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आरती साईं बाबा Meaning — Line by Line

आरती साईं बाबा

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of आरती साईं बाबा with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

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  1. Verse 1. Aarti Sai Baba, Saukhyadatara Jeeva.
  2. Verse 2. Jaluniya Ananga, Svasvarupi Rahe Danga.
  3. Verse 3. Jaya Mani Jaisa Bhava, Taya Taisa Anubhava.
  4. Verse 4. Tumche Nama Dhyata, Hare Sansritivyatha.
  5. Verse 5. Kaliyugi Avatara, Saguna Parabrahma Sachara.
  6. Verse 6. Atha Divasan Guruvari, Bhakta Kariti Vari.
  7. Verse 7. Majha Nijdravya Theva, Tava Charanaraj Seva.
  8. Verse 8. Ichchhit Dina Chataka, Nirmala Toya Nijasukha.
Verse 1#

Aarti Sai Baba, Saukhyadatara Jeeva.

आरती साईं बाबा, सौख्यदातारा जीवा। चरणरजातली, ध्यावा दासां विसावा, भक्तां विसावा। आरती साईं बाबा॥

Aarti Sai Baba, Saukhyadatara Jeeva. Charanarajatali, Dhyava Dasan Visava, Bhaktan Visava. Aarti Sai Baba.

Meaningसमस्त जीवों को आनंद देने वाले साईं बाबा की आरती। भक्तों के विश्रामस्थल, उनके पावन चरणों की धूलि का ध्यान करो। साईं बाबा की आरती।

Verse 2#

Jaluniya Ananga, Svasvarupi Rahe Danga.

जाळुनियां अनंग, स्वस्वरूपी राहे दंग। मुमुक्षुजनां दावी, निजडोळा श्रीरंग। डोळा श्रीरंग॥ आरती साईं बाबा॥

Jaluniya Ananga, Svasvarupi Rahe Danga. Mumukshujanan Davi, Nijdola Shriranga. Dola Shriranga. Aarti Sai Baba.

Meaningसमस्त कामनाओं को भस्म कर वे अपने सच्चे आत्मस्वरूप में लीन रहते हैं। मुमुक्षुओं को वे सुंदर दिव्य रूप के दर्शन कराते हैं। साईं बाबा की आरती।

Verse 3#

Jaya Mani Jaisa Bhava, Taya Taisa Anubhava.

जया मनी जैसा भाव, तया तैसा अनुभव। दाविसी दयाघना, ऐसी तुझीही माव। तुझीही माव॥ आरती साईं बाबा॥

Jaya Mani Jaisa Bhava, Taya Taisa Anubhava. Davisi Dayaghana, Aisi Tujhihi Mava. Tujhihi Mava. Aarti Sai Baba.

Meaningजैसा मन में भाव होता है, वैसा ही अनुभव प्राप्त होता है। हे करुणामूर्ति, ऐसा है आपका मातृवत् प्रेम। साईं बाबा की आरती।

Verse 4#

Tumche Nama Dhyata, Hare Sansritivyatha.

तुमचे नाम ध्यातां, हरे संसृतीव्यथा। अगाध तव करणी, मार्ग दाविसी अनाथा। दाविसी अनाथा॥ आरती साईं बाबा॥

Tumche Nama Dhyata, Hare Sansritivyatha. Agadha Tava Karani, Marga Davisi Anatha. Davisi Anatha. Aarti Sai Baba.

Meaningआपके नाम का ध्यान करने से सांसारिक जीवन के दुःख नष्ट हो जाते हैं। अगाध हैं आपके कार्य; आप असहायों को मार्ग दिखाते हैं। साईं बाबा की आरती।

Verse 5#

Kaliyugi Avatara, Saguna Parabrahma Sachara.

कलियुगी अवतार, सगुण परब्रह्म साचार। अवतीर्ण झालासे, स्वामी दत्त दिगंबर। दत्त दिगंबर॥ आरती साईं बाबा॥

Kaliyugi Avatara, Saguna Parabrahma Sachara. Avatirna Zhalase, Swami Datta Digambara. Datta Digambara. Aarti Sai Baba.

Meaningआप कलियुग के अवतार हैं, साकार रूप में परब्रह्म। आप स्वयं भगवान दत्तात्रेय के रूप में अवतरित हुए हैं। साईं बाबा की आरती।

Verse 6#

Atha Divasan Guruvari, Bhakta Kariti Vari.

आठा दिवसां गुरुवारी, भक्त करिती वारी। प्रभुपद पहावया, भवभय निवारी। भय निवारी॥ आरती साईं बाबा॥

Atha Divasan Guruvari, Bhakta Kariti Vari. Prabhupad Pahavaya, Bhavabhaya Nivari. Bhaya Nivari. Aarti Sai Baba.

Meaningप्रत्येक गुरुवार को भक्त पूजा हेतु एकत्र होते हैं। प्रभु के चरणों के दर्शन करने और सांसारिक भय को दूर करने के लिए। साईं बाबा की आरती।

Verse 7#

Majha Nijdravya Theva, Tava Charanaraj Seva.

माझा निजद्रव्य ठेवा, तव चरणरज सेवा। मागणे हेचि आता, तुम्हां देवादिदेवा। देवादिदेवा॥ आरती साईं बाबा॥

Majha Nijdravya Theva, Tava Charanaraj Seva. Magane Hechi Ata, Tumhan Devadideva. Devadideva. Aarti Sai Baba.

Meaningमेरा एकमात्र धन आपके पावन चरणों की सेवा है। हे देवों के देव, मैं आपसे यही माँगता हूँ। साईं बाबा की आरती।

Verse 8#

Ichchhit Dina Chataka, Nirmala Toya Nijasukha.

