Mantra.Tips

शिव चालीसा Meaning — Line by Line

शिव चालीसा

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of शिव चालीसा with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Jump to a verse ▾
  1. Doha 1. || Doha ||
  2. Doha 2. || Chaupai ||
  3. Chaupai 1. Bhal Chandrama Sohat Neeke
  4. Chaupai 2. Ang Gaur Shir Gang Bahaye
  5. Chaupai 3. Vastra Khal Baghambr Sohe
  6. Chaupai 4. Maina Matu Ki Havai Dulari
  7. Chaupai 5. Kar Trishul Sohat Chhavi Bhari
  8. Chaupai 6. Nandi Ganesh Sohat Tahan Kaise
  9. Chaupai 7. Kartik Shyam Aur Ganrau
  10. Chaupai 8. Devan Jabahi Jaay Pukara
  11. Chaupai 9. Kiya Upadrav Tarak Bhari
  12. Chaupai 10. Turat Shadanan Aap Pathayau
  13. Chaupai 11. Aap Jalandhar Asur Samhara
  14. Chaupai 12. Tripurasur San Yuddh Machai
  15. Chaupai 13. Kiya Tapahi Bhagirath Bhari
  16. Chaupai 14. Danin Mahan Tum Sam Kou Nahin
  17. Chaupai 15. Ved Naam Mahima Tav Gayin
  18. Chaupai 16. Pragat Udadhi Manthan Mein Jwala
  19. Chaupai 17. Keenh Daya Tahan Kari Sahai
  20. Chaupai 18. Poojan Ramchandra Jab Keenha
  21. Chaupai 19. Sahas Kamal Mein Ho Rahe Dhari
  22. Chaupai 20. Ek Kamal Prabhu Rakheu Joi
  23. Chaupai 21. Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar
  24. Chaupai 22. Jai Jai Jai Anant Avinashi
  25. Chaupai 23. Dusht Sakal Mohi Nit Satavain
  26. Chaupai 24. Trahi Trahi Main Naath Pukaro
  27. Chaupai 25. Lai Trishul Shatrun Ko Maro
  28. Chaupai 26. Maat Pita Bhrata Sab Koi
  29. Chaupai 27. Swami Ek Hai Aas Tumhari
  30. Chaupai 28. Dham Tumharo Kailash Hai Bhari
  31. Chaupai 29. Nandi Bhringi Sada Sohari
  32. Chaupai 30. Kanchan Kundal Karnan Shobhe
  33. Chaupai 31. Prasanna Chit Hoi Shambhu Shoola
  34. Chaupai 32. Nagpash Lapet Sharira
  35. Chaupai 33. Karat Sada Shatrun Kshayakari
  36. Chaupai 34. Shiv Chalisa Jo Koi Gaave
  37. Chaupai 35. Kashi Mein Virajat Shambhu Shankar
  38. Chaupai 36. Vishwanath Darbar Hai Bhari
  39. Chaupai 37. Dashrath Ek Achambho Dekha
  40. Chaupai 38. Sundardas Gyan Nahin Payo
  41. Chaupai 39. Jo Yah Padhe Maheshwar Pooja
  42. Closing Doha. || Doha ||
Doha 1#

|| Doha ||

दोहा जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

|| Doha || Jai Ganesh Girija Suvan, Mangal Mool Sujaan Kahat Ayodhyadas Tum, Dehu Abhay Vardaan

Meaningआरम्भिक दोहा: गिरिजा (पार्वती) के पुत्र गणेश की जय, जो समस्त मंगल के बुद्धिमान मूल हैं। अयोध्यादास कहते हैं — हमें निर्भयता का वर दीजिए।

Doha 2#

|| Chaupai ||

चौपाई जय गिरिजा पति दीनदयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

|| Chaupai || Jai Girijapati Deendayala Sada Karat Santan Pratipala

Meaningपार्वती के स्वामी की जय, जो दीनों पर दयालु हैं। आप सदा संतों की रक्षा करते हैं।

