तक्कुवेमि मनकू — Complete Lyrics
तक्कुवेमि मनकू
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
तक्कुवेमि मनकू रामुं-डॊक्कडुण्डु वरकू
takkuvēmi manakū rāmuṃ-ḍokkaḍuṇḍu varakū
हमें कमी ही किस बात की, जब तक एक राम हमारे हैं?
Verse 2
प्रक्कतोडुगा भगवन्तुडु
मन चक्रधारियै चॆन्तनॆ उण्डगा ॥ 1 ॥ तक्कुवेमि मनकू ॥
prakkatōḍugā bhagavantuḍu
mana cakradhāriyai centane uṇḍagā ॥ 1 ॥ takkuvēmi manakū ॥
जब स्वयं भगवान, चक्र धारण किए, साथी बनकर हमारे पास खड़े हैं — तो हमें किस बात की कमी?
Verse 3
म्रुच्चुसोमकुनि मुनु जम्पिन आ
मत्समूर्ति मनपक्षमुनुण्डगा ॥ 2 ॥ तक्कुवेमि मनकू ॥
mruccusōmakuni munu jampina ā
matsamūrti manapakṣamunuṇḍagā ॥ 2 ॥ takkuvēmi manakū ॥
जब वे मत्स्यमूर्ति हमारे पक्ष में हैं, जिन्होंने कभी चोर सोमकासुर का वध किया — तो कमी किस बात की?
Verse 4
भूमिस्वर्गमुलु पॊन्दुग गॊलचिन
वामनुण्डु मनवाडै युण्डग ॥ 3 ॥ तक्कुवेमि मनकू ॥
bhūmisvargamulu ponduga golacina
vāmanuṇḍu manavāḍai yuṇḍaga ॥ 3 ॥ takkuvēmi manakū ॥
जब वामन, जिन्होंने अपने पगों से धरती और स्वर्ग सहज नाप लिए, हमारे अपने हैं — तो कमी किस बात की?
Verse 5
दशग्रीवुमुनि दण्डिञ्चिन आ
धशरध रामुनि दय मनकुण्डग ॥ 4 ॥ तक्कुवेमि मनकू ॥
daśagrīvumuni daṇḍiñcina ā
dhaśaradha rāmuni daya manakuṇḍaga ॥ 4 ॥ takkuvēmi manakū ॥
जब दशग्रीव रावण को दंड देनेवाले दशरथ-नंदन राम की दया हम पर है — तो कमी किस बात की?
Verse 6
दुष्टकंसुनी दुञ्चिनट्टि श्री
कृष्णुडु मनपै गृपतो नुण्डग ॥ 5 ॥ तक्कुवेमि मनकू ॥
duṣṭakaṃsunī duñcinaṭṭi śrī
kṛṣṇuḍu manapai gṛpatō nuṇḍaga ॥ 5 ॥ takkuvēmi manakū ॥
जब दुष्ट कंस का संहार करनेवाले श्रीकृष्ण कृपा-दृष्टि से हम पर हैं — तो कमी किस बात की?
Verse 7
रामदासुनि गाचॆडि श्री
मन्नारायणि नॆरनम्मियुण्डग ॥ 6 ॥ तक्कुवेमि मनकू ॥
rāmadāsuni gāceḍi śrī
mannārāyaṇi neranammiyuṇḍaga ॥ 6 ॥ takkuvēmi manakū ॥
जब रामदास की रक्षा करनेवाले श्रीमन्नारायण पर हमारा पूर्ण विश्वास है — तो हमें कमी ही किस बात की?
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