इच्छित दीन चातक, निर्मल तोय निजसूख। पाजावे माधवा या, सांभाळ आपुली भाक। आपुली भाक॥ आरती साईं बाबा॥

Ichchhit Dina Chataka, Nirmala Toya Nijasukha. Pajave Madhava Ya, Sambhala Apuli Bhaka. Apuli Bhaka. Aarti Sai Baba.

Meaningजैसे चातक पक्षी आनंद की निर्मल वर्षा-बूँदों के लिए तरसता है, हे प्रभु, इस प्यास को बुझाइए और अपना वचन पूर्ण कीजिए। साईं बाबा की आरती।

Word-by-Word Breakdown

आरती
Aarti
दीप जलाकर की जाने वाली आरती
साईं बाबा
Sai Baba
पावन पिता साईं
सौख्यदातारा
Saukhyadatara
सुख/आनंद के दाता
जीवा
Jeeva
जीव/प्राणियों को
चरणरजातली
Charanarajatali
पावन चरणों की धूलि
ध्यावा
Dhyava
ध्यान करना
दासां विसावा
Dasan Visava
सेवकों/भक्तों का विश्रामस्थल
भक्तां विसावा
Bhaktan Visava
भक्तों का विश्रामस्थल
अनंग
Ananga
कामना/वासना (कामदेव)
स्वस्वरूपी
Svasvarupi
अपने सच्चे स्वरूप में
मुमुक्षुजनां
Mumukshujanan
मुमुक्षु (मोक्ष के साधक)
श्रीरंग
Shriranga
सुंदर दिव्य रूप
भाव
Bhava
भाव/भक्ति
अनुभव
Anubhava
अनुभव
दयाघना
Dayaghana
करुणा की मूर्ति
संसृतीव्यथा
Sansritivyatha
सांसारिक अस्तित्व के दुःख
अगाध
Agadha
अगाध/अपरिमेय
करणी
Karani
कर्म/कार्य
अनाथा
Anatha
असहाय/दीन
कलियुगी अवतार
Kaliyugi Avatara
कलियुग का अवतार
सगुण परब्रह्म
Saguna Parabrahma
साकार परब्रह्म
दत्त दिगंबर
Datta Digambara
भगवान दत्तात्रेय, दिगंबर
गुरुवारी
Guruvari
गुरुवार को
प्रभुपद
Prabhupad
प्रभु के चरण
भवभय
Bhavabhaya
सांसारिक भय
निजद्रव्य
Nijdravya
निजी धन/संपत्ति
चरणरज सेवा
Charanaraj Seva
चरण-धूलि की सेवा
देवादिदेवा
Devadideva
देवों के देव
चातक
Chataka
चातक पक्षी (दिव्य कृपा की प्रतीक्षा करता)
निर्मल तोय
Nirmala Toya
निर्मल जल

Origin & History

Source: Shri Sai Satcharitra tradition

Author: Shri Madhavrao Vamanrao Adkar

Period: Early 20th century

शिरडी साईं बाबा (लगभग १८३८–१९१८) एक पूज्य भारतीय संत थे जो महाराष्ट्र के शिरडी गाँव में रहते थे। उन्होंने सिखाया कि सभी धर्म एक ही ईश्वर की ओर ले जाते हैं, और उनके प्रसिद्ध वचन हैं ‘सबका मालिक एक’ और ‘श्रद्धा और सबूरी’। इस आरती की रचना उनके जीवनकाल में उनके भक्तों ने की और यह साईं परम्परा की केंद्रीय प्रार्थना बन गई। यह शिरडी साईं बाबा मंदिर और विश्व भर के लाखों साईं मंदिरों में प्रतिदिन गाई जाती है।

Frequently Asked Questions

साईं बाबा आरती की रचना किसने की?
‘आरती साईं बाबा सौख्यदातारा जीवा’ आरती की रचना शिरडी साईं बाबा के समर्पित भक्त श्री माधवराव वामनराव अड़कर ने की थी। यह श्री साई सच्चरित्र परम्परा का अंग है।
साईं बाबा आरती कब करनी चाहिए?
इसे पारम्परिक रूप से संध्या आरती के समय किया जाता है। शिरडी साईं मंदिरों में आरती दिन में चार बार की जाती है — काकड़ आरती (प्रातः), मध्यान्ह आरती (दोपहर), धूप आरती (सूर्यास्त) और शेज आरती (रात्रि)। गुरुवार सबसे शुभ दिन है।
साईं बाबा की पूजा के लिए गुरुवार विशेष क्यों है?
गुरुवार (गुरुवार) को साईं बाबा का विशेष दिन माना जाता है क्योंकि ‘गुरु’ का अर्थ है आध्यात्मिक शिक्षक, और साईं बाबा को परम गुरु के रूप में पूजा जाता है। भक्त गुरुवार को व्रत और विशेष प्रार्थनाएँ करते हैं।
क्या यह आरती घर पर की जा सकती है?
हाँ, बिल्कुल। आप घर पर साईं बाबा की तस्वीर या मूर्ति के सामने जलते दीपक, धूप और पुष्पों के साथ यह आरती कर सकते हैं। भक्ति और श्रद्धा ही एकमात्र आवश्यकता है।
साईं बाबा को ‘दत्त दिगंबर’ कहने का क्या महत्व है?
यह आरती साईं बाबा को भगवान दत्तात्रेय (ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संयुक्त रूप) का अवतार बताती है। यह कई भक्तों के इस विश्वास को दर्शाता है कि साईं बाबा परम दिव्य त्रिमूर्ति के प्रकट रूप थे।

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