Chaupai 1#

Bhal Chandrama Sohat Neeke

भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥

Bhal Chandrama Sohat Neeke Kanan Kundal Nagphani Ke

Meaningआपके मस्तक पर अर्धचन्द्र सुन्दर शोभा देता है। आपके कुण्डल सर्प के फण हैं।

Chaupai 2#

Ang Gaur Shir Gang Bahaye

अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥

Ang Gaur Shir Gang Bahaye Mundmal Tan Chhar Lagaye

Meaningआपका शरीर गौर है, सिर से गंगा बहती है। आप मुण्डमाला धारण करते हैं और शरीर पर भस्म लगाते हैं।

Chaupai 3#

Vastra Khal Baghambr Sohe

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥

Vastra Khal Baghambr Sohe Chhavi Ko Dekh Naag Muni Mohe

Meaningआप व्याघ्रचर्म से सुशोभित हैं। आपकी शोभा देखकर सर्प और मुनि भी मोहित हो जाते हैं।

Chaupai 4#

Maina Matu Ki Havai Dulari

मैना मातु की हवै दुलारी। वाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

Maina Matu Ki Havai Dulari Vam Ang Sohat Chhavi Nyari

Meaningमैना की प्रिय पुत्री पार्वती अनुपम शोभा से आपके वाम भाग में विराजती हैं।

Chaupai 5#

Kar Trishul Sohat Chhavi Bhari

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

Kar Trishul Sohat Chhavi Bhari Karat Sada Shatrun Kshayakari

Meaningआपके हाथ का त्रिशूल अत्यन्त शोभायमान है। आप निरन्तर समस्त शत्रुओं का नाश करते हैं।

Chaupai 6#

Nandi Ganesh Sohat Tahan Kaise

नन्दि गणेश सोहत तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

Nandi Ganesh Sohat Tahan Kaise Sagar Madhya Kamal Hain Jaise

Meaningनन्दी और गणेश आपके पास बैठते हैं, मानो सागर के मध्य कमल हों।

Chaupai 7#

Kartik Shyam Aur Ganrau

कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात काऊ॥

Kartik Shyam Aur Ganrau Ya Chhavi Ko Kahi Jaat Na Kau

Meaningश्याम वर्ण कार्तिकेय और गणेश — इस दिव्य दर्शन का वर्णन कोई नहीं कर सकता।

Chaupai 8#

Devan Jabahi Jaay Pukara

देवन जबहीं जाय पुकारा। तबहीं दुख प्रभु आप निवारा॥

Devan Jabahi Jaay Pukara Tabahi Dukh Prabhu Aap Nivara

Meaningजब-जब देवता रोते हुए आपके पास आते हैं, आप तत्काल उनके दुःख दूर करते हैं।

Chaupai 9#

Kiya Upadrav Tarak Bhari

किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

Kiya Upadrav Tarak Bhari Devan Sab Mili Tumhi Juhari

Meaningजब तारक दैत्य ने महाउत्पात मचाया, तब सब देवता मिलकर आपकी प्रार्थना करने आए।

Chaupai 10#

Turat Shadanan Aap Pathayau

तुरत षडानन आप पठायऊ। लवनिमेष महँ मारि गिरायऊ॥

Turat Shadanan Aap Pathayau Lav Nimesh Mahan Maari Girayau

Meaningआपने तुरन्त अपने षण्मुख पुत्र (कार्तिकेय) को भेजा। पलक झपकते ही उसने दैत्य का वध कर उसे गिरा दिया।

Chaupai 11#

Aap Jalandhar Asur Samhara

आप जलन्धर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

Aap Jalandhar Asur Samhara Suyash Tumhar Vidit Sansara

Meaningआपने स्वयं जालन्धर दैत्य का नाश किया। आपकी महिमा सम्पूर्ण विश्व में विख्यात है।

