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संतोषी माता आरती

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 शुक्रवार प्रातः, विशेषकर 16-शुक्रवार व्रत के दौरान·🎵 ऑडियो सहित·📜 Folk Hindu tradition

अन्य नाम / खोज: jai santoshi mata · santoshi maa aarti

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अर्थ

संतोषी माता आरती संतोष और तृप्ति की देवी संतोषी माता की स्तुति है, जो भक्तों को सुख और समृद्धि प्रदान करती हैं। गुड़-चने का सरल भोग उन्हें प्रिय है, और सोलह शुक्रवार का व्रत मनोवांछित फल देता है।

उत्पत्ति और कथा

Folk Hindu tradition · Unknown (folk tradition) · Modern era (popularized 1975)

1975 की बॉलीवुड फिल्म 'जय संतोषी माँ' के बाद संतोषी माता की पूजा को विशाल लोकप्रियता मिली। फिल्म में एक भक्त स्त्री को दर्शाया गया जो 16-शुक्रवार का व्रत रखती है और अन्य देवियों की ईर्ष्या के बावजूद देवी द्वारा आशीर्वादित होती है। फिल्म एक सुपरहिट रही, और संतोषी माता के मंदिर उत्तर भारत भर में लगभग रातोंरात बन गए। यद्यपि उनके मूल के बारे में विद्वानों में मतभेद है, लाखों स्त्रियाँ पूरे भारत में हर शुक्रवार उनका व्रत रखती हैं।

शास्त्रों में वर्णित

1975 की फिल्म 'जय संतोषी माँ' बॉलीवुड के इतिहास की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक बनी। सिनेमाघरों ने बताया कि दर्शक आरती के दृश्यों के दौरान अपने जूते उतारकर पर्दे पर प्रार्थना करते थे। फिल्म रिलीज़ के कुछ ही महीनों में भारत भर में हजारों संतोषी माता मंदिर स्थापित हुए। भक्त बताते हैं कि 16-शुक्रवार का व्रत, जब पूर्ण भक्ति और आहार संयम के साथ पूरा किया जाए, तो वैवाहिक कलह, पारिवारिक विवाद और आर्थिक कठिनाइयों का विश्वसनीय समाधान लाता है।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

जय संतोषी माता जय संतोषी माता। अपने सेवक जन की सुख सम्पत्ति दाता॥ जय संतोषी माता॥

Jai Santoshi Mata Jai Santoshi Mata Apne Sevak Jan Ki Sukh Sampatti Data Jai Santoshi Mata

अर्थ:संतोषी माता की जय! आप अपने सेवकों को सुख और सम्पत्ति देती हैं। संतोषी माता की जय!

श्लोक 2

सुन्दर चीर सुनहरी माँ धारण कीन्हा। मन वांछित फल दीन्हा सबको सुख दीन्हा॥ जय संतोषी माता॥

Sundar Cheer Sunahri Maa Dharan Keenha Man Vanchit Phal Deenha Sabko Sukh Deenha Jai Santoshi Mata

अर्थ:हे माता, आपने सुंदर सुनहरे वस्त्र धारण किए हैं। आप सबको मनवांछित फल देती हैं और सुख प्रदान करती हैं। संतोषी माता की जय!

श्लोक 3

गुड़ चने का भोग माँ तुमको लगता। ध्यान धरे जो तेरा सो ही सुख पाता॥ जय संतोषी माता॥

Gud Chane Ka Bhog Maa Tumko Lagta Dhyan Dhare Jo Tera So Hi Sukh Pata Jai Santoshi Mata

अर्थ:हे माता, गुड़ और चने का भोग आपको प्रिय है। जो आपका ध्यान धरता है, वही सुख पाता है। संतोषी माता की जय!

श्लोक 4

विन अन्नपूर्णा माता कोई पूजे। तेरा नाम लिये बिन कोई सूझे॥ जय संतोषी माता॥

Vin Annapurna Mata Koi Na Pooje Tera Naam Liye Bin Koi Na Soojhe Jai Santoshi Mata

अर्थ:अन्नपूर्णा माता के बिना कोई पूजा नहीं होती। आपका नाम लिए बिना कुछ नहीं सूझता। संतोषी माता की जय!

श्लोक 5

सोलह शुक्रवार माँ जो व्रत करे तेरा। मन इच्छित फल पावे सेवक जन तेरा॥ जय संतोषी माता॥

Solah Shukravar Maa Jo Vrat Kare Tera Man Ichchhit Phal Pave Sevak Jan Tera Jai Santoshi Mata

अर्थ:हे माता, जो सोलह शुक्रवार आपका व्रत करता है — आपके सेवक मनवांछित फल पाते हैं। संतोषी माता की जय!

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

संतोषी🔊Santoshiसंतोषी — संतोष/तृप्ति की देवी
सुख सम्पत्ति दाता🔊Sukh Sampatti Dataसुख सम्पत्ति दाता — सुख और सम्पत्ति देने वाली
मन वांछित🔊Man Vanchitमन वांछित — मन की इच्छा
गुड़ चने🔊Gud Chaneगुड़ चने — गुड़ और चना (उनका प्रिय भोग)
भोग🔊Bhogभोग — देवी को अर्पित किया जाने वाला भोजन
अन्नपूर्णा🔊Annapurnaअन्नपूर्णा — अन्न/पोषण की देवी
सोलह शुक्रवार🔊Solah Shukravarसोलह शुक्रवार — सोलह शुक्रवार (व्रत/उपवास)
व्रत🔊Vratव्रत — धार्मिक उपवास/संकल्प
इच्छित फल🔊Ichchhit Phalइच्छित फल — इच्छित फल/परिणाम
सेवक🔊Sevakसेवक — भक्त, सेवक

संतोषी माता आरती पाठ के लाभ

संतोषी माता संतोष और तृप्ति प्रदान करती हैं — सभी सुखों की जड़

16-शुक्रवार का व्रत हिंदू स्त्रियों में सबसे लोकप्रिय व्रतों में से एक है

गुड़-चने का सरल भोग देवी को प्रसन्न करता है

वैवाहिक समस्याओं को दूर करता है और पारिवारिक संबंधों में सामंजस्य लाता है

जब 16-शुक्रवार का व्रत भक्तिपूर्वक पूर्ण किया जाता है तो मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं

उत्तर भारत में सर्वाधिक पूजित देवियों में से एक

संतोषी माता आरती जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयशुक्रवार प्रातः, विशेषकर 16-शुक्रवार व्रत के दौरान

संतोषी माता का व्रत 16 लगातार शुक्रवारों तक रखा जाता है। जल्दी उठें, स्नान करें, पीले या लाल वस्त्र पहनें। संतोषी माता को गुड़-चना अर्पित करें। संतोषी माता व्रत कथा सुनें या पढ़ें। यह आरती गाएँ। महत्वपूर्ण: व्रत अवधि में खट्टा भोजन न खाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संतोषी माता तृप्ति और संतोष की देवी हैं। उन्हें भगवान गणेश की पुत्री माना जाता है। 1975 की बॉलीवुड फिल्म 'जय संतोषी माँ', जिसमें उनकी कथा और व्रत दर्शाया गया, के बाद वे व्यापक रूप से लोकप्रिय हुईं।
भक्त 16 लगातार शुक्रवार व्रत रखते हैं, केवल एक बार बिना खट्टे भोजन के आहार लेते हैं। वे संतोषी माता को गुड़ और चना अर्पित करते हैं और उनकी व्रत कथा सुनते हैं। पूर्ण होने पर उद्यापन (समापन समारोह) किया जाता है।
खट्टा भोजन संतोषी माता की पूजा के लिए अशुभ माना जाता है। व्रत कथा विशेष रूप से 16-शुक्रवार की अवधि में खट्टी वस्तुओं के सेवन के विरुद्ध चेतावनी देती है।

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