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राहु मंत्र — Word-by-Word Meaning

राहु मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
आदि नाद
रां राहवे
Ram Rahave
राहु (उत्तर चन्द्र नोड) का नाम/बीज
नमः
Namah
नमस्कार / मैं नमन करता हूँ

Complete Translation

ॐ। राहु को नमस्कार — इसकी कृपा बढ़ाने तथा अशुभ प्रभाव शांत करने हेतु।

Origin & History

Source: The Vedic Navagraha mantra of Rahu (the north lunar node)

Author: Traditional (Vedic Jyotish)

वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रह जीवन की दिशा को आकार देते हैं, और प्रत्येक का आशीर्वाद और उपाय हेतु अपना मंत्र है। 'ॐ रां राहवे नमः' राहु का मंत्र है, जो महत्वाकांक्षा, अकस्मात परिवर्तन, विदेशी संबंध, माया — तथा राहु एवं काल सर्प दोष का स्वामी है। जब ग्रह कुण्डली में कमजोर या अशुभ हो, तो ऋषियों ने इसके मंत्र का जप — दान, इसके दिन (शनिवार और राहु काल) व्रत, इसके देवता की पूजा और इसके रत्न (गोमेद) के साथ — इसकी कृपा बढ़ाने और इसकी कठिनाइयों को शांत करने हेतु निर्धारित किया।

Frequently Asked Questions

राहु मंत्र क्या है?
यह राहु का वैदिक मंत्र है — 'ॐ रां राहवे नमः'। यह अपनी जन्म कुण्डली में राहु को बलवान करने और ग्रह के कमजोर या अशुभ होने पर उत्पन्न कठिनाइयों को कम करने हेतु जपा जाता है।
राहु मंत्र के क्या लाभ हैं?
राहु महत्वाकांक्षा, अकस्मात परिवर्तन, विदेशी संबंध, माया — तथा राहु एवं काल सर्प दोष का स्वामी है। इसके मंत्र का जप इन क्षेत्रों को आशीर्वाद देने, ग्रह की कठिन अवधियों (दशा और गोचर) को सरल करने, तथा मन की शांति और रक्षा लाने का एक प्रचलित ज्योतिष उपाय है।
राहु मंत्र किस दिन जपना चाहिए?
यह शनिवार और राहु काल में सर्वाधिक प्रभावी है। इसे प्रतिदिन माला पर 108 बार जपें; पूर्ण उपाय के रूप में इसे परम्परागत रूप से एक निश्चित अवधि में 18,000 बार के जप के रूप में किया जाता है।
राहु से कौन सा रत्न संबंधित है?
राहु का रत्न गोमेद है। इसे (सही धातु और अंगुली में जड़वाकर) केवल किसी योग्य ज्योतिषी के परामर्श के बाद, मंत्र और ग्रह की वस्तुओं के दान के साथ धारण किया जाता है।
राहु मंत्र का ज्योतिष उपाय के रूप में उपयोग कैसे किया जाता है?
जब राहु कमजोर, पीड़ित, या प्रतिकूल दशा/गोचर में चल रहा हो, तब मंत्र जपा जाता है (प्रतिदिन 108 बार, या पूर्ण 18,000 जप), ग्रह की वस्तुओं के दान, इसके दिन व्रत या पूजा, तथा — ज्योतिषीय मार्गदर्शन के साथ — इसके रत्न के साथ संयुक्त किया जाता है। समग्र ग्रह संतुलन हेतु इसे नवग्रह मंत्र के साथ जपें।

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