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आरती साईं बाबा

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 गुरुवार की सायंकाल, अथवा प्रतिदिन संध्या (गोधूलि) आरती के समय·🎵 ऑडियो सहित·📜 Shri Sai Satcharitra tradition

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अर्थ

आरती साईं बाबा सभी जीवों को सुख देने वाले शिरडी साईं बाबा की भक्तिमय आरती है। इसकी रचना उनके भक्त श्री माधवराव वामनराव अड़कर ने की थी, और यह शिरडी साईं बाबा परम्परा की केंद्रीय प्रार्थना बन गई। यह आरती मन की शांति, आंतरिक आनंद प्रदान करती है और सांसारिक दुःख व भय दूर करती है।

उत्पत्ति और कथा

Shri Sai Satcharitra tradition · Shri Madhavrao Vamanrao Adkar · Early 20th century

शिरडी साईं बाबा (लगभग १८३८–१९१८) एक पूज्य भारतीय संत थे जो महाराष्ट्र के शिरडी गाँव में रहते थे। उन्होंने सिखाया कि सभी धर्म एक ही ईश्वर की ओर ले जाते हैं, और उनके प्रसिद्ध वचन हैं ‘सबका मालिक एक’ और ‘श्रद्धा और सबूरी’। इस आरती की रचना उनके जीवनकाल में उनके भक्तों ने की और यह साईं परम्परा की केंद्रीय प्रार्थना बन गई। यह शिरडी साईं बाबा मंदिर और विश्व भर के लाखों साईं मंदिरों में प्रतिदिन गाई जाती है।

शास्त्रों में वर्णित

शिरडी साईं बाबा ने अपने जीवनकाल में अनगिनत चमत्कार किए। एक बार जब मंदिर के दीपकों के लिए तेल उपलब्ध नहीं था, तो उन्होंने उन्हें जल से भर दिया और वे रात भर तेजी से जलते रहे। उन्होंने रोगियों को ठीक किया, भक्तों का मार्गदर्शन करने के लिए स्वप्न में प्रकट हुए, और एक साथ कई स्थानों पर उपस्थित रहने के लिए जाने जाते थे। विश्व भर के भक्त इस आरती के सच्चे पाठ से चमत्कारिक अनुभव — आरोग्य से लेकर असंभव परिस्थितियों के समाधान तक — आज भी बताते रहते हैं।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

आरती साईं बाबा, सौख्यदातारा जीवा। चरणरजातली, ध्यावा दासां विसावा, भक्तां विसावा। आरती साईं बाबा॥

Aarti Sai Baba, Saukhyadatara Jeeva. Charanarajatali, Dhyava Dasan Visava, Bhaktan Visava. Aarti Sai Baba.

अर्थ:समस्त जीवों को आनंद देने वाले साईं बाबा की आरती। भक्तों के विश्रामस्थल, उनके पावन चरणों की धूलि का ध्यान करो। साईं बाबा की आरती।

श्लोक 2

जाळुनियां अनंग, स्वस्वरूपी राहे दंग। मुमुक्षुजनां दावी, निजडोळा श्रीरंग। डोळा श्रीरंग॥ आरती साईं बाबा॥

Jaluniya Ananga, Svasvarupi Rahe Danga. Mumukshujanan Davi, Nijdola Shriranga. Dola Shriranga. Aarti Sai Baba.

अर्थ:समस्त कामनाओं को भस्म कर वे अपने सच्चे आत्मस्वरूप में लीन रहते हैं। मुमुक्षुओं को वे सुंदर दिव्य रूप के दर्शन कराते हैं। साईं बाबा की आरती।

श्लोक 3

जया मनी जैसा भाव, तया तैसा अनुभव। दाविसी दयाघना, ऐसी तुझीही माव। तुझीही माव॥ आरती साईं बाबा॥

Jaya Mani Jaisa Bhava, Taya Taisa Anubhava. Davisi Dayaghana, Aisi Tujhihi Mava. Tujhihi Mava. Aarti Sai Baba.

