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राहु मंत्र

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 शनिवार और राहु काल में, प्रातःकाल·📜 The Vedic Navagraha mantra of Rahu (the north lunar node)

अन्य नाम / खोज: om ram rahave namah

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अर्थ

राहु मंत्र 'ॐ रां राहवे नमः' राहु ग्रह का वैदिक मंत्र है, जो कुण्डली में इस ग्रह को बलवान करने और इसके अशुभ प्रभावों को शांत करने हेतु जपा जाता है। यह विशेष रूप से उन लोगों द्वारा जपा जाता है जो राहु की कठिन दशा या गोचर से गुजर रहे हों। यह ज्योतिष का एक प्रसिद्ध उपाय है।

उत्पत्ति और कथा

The Vedic Navagraha mantra of Rahu (the north lunar node) · Traditional (Vedic Jyotish)

वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रह जीवन की दिशा को आकार देते हैं, और प्रत्येक का आशीर्वाद और उपाय हेतु अपना मंत्र है। 'ॐ रां राहवे नमः' राहु का मंत्र है, जो महत्वाकांक्षा, अकस्मात परिवर्तन, विदेशी संबंध, माया — तथा राहु एवं काल सर्प दोष का स्वामी है। जब ग्रह कुण्डली में कमजोर या अशुभ हो, तो ऋषियों ने इसके मंत्र का जप — दान, इसके दिन (शनिवार और राहु काल) व्रत, इसके देवता की पूजा और इसके रत्न (गोमेद) के साथ — इसकी कृपा बढ़ाने और इसकी कठिनाइयों को शांत करने हेतु निर्धारित किया।

मंत्र

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रां राहवे नमः

Om Ram Rahave Namah.

अर्थ:ॐ। राहु को नमस्कार — इसकी कृपा बढ़ाने तथा अशुभ प्रभाव शांत करने हेतु।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

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🔊Omआदि नाद
रां राहवे🔊Ram Rahaveराहु (उत्तर चन्द्र नोड) का नाम/बीज
नमः🔊Namahनमस्कार / मैं नमन करता हूँ

राहु मंत्र पाठ के लाभ

राहु का वैदिक मंत्र, जो कुण्डली में ग्रह को बलवान करने और इसके अशुभ प्रभावों को शांत करने हेतु जपा जाता है

राहु की कठिन अवधि (महादशा, अन्तर्दशा या गोचर) का सामना कर रहे लोगों द्वारा ज्योतिष उपाय के रूप में जपा जाता है

राहु महत्वाकांक्षा, अकस्मात परिवर्तन, विदेशी संबंध, माया — तथा राहु एवं काल सर्प दोष का स्वामी है; जीवन के इन क्षेत्रों के आशीर्वाद और रक्षा हेतु यह मंत्र जपा जाता है

शनिवार और राहु काल में सर्वाधिक प्रभावी, ग्रह का दिन; परम्परागत रूप से 18,000 बार के पूर्ण जप के रूप में, या प्रतिदिन 108 बार पूर्ण किया जाता है

ज्योतिषी परामर्श के बाद ग्रह के रत्न — गोमेद — को धारण करने, ग्रह की वस्तुओं के दान, तथा इसके अधिष्ठाता देवता की पूजा के साथ प्रायः संयुक्त किया जाता है

ग्रह संबंधी कष्टों के समय मन की शांति और स्थिरता लाता है; सभी नौ ग्रहों के संतुलन हेतु नवग्रह मंत्र के साथ जपा जाता है

राहु मंत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयशनिवार और राहु काल में, प्रातःकाल

स्नान के बाद, प्रातः पूर्व की ओर मुख करके बैठें और माला पर 'ॐ रां राहवे नमः' 108 बार जपें, आदर्श रूप से शनिवार और राहु काल में। कमजोर या पीड़ित राहु के पूर्ण उपाय के रूप में, मंत्र को परम्परागत रूप से एक निश्चित अवधि में 18,000 बार के जप के रूप में पूर्ण किया जाता है, ग्रह से संबंधित दान के साथ और, किसी ज्योतिषी से परामर्श के बाद, इसके रत्न (गोमेद) को धारण करने के साथ। श्रद्धा और शांत, सात्विक अनुशासन के साथ जपें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह राहु का वैदिक मंत्र है — 'ॐ रां राहवे नमः'। यह अपनी जन्म कुण्डली में राहु को बलवान करने और ग्रह के कमजोर या अशुभ होने पर उत्पन्न कठिनाइयों को कम करने हेतु जपा जाता है।
राहु महत्वाकांक्षा, अकस्मात परिवर्तन, विदेशी संबंध, माया — तथा राहु एवं काल सर्प दोष का स्वामी है। इसके मंत्र का जप इन क्षेत्रों को आशीर्वाद देने, ग्रह की कठिन अवधियों (दशा और गोचर) को सरल करने, तथा मन की शांति और रक्षा लाने का एक प्रचलित ज्योतिष उपाय है।
यह शनिवार और राहु काल में सर्वाधिक प्रभावी है। इसे प्रतिदिन माला पर 108 बार जपें; पूर्ण उपाय के रूप में इसे परम्परागत रूप से एक निश्चित अवधि में 18,000 बार के जप के रूप में किया जाता है।
राहु का रत्न गोमेद है। इसे (सही धातु और अंगुली में जड़वाकर) केवल किसी योग्य ज्योतिषी के परामर्श के बाद, मंत्र और ग्रह की वस्तुओं के दान के साथ धारण किया जाता है।
जब राहु कमजोर, पीड़ित, या प्रतिकूल दशा/गोचर में चल रहा हो, तब मंत्र जपा जाता है (प्रतिदिन 108 बार, या पूर्ण 18,000 जप), ग्रह की वस्तुओं के दान, इसके दिन व्रत या पूजा, तथा — ज्योतिषीय मार्गदर्शन के साथ — इसके रत्न के साथ संयुक्त किया जाता है। समग्र ग्रह संतुलन हेतु इसे नवग्रह मंत्र के साथ जपें।

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