Chaupai 12#

Tripurasur San Yuddh Machai

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा करि लीन बचाई॥

Tripurasur San Yuddh Machai Sabhi Kripa Kari Leen Bachai

Meaningआपने त्रिपुरासुर दैत्य से युद्ध किया। अपनी कृपा से आपने सबकी रक्षा की।

Chaupai 13#

Kiya Tapahi Bhagirath Bhari

किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

Kiya Tapahi Bhagirath Bhari Purab Pratigya Tasu Purari

Meaningभगीरथ ने महान तप किया। हे प्रभु, आपने उनका प्राचीन व्रत पूर्ण किया।

Chaupai 14#

Danin Mahan Tum Sam Kou Nahin

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

Danin Mahan Tum Sam Kou Nahin Sevak Stuti Karat Sadahin

Meaningदानियों में कोई आपकी समानता नहीं करता। आपके भक्त सदा आपकी स्तुति गाते हैं।

Chaupai 15#

Ved Naam Mahima Tav Gayin

वेद नाम महिमा तव गाईं। अकथ अनादि भेद नहिं पाईं॥

Ved Naam Mahima Tav Gayin Akath Anadi Bhed Nahin Payin

Meaningवेद आपके नाम की महिमा गाते हैं। अनिर्वचनीय, अनादि — वे आपके रहस्य को नहीं जान पाते।

Chaupai 16#

Pragat Udadhi Manthan Mein Jwala

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए बिहाला॥

Pragat Udadhi Manthan Mein Jwala Jarat Surasur Bhaye Bihala

Meaningसमुद्र मंथन के समय भयंकर विष निकला। जलते हुए विष से देव और दैत्य दोनों व्याकुल हो उठे।

Chaupai 17#

Keenh Daya Tahan Kari Sahai

कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकंठ तब नाम कहाई॥

Keenh Daya Tahan Kari Sahai Neelkanth Tab Naam Kahai

Meaningआपने दया दिखाकर उनकी सहायता की। तब आप नीलकण्ठ कहलाए।

Chaupai 18#

Poojan Ramchandra Jab Keenha

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

Poojan Ramchandra Jab Keenha Jeet Ke Lanka Vibheeshan Deenha

Meaningजब भगवान रामचन्द्र ने आपकी पूजा की, उन्होंने लंका जीतकर विभीषण को दे दी।

Chaupai 19#

Sahas Kamal Mein Ho Rahe Dhari

सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

Sahas Kamal Mein Ho Rahe Dhari Keenh Pariksha Tabahi Purari

Meaningराम आपको सहस्र कमल अर्पित कर रहे थे। तब हे प्रभु, आपने उनकी भक्ति की परीक्षा ली।

Chaupai 20#

Ek Kamal Prabhu Rakheu Joi

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहँ सोई॥

Ek Kamal Prabhu Rakheu Joi Kamal Nayan Poojan Chaha Soi

Meaningआपने एक कमल छिपा लिया। राम ने उसके स्थान पर अपना कमल-समान नेत्र अर्पित कर दिया।

Chaupai 21#

Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar Bhaye Prasanna Diye Ichchhit Var

Meaningऐसी प्रगाढ़ भक्ति देखकर भगवान शंकर प्रसन्न हुए और उन्हें इच्छित वर दिया।

Chaupai 22#

Jai Jai Jai Anant Avinashi

जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सबके घटवासी॥

Jai Jai Jai Anant Avinashi Karat Kripa Sabke Ghatvasi

Meaningजय, जय, जय अनन्त और अविनाशी! आप सबके हृदय में वास करते हैं और सब पर कृपा बरसाते हैं।