अर्थ:जैसा मन में भाव होता है, वैसा ही अनुभव प्राप्त होता है। हे करुणामूर्ति, ऐसा है आपका मातृवत् प्रेम। साईं बाबा की आरती।

श्लोक 4

तुमचे नाम ध्यातां, हरे संसृतीव्यथा। अगाध तव करणी, मार्ग दाविसी अनाथा। दाविसी अनाथा॥ आरती साईं बाबा॥

Tumche Nama Dhyata, Hare Sansritivyatha. Agadha Tava Karani, Marga Davisi Anatha. Davisi Anatha. Aarti Sai Baba.

अर्थ:आपके नाम का ध्यान करने से सांसारिक जीवन के दुःख नष्ट हो जाते हैं। अगाध हैं आपके कार्य; आप असहायों को मार्ग दिखाते हैं। साईं बाबा की आरती।

श्लोक 5

कलियुगी अवतार, सगुण परब्रह्म साचार। अवतीर्ण झालासे, स्वामी दत्त दिगंबर। दत्त दिगंबर॥ आरती साईं बाबा॥

Kaliyugi Avatara, Saguna Parabrahma Sachara. Avatirna Zhalase, Swami Datta Digambara. Datta Digambara. Aarti Sai Baba.

अर्थ:आप कलियुग के अवतार हैं, साकार रूप में परब्रह्म। आप स्वयं भगवान दत्तात्रेय के रूप में अवतरित हुए हैं। साईं बाबा की आरती।

श्लोक 6

आठा दिवसां गुरुवारी, भक्त करिती वारी। प्रभुपद पहावया, भवभय निवारी। भय निवारी॥ आरती साईं बाबा॥

Atha Divasan Guruvari, Bhakta Kariti Vari. Prabhupad Pahavaya, Bhavabhaya Nivari. Bhaya Nivari. Aarti Sai Baba.

अर्थ:प्रत्येक गुरुवार को भक्त पूजा हेतु एकत्र होते हैं। प्रभु के चरणों के दर्शन करने और सांसारिक भय को दूर करने के लिए। साईं बाबा की आरती।

श्लोक 7

माझा निजद्रव्य ठेवा, तव चरणरज सेवा। मागणे हेचि आता, तुम्हां देवादिदेवा। देवादिदेवा॥ आरती साईं बाबा॥

Majha Nijdravya Theva, Tava Charanaraj Seva. Magane Hechi Ata, Tumhan Devadideva. Devadideva. Aarti Sai Baba.

अर्थ:मेरा एकमात्र धन आपके पावन चरणों की सेवा है। हे देवों के देव, मैं आपसे यही माँगता हूँ। साईं बाबा की आरती।

श्लोक 8

इच्छित दीन चातक, निर्मल तोय निजसूख। पाजावे माधवा या, सांभाळ आपुली भाक। आपुली भाक॥ आरती साईं बाबा॥

Ichchhit Dina Chataka, Nirmala Toya Nijasukha. Pajave Madhava Ya, Sambhala Apuli Bhaka. Apuli Bhaka. Aarti Sai Baba.

अर्थ:जैसे चातक पक्षी आनंद की निर्मल वर्षा-बूँदों के लिए तरसता है, हे प्रभु, इस प्यास को बुझाइए और अपना वचन पूर्ण कीजिए। साईं बाबा की आरती।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

