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पायो जी मैंने राम रतन धन पायो Meaning — Line by Line

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of पायो जी मैंने राम रतन धन पायो with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Verse 1#

Payo ji maine Ram ratan dhan payo

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो। वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो॥

Payo ji maine Ram ratan dhan payo Vastu amolik di mere satguru, kirpa kar apnayo

Meaningअहा, मैंने राम-नाम रूपी अमूल्य धन पा लिया! मेरे सद्गुरु ने यह अनमोल वस्तु दी और कृपा करके मुझे अपना लिया।

Verse 2#

Janam janam ki punji payi, jag mein sabhi khovayo

जनम जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो। खरचै नहिं कोई चोर लूटै, दिन दिन बढ़त सवायो॥

Janam janam ki punji payi, jag mein sabhi khovayo Kharchai nahin koi chor na lutai, din din badhat savayo

Meaningमैंने जन्म-जन्म की पूँजी पाई, जबकि जगत में सब कुछ खो दिया। यह धन न खर्च होता है, न कोई चोर इसे लूट सकता है — दिन-प्रतिदिन यह सवाया बढ़ता है।

Verse 3#

Sat ki naav khevatiya satguru, bhavsagar tar aayo

सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरख हरख जस गायो॥

Sat ki naav khevatiya satguru, bhavsagar tar aayo Meera ke prabhu Girdhar Nagar, harakh harakh jas gayo

Meaningसत्य की नाव के खेवैया सद्गुरु हैं, जिनके द्वारा मैं भवसागर तर गई। मीरा के प्रभु गिरधर नागर हैं; हर्ष-हर्ष से वह उनका यश गाती है।

Word-by-Word Breakdown

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
Payo ji maine Ram ratan dhan payo
अहा, मैंने राम-नाम रूपी अमूल्य धन पा लिया है
वस्तु अमोलिक
Vastu amolik
एक अनमोल खजाना
किरपा कर अपनायो
kirpa kar apnayo
मेरे गुरु ने कृपा करके मुझे अपना लिया
खरचै नहिं कोई चोर न लूटै
kharchai nahin koi chor na lutai
यह कभी खर्च नहीं होता, कोई चोर इसे चुरा नहीं सकता
दिन दिन बढ़त सवायो
din din badhat savayo
दिन-प्रतिदिन यह केवल बढ़ता ही है
भवसागर तर आयो
bhavsagar tar aayo
मैं भवसागर तर गई हूँ
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
Meera ke prabhu Girdhar Nagar
मीरा के प्रभु गिरधर नागर (कृष्ण) हैं

Origin & History

Source: Composed by Meera Bai (16th-century bhakti tradition)

Author: Meera Bai

Period: 16th century

मीराबाई, वह राजपूत राजकुमारी जिन्होंने कृष्ण की भक्ति के लिए राजमहल का जीवन त्याग दिया, ने अपनी भक्ति सैकड़ों पदों में उँडेल दी। इस पद में वह घोषणा करती हैं कि उन्होंने सच्चा, अविनाशी धन — दिव्य नाम — पा लिया है, जो उनके गुरु की कृपा से प्रदान हुआ। एक ऐसे खजाने का चित्र, जो न खर्च हो सकता है, न चुराया जा सकता है, और केवल बढ़ता ही है, ने इसे भारत के सर्वाधिक प्रिय भजनों में से एक बना दिया है।

Frequently Asked Questions

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो की रचना किसने की?
१६वीं शताब्दी की संत-कवयित्री मीराबाई, कृष्ण की महान राजपूत भक्त ने। यह उनके सर्वाधिक प्रसिद्ध पदों में से एक है, जो भक्ति परंपरा में संपूर्ण भारत में गाया जाता है।
'राम रतन धन' (राम-नाम रूपी धन) क्या है?
यह स्वयं दिव्य नाम का खजाना है। मीरा गाती हैं कि सांसारिक धन के विपरीत, यह खजाना न खर्च हो सकता है और न ही चुराया जा सकता है, बल्कि केवल बढ़ता ही है — भक्त के जीवन का सच्चा धन।
क्या यह भजन राम के बारे में है या कृष्ण के?
दोनों के — मीरा दिव्य नाम के लिए 'राम' का प्रयोग करती हैं, परंतु गीत पर अपने स्वामी 'गिरधर नागर' (कृष्ण) की छाप लगाती हैं। भक्ति में भगवान का नाम ऐसे भेदों से परे एक है।

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