पाण्डुरङ्गाष्टकम् — Word-by-Word Meaning
पाण्डुरङ्गाष्टकम्
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
पंढरपुर के पाण्डुरङ्ग (विट्ठल) की स्तुति — विष्णु/कृष्ण का वह रूप जो ईंट पर कमर पर हाथ रखे भक्तों की प्रतीक्षा में खड़े हैं। महाराष्ट्र के वारकरी संतों का हृदय-गीत।
Origin & History
Source: Traditional
Author: Traditional
Period: Classical
पाण्डुरङ्गाष्टकम् एक प्रिय पारंपरिक स्तोत्र है। यह पंढरपुर के पाण्डुरङ्ग (विट्ठल) की स्तुति है — विष्णु/कृष्ण का वह रूप जो ईंट पर कमर पर हाथ रखे भक्तों की प्रतीक्षा में खड़े हैं। यह महाराष्ट्र के वारकरी संतों का हृदय-गीत है।
Frequently Asked Questions
पाण्डुरङ्गाष्टकम् क्या है?▼
यह पंढरपुर के पाण्डुरङ्ग (विट्ठल) की स्तुति है — विष्णु/कृष्ण का वह रूप जो ईंट पर कमर पर हाथ रखे भक्तों की प्रतीक्षा में खड़े हैं। यह महाराष्ट्र के वारकरी संतों का हृदय-गीत है।
पाण्डुरङ्गाष्टकम् की रचना किसने की और इसका पाठ कब किया जाता है?▼
यह एक पारंपरिक स्तोत्र है। इसका पाठ प्रातः या संध्या समय भक्ति के साथ किया जाता है, और विशेष रूप से गुरुवार एवं एकादशी को तथा एकादशी और विष्णु पर्वों के समय किया जाता है।
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