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ॐ मणि पद्मे हूं — Word-by-Word Meaning

ॐ मणि पद्मे हूं

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
पवित्र अक्षर — साधक के अशुद्ध शरीर, वाणी और मन का, तथा बुद्ध के शुद्ध शरीर, वाणी और मन का प्रतीक
मणि
Mani
रत्न — करुणा, प्रेम, और सभी प्राणियों के कल्याण हेतु बुद्धत्व प्राप्त करने के परोपकारी संकल्प का प्रतीक
पद्मे
Padme
कमल — प्रज्ञा का प्रतीक, अनित्यता और शून्यता का बोध, जो आसक्ति के कीचड़ से शुद्ध होकर खिलता है
हूं
Hum
अविभाज्यता — उपाय (करुणा) और प्रज्ञा का मिलन, जो केवल बुद्धि से नहीं बल्कि साधना से ही प्राप्त होता है
ॐ (purifies)
Om
शरीर के आवरणों को शुद्ध करता है — अहंकार और दर्प
म (purifies)
Ma
वाणी के आवरणों को शुद्ध करता है — ईर्ष्या और मनोरंजन की लालसा
णि (purifies)
Ni
मन के आवरणों को शुद्ध करता है — राग और इच्छा
पद् (purifies)
Pad
विरोधी भावनाओं के आवरणों को शुद्ध करता है — अज्ञान और पूर्वाग्रह
मे (purifies)
Me
अव्यक्त संस्कारों के आवरणों को शुद्ध करता है — दरिद्रता और परिग्रह
हूं (purifies)
Hum
द्वेष के आवरणों को शुद्ध करता है — आक्रामकता और घृणा

Complete Translation

'ॐ मणि पद्मे हूं' — इसका सरल शब्दानुवाद सम्भव नहीं; इसका सार है 'कमल में मणि' — अर्थात् अवलोकितेश्वर की करुणा एवं प्रज्ञा; समस्त प्राणियों के प्रति करुणा और बोधि की कामना इसमें निहित है।

Origin & History

Source: Karandavyuha Sutra

Author: Revealed by Buddha Shakyamuni

Period: 4th-5th century CE (sutra composition)

करण्डव्यूह सूत्र के अनुसार, बुद्ध ने इस मंत्र को समस्त करुणा के सार के रूप में सिखाया। यह अवलोकितेश्वर का मंत्र है, वह बोधिसत्व जिसने यह व्रत लिया कि जब तक प्रत्येक सचेतन प्राणी दुःख से मुक्त न हो जाए तब तक वे विश्राम नहीं करेंगे। जब अनंत दुःख देखने की पीड़ा से उनका सिर फट गया, तब बुद्ध अमिताभ ने उन्हें समस्त प्राणियों को देखने के लिए ग्यारह सिर और सभी की सहायता के लिए सहस्र भुजाएँ प्रदान कीं। 7वीं शताब्दी में बौद्ध धर्म के आगमन के बाद यह मंत्र तिब्बत में सर्वाधिक जपा जाने वाला बन गया।

Frequently Asked Questions

ॐ मणि पद्मे हूं का क्या अर्थ है?
इसका शाब्दिक अर्थ है 'कमल में मणि', परंतु इसका अर्थ कहीं अधिक गहरा है। छह अक्षर छह नकारात्मक भावों (अभिमान, ईर्ष्या, इच्छा, अज्ञान, लोभ, क्रोध) के शोधन और छह पारमिताओं (दान, शील, क्षमा, वीर्य, समाधि, प्रज्ञा) के विकास को दर्शाते हैं।
क्या ॐ मणि पद्मे हूं हिंदू या बौद्ध मंत्र है?
यह एक बौद्ध मंत्र है, विशेष रूप से तिब्बती बौद्ध धर्म (वज्रयान) से। यह करुणा के बोधिसत्व अवलोकितेश्वर (तिब्बती में चेनरेज़िग) का मंत्र है। हालाँकि, यह सार्वभौमिक है और करुणा एवं शांति चाहने वाला कोई भी इसका जप कर सकता है।
मुझे ॐ मणि पद्मे हूं कितनी बार जपना चाहिए?
कोई सीमा नहीं है। तिब्बती बौद्ध इसे निरंतर जपते हैं — कुछ एक जीवनकाल में करोड़ों बार पाठ संचित करते हैं। औपचारिक साधना के लिए 108 बार (एक माला) मानक है। यहाँ तक कि एक सच्चा पाठ भी लाभकारी है।
यह मंत्र इतना प्रसिद्ध क्यों है?
यह विश्व में सर्वाधिक जपा जाने वाला मंत्र है। दलाई लामा ने कहा है कि इसमें समस्त बौद्ध शिक्षाओं का सार समाहित है। इसके छह अक्षर करुणा और प्रज्ञा के माध्यम से दुःख से बोधि तक के संपूर्ण मार्ग को समेटते हैं।

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