Chaupai 23#

Dusht Sakal Mohi Nit Satavain

दुष्ट सकल मोहिं नित सतावैं। भ्रमत रहउँ मोहिं चैन आवै॥

Dusht Sakal Mohi Nit Satavain Bhramat Rahau Mohi Chain Na Aavai

Meaningदुष्ट लोग मुझे निरन्तर सताते हैं। मैं बिना शान्ति के बेचैन भटकता हूँ।

Chaupai 24#

Trahi Trahi Main Naath Pukaro

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहिं आन उबारो॥

Trahi Trahi Main Naath Pukaro Yahi Avasar Mohi Aan Ubaro

Meaningमैं पुकारता हूँ — बचाओ, बचाओ, हे प्रभु! इसी क्षण आकर मेरा उद्धार करो।

Chaupai 25#

Lai Trishul Shatrun Ko Maro

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहिं आन उबारो॥

Lai Trishul Shatrun Ko Maro Sankat Se Mohi Aan Ubaro

Meaningअपना त्रिशूल उठाकर मेरे शत्रुओं का नाश करो। इस संकट से मेरी रक्षा करो।

Chaupai 26#

Maat Pita Bhrata Sab Koi

मात पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥

Maat Pita Bhrata Sab Koi Sankat Mein Poochhat Nahin Koi

Meaningमाता, पिता, भाई — सब — संकट के समय कोई मेरी सुध नहीं लेता।

Chaupai 27#

Swami Ek Hai Aas Tumhari

स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥

Swami Ek Hai Aas Tumhari Aay Harahu Ab Sankat Bhari

Meaningहे प्रभु, मेरी एकमात्र आशा आप ही हैं। अब आकर इस महान कठिनाई को दूर करो।

Chaupai 28#

Dham Tumharo Kailash Hai Bhari

धाम तुम्हारो कैलाश है भारी। सब जग जानत सुन्दर न्यारी॥

Dham Tumharo Kailash Hai Bhari Sab Jag Janat Sundar Nyari

Meaningआपका धाम विशाल कैलाश है। समस्त संसार उसकी अनुपम शोभा जानता है।

Chaupai 29#

Nandi Bhringi Sada Sohari

नन्दी भृंगी सदा सोहारी। करत भजन ब्रह्म सुकुमारी॥

Nandi Bhringi Sada Sohari Karat Bhajan Brahm Sukumari

Meaningवहाँ नन्दी और भृंगी सदा आनन्दित रहते हैं। ब्रह्मा आदि देवता पूजा करते हैं।

Chaupai 30#

Kanchan Kundal Karnan Shobhe

कंचन कुण्डल कर्णन शोभे। देवता दर्शन को अति लोभे॥

Kanchan Kundal Karnan Shobhe Devta Darshan Ko Ati Lobhe

Meaningस्वर्ण कुण्डल आपके कानों में सुन्दर शोभा देते हैं। देवता आपके दर्शन को आतुर रहते हैं।

Chaupai 31#

Prasanna Chit Hoi Shambhu Shoola

प्रसन्न चित होइ शम्भु शूला। बाँट दे सबको अमर फला॥

Prasanna Chit Hoi Shambhu Shoola Bant De Sabko Amar Phala

Meaningजब भगवान शम्भु हृदय में प्रसन्न होते हैं, वे सबको अमृत फल बाँटते हैं।

Chaupai 32#

Nagpash Lapet Sharira

नागपाश लपेट शरीरा। ऐसे शोभित त्रिपुरारी वीरा॥

Nagpash Lapet Sharira Aise Shobhit Tripurari Veera

Meaningआपके शरीर पर सर्प लिपटे रहते हैं। ऐसे सुशोभित होकर, हे वीर त्रिपुरारी, आप शोभायमान हैं।

