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ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम् Meaning — Line by Line

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम्

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम् with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Verse 1#

Om Purnamadah Purnamidam Purnat Purnamudachyate

पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

Om Purnamadah Purnamidam Purnat Purnamudachyate Purnasya Purnamadaya Purnamevavashishyate

Meaningवह (ब्रह्म) पूर्ण है, यह (जगत्) भी पूर्ण है। पूर्ण से ही पूर्ण उत्पन्न होता है। पूर्ण में से पूर्ण निकाल लेने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है। ॐ शान्ति, शान्ति, शान्ति।

Verse 2#

Om Shanti Shanti Shanti

शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

Om Shanti Shanti Shanti

Meaningयह सिखाता है कि अनन्त ब्रह्म और प्रकट जगत् — दोनों पूर्ण हैं; और जगत् के उत्पन्न होने पर भी अनन्त में कोई कमी नहीं आती, वह सदा पूर्ण रहता है।

Word-by-Word Breakdown

पूर्णम् अदः
Purnam Adah
वह (अव्यक्त परम तत्त्व, ब्रह्म) पूर्ण है, सम्पूर्ण है
पूर्णम् इदं
Purnam Idam
यह (व्यक्त जगत्) भी पूर्ण है, सम्पूर्ण है
पूर्णात् पूर्णम् उदच्यते
Purnat Purnamudachyate
पूर्ण से ही पूर्ण उत्पन्न होता है
पूर्णस्य पूर्णम् आदाय
Purnasya Purnamadaya
पूर्ण में से पूर्ण को निकाल लेने पर
पूर्णम् एव अवशिष्यते
Purnamevavashishyate
पूर्ण ही शेष रहता है
शान्तिः
Shanti
शांति — शरीर, मन और आत्मा के लिए तीन बार उच्चारित

Origin & History

Source: Isha Upanishad (Shanti Patha); also Brihadaranyaka Upanishad 5.1.1

Author: Vedic seers (Shukla Yajurveda tradition)

Period: Ancient (Vedic)

यह श्लोक ईश उपनिषद् के शांति आह्वान के रूप में उसका आरंभ करता है। एक ही बिंब में — पूर्ण — यह वेदांत की अद्वैत दृष्टि को समेट लेता है: अनंत ब्रह्म पूर्ण है, उससे जन्मा जगत् पूर्ण है, और जगत् के प्रकट होने पर भी स्रोत पूर्ण ही रहता है। सहस्राब्दियों से इसने उपनिषदों के अध्ययन को रूप दिया है, साधक को स्मरण कराते हुए कि जिस आत्मा को वह खोज रहा है वह पहले से ही पूर्ण है और किसी वस्तु से रहित नहीं।

Frequently Asked Questions

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम् का अर्थ क्या है?
'वह पूर्ण है, यह पूर्ण है; पूर्ण से ही पूर्ण उत्पन्न होता है; पूर्ण में से पूर्ण निकाल लेने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है।' यह घोषित करता है कि अनंत ब्रह्म और प्रकट जगत् — दोनों पूर्ण हैं, और सृष्टि के उत्पन्न होने पर भी अनंत में कोई कमी नहीं आती।
यह मंत्र कहाँ से है?
यह ईश उपनिषद् का शांति पाठ (शांति आह्वान) है, और बृहदारण्यक उपनिषद् (5.1.1) में भी आता है। यह वेदांत के सबसे प्रसिद्ध शांति मंत्रों में से एक है।
इसका पाठ कब किया जाता है?
परंपरागत रूप से उपनिषदों या किसी भी पवित्र ग्रंथ के अध्ययन के पूर्व और पश्चात्, तथा ध्यान से पूर्व — शांति का आह्वान करने और अध्ययन को पूर्णता के सत्य में स्थापित करने के लिए।

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