आरती🔊Aartiदीप जलाकर की जाने वाली आरती
साईं बाबा🔊Sai Babaपावन पिता साईं
सौख्यदातारा🔊Saukhyadataraसुख/आनंद के दाता
जीवा🔊Jeevaजीव/प्राणियों को
चरणरजातली🔊Charanarajataliपावन चरणों की धूलि
ध्यावा🔊Dhyavaध्यान करना
दासां विसावा🔊Dasan Visavaसेवकों/भक्तों का विश्रामस्थल
भक्तां विसावा🔊Bhaktan Visavaभक्तों का विश्रामस्थल
अनंग🔊Anangaकामना/वासना (कामदेव)
स्वस्वरूपी🔊Svasvarupiअपने सच्चे स्वरूप में
मुमुक्षुजनां🔊Mumukshujananमुमुक्षु (मोक्ष के साधक)
श्रीरंग🔊Shrirangaसुंदर दिव्य रूप
भाव🔊Bhavaभाव/भक्ति
अनुभव🔊Anubhavaअनुभव
दयाघना🔊Dayaghanaकरुणा की मूर्ति
संसृतीव्यथा🔊Sansritivyathaसांसारिक अस्तित्व के दुःख
अगाध🔊Agadhaअगाध/अपरिमेय
करणी🔊Karaniकर्म/कार्य
अनाथा🔊Anathaअसहाय/दीन
कलियुगी अवतार🔊Kaliyugi Avataraकलियुग का अवतार
सगुण परब्रह्म🔊Saguna Parabrahmaसाकार परब्रह्म
दत्त दिगंबर🔊Datta Digambaraभगवान दत्तात्रेय, दिगंबर
गुरुवारी🔊Guruvariगुरुवार को
प्रभुपद🔊Prabhupadप्रभु के चरण
भवभय🔊Bhavabhayaसांसारिक भय
निजद्रव्य🔊Nijdravyaनिजी धन/संपत्ति
चरणरज सेवा🔊Charanaraj Sevaचरण-धूलि की सेवा
देवादिदेवा🔊Devadidevaदेवों के देव
चातक🔊Chatakaचातक पक्षी (दिव्य कृपा की प्रतीक्षा करता)
निर्मल तोय🔊Nirmala Toyaनिर्मल जल

आरती साईं बाबा पाठ के लाभ

शिरडी साईं बाबा के आशीर्वाद और कृपा का आह्वान करती है

सांसारिक जीवन के दुःख और भय दूर करती है

भक्त को मन की शांति और आंतरिक आनंद प्रदान करती है

गुरुवार को जप करने पर विशेष रूप से प्रभावशाली

इच्छाओं और आसक्तियों का नाश करके आध्यात्मिक मुक्ति की ओर ले जाती है

भटके और असहाय को मार्गदर्शन और दिशा प्रदान करती है

भक्त के चारों ओर एक रक्षक आभा बनाती है

सच्ची भक्ति से जप करने पर हृदय की मनोकामनाएँ पूर्ण करती है

आरती साईं बाबा जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयगुरुवार की सायंकाल, अथवा प्रतिदिन संध्या (गोधूलि) आरती के समय

साईं बाबा की छवि के सामने घी या तेल से दीया जलाएँ। पुष्प और धूप अर्पित करें। देवता के सम्मुख जलते दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गहन भक्ति से आरती गाएँ या पढ़ें। साईं मंदिरों में यह आरती पारम्परिक रूप से प्रातः और सायं दोनों समय की जाती है। गुरुवार को कई भक्त विशेष व्रत रखते हैं और यह आरती करते हैं। अंत में प्रसाद वितरित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

‘आरती साईं बाबा सौख्यदातारा जीवा’ आरती की रचना शिरडी साईं बाबा के समर्पित भक्त श्री माधवराव वामनराव अड़कर ने की थी। यह श्री साई सच्चरित्र परम्परा का अंग है।
इसे पारम्परिक रूप से संध्या आरती के समय किया जाता है। शिरडी साईं मंदिरों में आरती दिन में चार बार की जाती है — काकड़ आरती (प्रातः), मध्यान्ह आरती (दोपहर), धूप आरती (सूर्यास्त) और शेज आरती (रात्रि)। गुरुवार सबसे शुभ दिन है।
गुरुवार (गुरुवार) को साईं बाबा का विशेष दिन माना जाता है क्योंकि ‘गुरु’ का अर्थ है आध्यात्मिक शिक्षक, और साईं बाबा को परम गुरु के रूप में पूजा जाता है। भक्त गुरुवार को व्रत और विशेष प्रार्थनाएँ करते हैं।
हाँ, बिल्कुल। आप घर पर साईं बाबा की तस्वीर या मूर्ति के सामने जलते दीपक, धूप और पुष्पों के साथ यह आरती कर सकते हैं। भक्ति और श्रद्धा ही एकमात्र आवश्यकता है।
यह आरती साईं बाबा को भगवान दत्तात्रेय (ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संयुक्त रूप) का अवतार बताती है। यह कई भक्तों के इस विश्वास को दर्शाता है कि साईं बाबा परम दिव्य त्रिमूर्ति के प्रकट रूप थे।

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