Chaupai 33#

Karat Sada Shatrun Kshayakari

करत सदा शत्रुन क्षयकारी। देवताओं के सदा सुखकारी॥

Karat Sada Shatrun Kshayakari Devtaon Ke Sada Sukhkari

Meaningआप सदा शत्रुओं का नाश करते हैं। आप सदा देवताओं को सुख देते हैं।

Chaupai 34#

Shiv Chalisa Jo Koi Gaave

शिव चालीसा जो कोई गावे। सब सुख सम्पत्ति घर आवे॥

Shiv Chalisa Jo Koi Gaave Sab Sukh Sampatti Ghar Aave

Meaningजो कोई इस शिव चालीसा को गाता है, उसके घर समस्त सुख और समृद्धि आती है।

Chaupai 35#

Kashi Mein Virajat Shambhu Shankar

काशी में विराजत शम्भु शंकर। आरती होत सदा जय कर॥

Kashi Mein Virajat Shambhu Shankar Aarti Hot Sada Jai Kar

Meaningकाशी में भगवान शम्भु शंकर विराजते हैं। उनकी आरती सदा विजयोल्लास से होती है।

Chaupai 36#

Vishwanath Darbar Hai Bhari

विश्वनाथ दरबार है भारी। जहाँ बसत तीनों त्रिपुरारी॥

Vishwanath Darbar Hai Bhari Jahan Basat Teeno Tripurari

Meaningविश्वनाथ का दरबार अत्यन्त भव्य है। वहाँ त्रिलोकीनाथ वास करते हैं।

Chaupai 37#

Dashrath Ek Achambho Dekha

दशरथ एक अचम्भो देखा। शम्भु विवाह मनोहर पेखा॥

Dashrath Ek Achambho Dekha Shambhu Vivah Manohar Pekha

Meaningदशरथ ने एक अद्भुत दृश्य देखा — भगवान शम्भु का सुन्दर और मनोहर विवाह।

Chaupai 38#

Sundardas Gyan Nahin Payo

सुन्दरदास ज्ञान नहिं पायो। शिव चालीसा अल्प बनायो॥

Sundardas Gyan Nahin Payo Shiv Chalisa Alp Banayo

Meaningसुन्दरदास कहते हैं कि उन्हें पूर्ण ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ, और उन्होंने यह विनम्र शिव चालीसा रची।

Chaupai 39#

Jo Yah Padhe Maheshwar Pooja

जो यह पढ़े महेश्वर पूजा। उसकी कठिन कभी नहिं दूजा॥

Jo Yah Padhe Maheshwar Pooja Uski Kathin Kabhi Nahin Dooja

Meaningजो कोई महेश्वर की इस पूजा को पढ़ता है, उसे कोई कठिनाई कभी नहीं छू सकती।

Closing Doha#

|| Doha ||

दोहा मंत्र तंत्र विज्ञान के जो कुछ होवे सार। शिव शिव शिव सत्य है शिव का नाम अपार॥

|| Doha || Mantra Tantra Vigyan Ke Jo Kuchh Hove Saar Shiv Shiv Shiv Satya Hai Shiv Ka Naam Apaar

Meaningसमापन दोहा: समस्त मन्त्र, तन्त्र और विद्याओं में — जो भी सार है — शिव, शिव, शिव ही सत्य है। शिव का नाम अनन्त है।

