथवा विशेषकर रविवार को तथा रथ सप्तमी व रविवार के दिनों में।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ये भी पढ़ें
ॐ
Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides