षण्मुख पञ्चरत्नम् — Word-by-Word Meaning
षण्मुख पञ्चरत्नम्
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
षण्मुख (भगवान मुरुगन) की "पञ्चरत्न" स्तुति — पाँच रत्न-श्लोक, जो षण्मुख, शिव-पुत्र, मयूरवाहन व वेलधारी प्रभु को वंदन करते हैं।
Origin & History
Source: Traditional (Sringeri lineage)
Author: Sringeri Acharya
Period: Medieval
षण्मुख पञ्चरत्नम् पारम्परिक रूप से श्रृंगेरी आचार्य को आरोपित है। यह षण्मुख (भगवान मुरुगन) की "पञ्चरत्न" स्तुति है — पाँच रत्न-श्लोक, जो षण्मुख, शिव-पुत्र, मयूरवाहन और वेलधारी प्रभु को वंदन करते हैं।
Frequently Asked Questions
षण्मुख पञ्चरत्नम् क्या है?▼
षण्मुख (भगवान मुरुगन) की "पञ्चरत्न" स्तुति — पाँच रत्न-श्लोक, जो षण्मुख, शिव-पुत्र, मयूरवाहन और वेलधारी प्रभु को वंदन करते हैं।
षण्मुख पञ्चरत्नम् की रचना किसने की और इसका पाठ कब किया जाता है?▼
यह श्रृंगेरी आचार्य (पारम्परिक — श्रृंगेरी परम्परा) को आरोपित है। इसका पाठ प्रातः या सन्ध्या में श्रद्धा से किया जाता है, और विशेषकर मंगलवार तथा कृत्तिका को व स्कन्द षष्ठी में।
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