ॐ नमः शिवाय — Word-by-Word Meaning
ॐ नमः शिवाय
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
ॐ
Om
आदिनाद — स्वयं ब्रह्म का स्पंदन
नमः
Namah
नमस्कार / मैं नमन करता हूँ / मैं समर्पण करता हूँ — 'नम्' धातु से (झुकना)
शिवाय
Shivaya
शिव को / शिव के लिए / शिव के प्रति — चतुर्थी विभक्ति; शिव = मंगलमय जो समस्त अस्तित्व में व्याप्त हैं
न (Na)
Na
पृथ्वी तत्त्व, मूलाधार चक्र, शिव का तिरोभाव (आवरण) कर्म
म (Ma)
Ma
जल तत्त्व, स्वाधिष्ठान चक्र, शिव का सृष्टि कर्म
शि (Shi)
Shi
अग्नि तत्त्व, मणिपूर चक्र, स्वयं शिव, संहार कर्म
व (Va)
Va
वायु तत्त्व, अनाहत चक्र, शिव की प्रकट करने वाली कृपा, स्थिति कर्म
य (Ya)
Ya
आकाश तत्त्व, विशुद्ध चक्र, जीवात्मा (जीव), अनुग्रह कर्म
Complete Translation
मैं शिव को नमन करता हूँ — वह शुभ, सर्वव्यापी दिव्य चेतना जो मेरा अपना गहनतम स्वरूप है।
Origin & History
Source: Shri Rudram (Yajurveda, Taittiriya Samhita)
Author: Vedic Rishis
Period: 1200-1000 BCE
न-म-शि-वा-य ये पाँच पावन अक्षर श्री रुद्रम के ठीक मध्य में आते हैं — यजुर्वेद में पाया गया शिव का सबसे प्राचीन स्तोत्र। रुद्रम के हृदय में इनका यह स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह शिव-उपासना का मूल सार है। बाद में आदि शंकराचार्य ने पंचाक्षर स्तोत्रम् की रचना की, जिसमें प्रत्येक अक्षर को एक तत्त्व, एक चक्र और शिव के पाँच ब्रह्मांडीय कर्मों में से एक से जोड़ा गया।
Frequently Asked Questions
ॐ नमः शिवाय का अर्थ क्या है?▼
ॐ नमः शिवाय का अर्थ है — मैं शिव को नमन करता हूँ, उस शुभ, सर्वव्यापी दिव्य चेतना को। ॐ आदिनाद है, नमः का अर्थ है नमन या समर्पण, और शिवाय का अर्थ है शिव के प्रति (चतुर्थी विभक्ति में)। इसका गहनतम अर्थ है: मैं अपने सीमित स्व को उस असीम दिव्य चेतना में समर्पित करता हूँ जो मेरा अपना सच्चा स्वरूप है।
ॐ नमः शिवाय के प्रत्येक अक्षर का क्या अर्थ है?▼
न = पृथ्वी तत्त्व, मूलाधार चक्र, आवरण की कृपा। म = जल तत्त्व, स्वाधिष्ठान चक्र, सृष्टि। शि = अग्नि तत्त्व, मणिपुर चक्र, स्वयं शिव। व = वायु तत्त्व, अनाहत चक्र, प्रकटीकरण की कृपा। य = आकाश तत्त्व, विशुद्धि चक्र, जीवात्मा। ये सब मिलकर पाँचों तत्त्वों को शुद्ध करते हैं और पृथ्वी-चेतना से शुद्ध चेतना तक का मार्ग सक्रिय करते हैं।
ॐ नमः शिवाय का जप कितनी बार करना चाहिए?▼
रुद्राक्ष की माला से प्रति बैठक 108 बार। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय दिन में दो बार करना आदर्श है। पूर्ण ध्यान के साथ प्रतिदिन केवल 11 बार जप भी अत्यंत फलदायी है। दिन भर श्वास के साथ मिलाकर इसे निरंतर जप के रूप में भी किया जा सकता है।
पंचाक्षर मंत्र क्या है?▼
पंचाक्षर का अर्थ है पाँच अक्षर। पंचाक्षर मंत्र है — नमः शिवाय, अर्थात ॐ के बिना न-म-शि-वा-य। यही श्री रुद्रम का मूल वैदिक रूप है। ॐ सहित ॐ नमः शिवाय षडक्षरी (छह अक्षरों वाला) रूप है।
ॐ नमः शिवाय कहाँ से आया है?▼
इसका मूल श्री रुद्रम में है — कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता (4.5.8.1) में 'नमः शिवाय च शिवतराय च' के रूप में (ॐ के बिना)। यह शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी (अध्याय 5, श्लोक 41) में भी आता है। ॐ का उपसर्ग आगमिक-शैव परंपरा में जोड़ा गया। शिव पुराण घोषित करता है कि यह मंत्र सृष्टि के आदि में ही विद्यमान था।
ॐ नमः शिवाय और नमः शिवाय में क्या अंतर है?▼
नमः शिवाय श्री रुद्रम का मूल पंचाक्षर (पाँच अक्षरों वाला) रूप है — जिसे सबके लिए सुलभ माना गया है। ॐ नमः शिवाय में आदिनाद ॐ जुड़ जाता है, जिससे यह षडक्षरी (छह अक्षरों वाला) रूप बन जाता है। आधुनिक काल में लगभग सभी परंपराओं के गुरु सच्चे भक्तों को ॐ नमः शिवाय जपने की प्रेरणा देते हैं। दोनों रूपों में समान शक्ति है और दोनों एक ही अनुभूति तक ले जाते हैं।
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