Word-by-Word Breakdown

गिरिजापति
Girijapati
गिरिजा (पार्वती) के स्वामी — शिव
दीनदयाला
Deendayala
दीनों पर दयालु
चन्द्रमा
Chandrama
अर्धचन्द्र (मस्तक पर)
नागफनी
Nagphani
सर्प का फण (कुण्डल)
गंग
Gang
गंगा नदी (केशों से बहती हुई)
मुण्डमाल
Mundmal
मुण्डमाला
छार
Chhar
भस्म (शरीर पर लगी हुई)
बाघम्बर
Baghambr
व्याघ्रचर्म
त्रिशूल
Trishul
त्रिशूल
नन्दि
Nandi
शिव का पवित्र वृषभ (नन्दी)
कार्तिक
Kartik
कार्तिकेय (शिव-पुत्र)
तारक
Tarak
तारकासुर दैत्य
क्षयकारी
Kshayakari
(शत्रुओं का) संहारक
षडानन
Shadanan
षण्मुख (कार्तिकेय/मुरुगन)
जलन्धर
Jalandhar
जालन्धर दैत्य
त्रिपुरासुर
Tripurasur
त्रिपुर का दैत्य
भागीरथ
Bhagirath
गंगा को धरती पर लाने वाला राजा
नीलकंठ
Neelkanth
नीलकण्ठ — विषपान के बाद शिव
अनन्त
Anant
अनन्त, अन्तहीन
अविनाशी
Avinashi
अविनाशी, अक्षय
कैलाश
Kailash
कैलाश पर्वत — शिव का धाम
भृंगी
Bhringi
शिव का भक्त मुनि-गण
त्रिपुरारी
Tripurari
त्रिपुर का संहारक (शिव)
महेश्वर
Maheshwar
महान प्रभु (शिव)
तंत्र
Tantra
पवित्र तान्त्रिक साधनाएँ
सम्पत्ति
Sampatti
धन, समृद्धि
अयोध्यादास
Ayodhyadas
कवि अयोध्यादास (चालीसा के रचयिता)
अभय
Abhay
निर्भयता
वरदान
Vardaan
वर, दिव्य आशीर्वाद
उदधि
Udadhi
समुद्र (कॉस्मिक सागर का संकेत)
सुरासुर
Surasur
देव (सुर) और दैत्य (असुर)
आशुतोष
Ashutosh
सरलता से प्रसन्न होने वाले — शिव का नाम
शम्भु
Shambhu
सुख के स्रोत — शिव का नाम
पुरारी
Purari
त्रिपुर का संहारक — शिव
घटवासी
Ghatvasi
सबके हृदय में वास करने वाले
विश्वनाथ
Vishwanath
विश्व के स्वामी — काशी में शिव
विभीषण
Vibhishan
रावण का भाई, राम का भक्त
संकट
Sankat
संकट, कठिनाई, विपत्ति

Origin & History

Source: Hindu devotional tradition

Author: Unknown (attributed to devotional folk tradition)

Period: Medieval period

शिव चालीसा तुलसीदास द्वारा प्रचलित चालीसा परंपरा का अनुसरण करती है, किंतु इसके विशिष्ट रचयिता पर मतभेद है। यह भगवान शिव को उनके संपूर्ण रूप में वर्णित करती है — तपस्वी जो गृहस्थ भी हैं, संहारक जो सृष्टिकर्ता भी हैं, उग्र जो करुणामय भी हैं। इसकी कथा शिव पुराण से ली गई है, जिसमें त्रिपुरासुर का संहार, समुद्र मंथन में उनकी भूमिका और सृष्टि-संहार के उनके शाश्वत नृत्य का उल्लेख है।

Frequently Asked Questions

शिव चालीसा क्या है?
भगवान शिव की स्तुति में चालीस चौपाइयों का भक्ति-गान, जो उनके दिव्य रूप, उनके परिवार (पार्वती, गणेश, कार्तिकेय), उनके गुणों (त्रिशूल, चंद्रमा, गंगा, नाग) और भक्तों तथा देवों की रक्षा के कार्यों का वर्णन करता है।
शिव चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?
सोमवार को (शिव का दिन), महाशिवरात्रि पर, समस्त श्रावण मास में (शिव पूजा के लिए सर्वाधिक शुभ) और प्रदोष काल (संध्या) में।
शिव चालीसा और ॐ नमः शिवाय में क्या अंतर है?
ॐ नमः शिवाय पाँच अक्षरों का मंत्र है, जो निरंतर जप के लिए है। शिव चालीसा चालीस चौपाइयों का स्तुति-गान है जो एक कथा कहता है — शिव के रूप, उनके कार्य और रक्षक स्वभाव का वर्णन। दोनों शिव की उपासना हैं पर भिन्न भक्ति-प्रयोजन रखते हैं।

Ready to start chanting?

See Benefits & How to Chant →