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श्री सूर्य देव आरती

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः या सायं, पूजा के अन्त में; देव के पर्व दिवसों पर·🎵 ऑडियो सहित·📜 Traditional Hindi devotional aarti

अन्य नाम / खोज: om jaya surya bhagavana jaya ho dinakara bhagavana · surya dev aarti lyrics

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अर्थ

श्री सूर्य देव आरती ('ॐ जय सूर्य भगवान') सूर्यदेव की प्रसिद्ध हिन्दी आरती है, जो दीप व घण्टी के साथ पूजा के अन्त में गाई जाती है। सूर्य ही समस्त नेत्रों को दृश्य देव हैं — जीवन, प्रकाश व आरोग्य के स्रोत। यह आरती आरोग्य, ओज, नेत्र-ज्योति, सफलता व आत्मविश्वास हेतु, विशेषतः सूर्योदय व रविवार को सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात गाई जाती है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Hindi devotional aarti · Traditional · Devotional era

सूर्य, सूर्यदेव, समस्त नेत्रों को दृश्य एकमात्र देव हैं — जीवन, प्रकाश व आरोग्य के स्रोत, जो सारथी अरुण द्वारा हाँके जाते सात अश्वों के रथ पर सवार हैं। वैदिक गायत्री से लेकर अगस्त्य द्वारा राम को सिखाए आदित्य हृदय तक, युगों-युगों से सूर्य की उपासना प्रातःकाल होती आई है; यह आरती उदित सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के पश्चात गाई जाती है।

शास्त्रों में वर्णित

आदित्य हृदय के पाठ से ही, सूर्य के आशीर्वाद पर, राम को रावण को पराजित करने का बल प्राप्त हुआ। भक्त उदित सूर्य को जल (अर्घ्य) अर्पित करते हैं, उनकी आरती गाते हैं, और अपने जीवन में आरोग्य, ओज, नेत्र-ज्योति व आत्मविश्वास का संचार होते अनुभव करते हैं।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान जगत् के नेत्र स्वरूपा तुम हो त्रिगुण स्वरूपा, धरत सब ही तव ध्यान

Om jaya surya bhagavana, jaya ho dinakara bhagavana Jagat ke netra svarupa tuma ho triguna svarupa, dharata saba hi tava dhyana

अर्थ:ॐ जय सूर्य भगवान, जय दिनकर भगवान! आप ही जगत् के नेत्र हैं, त्रिगुणस्वरूप; आप पर ही सब ध्यान लगाते हैं।

श्लोक 2

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम श्वेत कमलधारी तुम चार भुजाधारी

Sarathi aruna haim prabhu tuma shveta kamaladhari Tuma chara bhujadhari

अर्थ:आपके सारथी अरुण हैं, हे प्रभु; श्वेत कमल धारण किए, हे चतुर्भुज।

श्लोक 3

अश्व हैं सात तुम्हारे कोटि किरण पसारे तुम हो देव महान

Ashva haim sata tumhare koti kirana pasare Tuma ho deva mahana

अर्थ:सात हैं आपके अश्व, करोड़ों किरणें बिखेरते; आप ही महान् देव हैं।

श्लोक 4

ऊषाकाल में जब तुम उदयाचल आते सब तब दर्शन पाते

Ushakala mem jaba tuma udayachala ate Saba taba darshana pate

अर्थ:प्रातः जब आप पूर्व पर्वत पर उदित होते हैं, तब सब आपके दर्शन पाते हैं।

श्लोक 5

फैलाते उजियारा जागता तब जग सारा करे सब तव गुणगान

Phailate ujiyara jagata taba jaga sara Kare saba tava gunagana

अर्थ:आप प्रकाश फैलाते हैं और समस्त जगत् जाग उठता है; तब सब आपका गुणगान करते हैं।

श्लोक 6

सन्ध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते गोधन तब घर आते

Sandhya mem bhuvaneshvara astachala jate Godhana taba ghara ate

अर्थ:सायं, हे प्राणिनाथ, आप पश्चिम पर्वत के पीछे अस्त होते हैं; तब गौएँ घर लौटती हैं।

श्लोक 7

गोधूलि बेला में हर घर हर आँगन में हो तव महिमा गान

Godhuli bela mem hara ghara hara angana mem Ho tava mahima gana

अर्थ:सन्ध्या वेला में, हर घर व हर आँगन में, आपकी महिमा गाई जाती है।

श्लोक 8

देव दनुज नर नारी ऋषि मुनिवर भजते आदित्य हृदय जपते

Deva danuja nara nari rishi munivara bhajate Aditya hridaya japate

अर्थ:देव, दानव, नर व नारी, ऋषि व महर्षि आपकी आराधना करते और आदित्य हृदय का पाठ करते हैं।

