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संतोषी माता आरती Meaning — Line by Line

संतोषी माता आरती

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of संतोषी माता आरती with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

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  1. Verse 1. Jai Santoshi Mata Jai Santoshi Mata
  2. Verse 2. Sundar Cheer Sunahri Maa Dharan Keenha
  3. Verse 3. Gud Chane Ka Bhog Maa Tumko Lagta
  4. Verse 4. Vin Annapurna Mata Koi Na Pooje
  5. Verse 5. Solah Shukravar Maa Jo Vrat Kare Tera
Verse 1#

Jai Santoshi Mata Jai Santoshi Mata

जय संतोषी माता जय संतोषी माता। अपने सेवक जन की सुख सम्पत्ति दाता॥ जय संतोषी माता॥

Jai Santoshi Mata Jai Santoshi Mata Apne Sevak Jan Ki Sukh Sampatti Data Jai Santoshi Mata

Meaningसंतोषी माता की जय! आप अपने सेवकों को सुख और सम्पत्ति देती हैं। संतोषी माता की जय!

Verse 2#

Sundar Cheer Sunahri Maa Dharan Keenha

सुन्दर चीर सुनहरी माँ धारण कीन्हा। मन वांछित फल दीन्हा सबको सुख दीन्हा॥ जय संतोषी माता॥

Sundar Cheer Sunahri Maa Dharan Keenha Man Vanchit Phal Deenha Sabko Sukh Deenha Jai Santoshi Mata

Meaningहे माता, आपने सुंदर सुनहरे वस्त्र धारण किए हैं। आप सबको मनवांछित फल देती हैं और सुख प्रदान करती हैं। संतोषी माता की जय!

Verse 3#

Gud Chane Ka Bhog Maa Tumko Lagta

गुड़ चने का भोग माँ तुमको लगता। ध्यान धरे जो तेरा सो ही सुख पाता॥ जय संतोषी माता॥

Gud Chane Ka Bhog Maa Tumko Lagta Dhyan Dhare Jo Tera So Hi Sukh Pata Jai Santoshi Mata

Meaningहे माता, गुड़ और चने का भोग आपको प्रिय है। जो आपका ध्यान धरता है, वही सुख पाता है। संतोषी माता की जय!

Verse 4#

Vin Annapurna Mata Koi Na Pooje

विन अन्नपूर्णा माता कोई पूजे। तेरा नाम लिये बिन कोई सूझे॥ जय संतोषी माता॥

Vin Annapurna Mata Koi Na Pooje Tera Naam Liye Bin Koi Na Soojhe Jai Santoshi Mata

Meaningअन्नपूर्णा माता के बिना कोई पूजा नहीं होती। आपका नाम लिए बिना कुछ नहीं सूझता। संतोषी माता की जय!

Verse 5#

Solah Shukravar Maa Jo Vrat Kare Tera

सोलह शुक्रवार माँ जो व्रत करे तेरा। मन इच्छित फल पावे सेवक जन तेरा॥ जय संतोषी माता॥

Solah Shukravar Maa Jo Vrat Kare Tera Man Ichchhit Phal Pave Sevak Jan Tera Jai Santoshi Mata

Meaningहे माता, जो सोलह शुक्रवार आपका व्रत करता है — आपके सेवक मनवांछित फल पाते हैं। संतोषी माता की जय!

Word-by-Word Breakdown

संतोषी
Santoshi
संतोषी — संतोष/तृप्ति की देवी
सुख सम्पत्ति दाता
Sukh Sampatti Data
सुख सम्पत्ति दाता — सुख और सम्पत्ति देने वाली
मन वांछित
Man Vanchit
मन वांछित — मन की इच्छा
गुड़ चने
Gud Chane
गुड़ चने — गुड़ और चना (उनका प्रिय भोग)
भोग
Bhog
भोग — देवी को अर्पित किया जाने वाला भोजन
अन्नपूर्णा
Annapurna
अन्नपूर्णा — अन्न/पोषण की देवी
सोलह शुक्रवार
Solah Shukravar
सोलह शुक्रवार — सोलह शुक्रवार (व्रत/उपवास)
व्रत
Vrat
व्रत — धार्मिक उपवास/संकल्प
इच्छित फल
Ichchhit Phal
इच्छित फल — इच्छित फल/परिणाम
सेवक
Sevak
सेवक — भक्त, सेवक

Origin & History

Source: Folk Hindu tradition

Author: Unknown (folk tradition)

Period: Modern era (popularized 1975)

1975 की बॉलीवुड फिल्म 'जय संतोषी माँ' के बाद संतोषी माता की पूजा को विशाल लोकप्रियता मिली। फिल्म में एक भक्त स्त्री को दर्शाया गया जो 16-शुक्रवार का व्रत रखती है और अन्य देवियों की ईर्ष्या के बावजूद देवी द्वारा आशीर्वादित होती है। फिल्म एक सुपरहिट रही, और संतोषी माता के मंदिर उत्तर भारत भर में लगभग रातोंरात बन गए। यद्यपि उनके मूल के बारे में विद्वानों में मतभेद है, लाखों स्त्रियाँ पूरे भारत में हर शुक्रवार उनका व्रत रखती हैं।

Frequently Asked Questions

संतोषी माता कौन हैं?
संतोषी माता तृप्ति और संतोष की देवी हैं। उन्हें भगवान गणेश की पुत्री माना जाता है। 1975 की बॉलीवुड फिल्म 'जय संतोषी माँ', जिसमें उनकी कथा और व्रत दर्शाया गया, के बाद वे व्यापक रूप से लोकप्रिय हुईं।
16-शुक्रवार का व्रत क्या है?
भक्त 16 लगातार शुक्रवार व्रत रखते हैं, केवल एक बार बिना खट्टे भोजन के आहार लेते हैं। वे संतोषी माता को गुड़ और चना अर्पित करते हैं और उनकी व्रत कथा सुनते हैं। पूर्ण होने पर उद्यापन (समापन समारोह) किया जाता है।
व्रत के दौरान खट्टा भोजन क्यों न खाएँ?
खट्टा भोजन संतोषी माता की पूजा के लिए अशुभ माना जाता है। व्रत कथा विशेष रूप से 16-शुक्रवार की अवधि में खट्टी वस्तुओं के सेवन के विरुद्ध चेतावनी देती है।

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