श्लोक 9

स्तोत्र ये मंगलकारी इसकी है रचना न्यारी दे नव जीवनदान

Stotra ye mamgalakari isaki hai rachana nyari De nava jivanadana

अर्थ:यह मंगलमय स्तोत्र, अद्भुत रचना का, नवजीवन प्रदान करता है।

श्लोक 10

तुम हो त्रिकाल रचयिता तुम जग के आधार महिमा तव अपरम्पार

Tuma ho trikala rachayita tuma jaga ke adhara Mahima tava aparampara

अर्थ:आप त्रिकाल के कर्ता हैं, जगत् के आधार; अपार है आपकी महिमा।

श्लोक 11

प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते बल बुद्धि और ज्ञान

Pranom ka simchana karake bhaktom ko apane dete Bala buddhi aura jnana

अर्थ:सबके प्राणों का पोषण करते हुए, आप अपने भक्तों को बल, बुद्धि व ज्ञान प्रदान करते हैं।

श्लोक 12

भूचर जलचर खेचर सब के हो प्राण तुम्हीं सब जीवों के प्राण तुम्हीं

Bhuchara jalachara khechara saba ke ho prana tumhim Saba jivom ke prana tumhim

अर्थ:पृथ्वी, जल व आकाश के जीव — आप सबके प्राण हैं; आप ही हर प्राणी का जीवन हैं।

श्लोक 13

वेद पुराण बखाने धर्म सभी तुम्हें माने तुम ही सर्वशक्तिमान

Veda purana bakhane dharma sabhi tumhem mane Tuma hi sarvashaktimana

अर्थ:वेद व पुराण आपकी स्तुति करते हैं, सब मत आपको मानते हैं; आप ही सर्वशक्तिमान हैं।

श्लोक 14

ऋतुएं तुम्हारी दासी तुम शाश्वत अविनाशी शुभकारी अंशुमान

Rituem tumhari dasi tuma shashvata avinashi Shubhakari amshumana

अर्थ:ऋतुएँ आपकी दासियाँ हैं; आप शाश्वत व अविनाशी हैं — मंगलमय अंशुमान (किरणवाले)।

श्री सूर्य देव आरती पाठ के लाभ

सूर्यदेव — प्रत्यक्ष देव, जीवन, प्रकाश, आरोग्य व ओज के स्रोत — को गाई जाती है।

आरोग्य, ऊर्जा, नेत्र-ज्योति, बल, सफलता व आत्मविश्वास हेतु तथा कुण्डली में दुर्बल सूर्य को बल देने हेतु गाई जाती है।

सूर्योदय, रविवार, मकर संक्रान्ति, रथ सप्तमी व छठ पूजा में सर्वाधिक प्रभावशाली, आदर्शतः सूर्य को अर्घ्य (जल) अर्पित करने के पश्चात।

श्री सूर्य देव आरती जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः या सायं, पूजा के अन्त में; देव के पर्व दिवसों पर
दिशाFacing the deity

दीप (घृत या कर्पूर) जलाकर उसे हाथ में लेकर, देव के समक्ष घुमाते हुए गाएँ, आदर्शतः घण्टी सहित। पुष्प व प्रसाद अर्पित करें, और आरती का आशीर्वाद लेकर (हाथ ज्योति पर व फिर नेत्रों पर ले जाकर) समाप्त करें। भक्ति व स्थिर हृदय से गाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह सूर्यदेव की स्तुति में गाई जाने वाली परम्परागत हिन्दी आरती है, जो दीप व घण्टी के साथ पूजा के अन्त में की जाती है। इस पृष्ठ पर सम्पूर्ण बोल हिन्दी में लिप्यन्तरण व पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ सहित हैं।
प्रातः व सायं पूजा के अन्त में, तथा विशेषकर देव के पर्व दिनों पर। दीप जलाएँ, देव के समक्ष उसे घुमाएँ और आरती का आशीर्वाद लेकर समाप्त करें।
भक्तिपूर्वक गाने पर यह आरती देव को प्रसन्न करने, विघ्न, रोग व शोक दूर करने तथा हृदय की सच्ची कामनाएँ, आरोग्य, समृद्धि व रक्षा प्रदान करने वाली मानी जाती है।

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