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शुक्लाम्बरधरं विष्णुं — Word-by-Word Meaning

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं
Shuklambaradharam vishnum
श्वेत वस्त्र धारण करने वाले, सर्वव्यापी (विष्णु)
शशिवर्णं चतुर्भुजम्
Shashivarnam chaturbhujam
चंद्रमा के समान वर्ण वाले और चतुर्भुज
प्रसन्नवदनं ध्यायेत्
Prasannavadanam dhyayet
प्रसन्न, सौम्य मुख वाले — उनका ध्यान करना चाहिए
सर्वविघ्नोपशान्तये
Sarvavighnopashantaye
समस्त विघ्नों की शांति (निवारण) के लिए

Complete Translation

श्वेत वस्त्र धारण किए, सर्वव्यापी, चंद्रमा के समान वर्ण वाले, चतुर्भुज, प्रसन्न मुख वाले प्रभु का मैं ध्यान करता हूँ — समस्त विघ्नों की शांति के लिए।

Origin & History

Source: Traditional invocation (dhyana) shloka

Author: Traditional

Period: Classical

यह प्रिय श्लोक सार्वभौमिक 'मंगलाचरण' है — किसी भी पूजा या शुभ कार्य से पूर्व विघ्नों को दूर करने हेतु जपा जाने वाला प्रारंभिक आवाहन। प्रभु को श्वेत वस्त्रधारी, चंद्रमा सम गौर, चतुर्भुज और प्रसन्न मुख वाले बताते हुए, इसे संसार भर में पूजा, अध्ययन और नए आरंभ से पूर्व पढ़ा जाता है, प्रायः समस्त बाधाओं के हर्ता विघ्नेश्वर भगवान गणेश के ध्यान रूप में।

Frequently Asked Questions

शुक्लाम्बरधरं कब पढ़ा जाता है?
इसे किसी भी पूजा, अध्ययन, यात्रा, परीक्षा या नए कार्य के आरंभ में विघ्नों के निवारण हेतु प्रारंभिक आवाहन के रूप में पढ़ा जाता है। पूजा आरंभ करने से पूर्व कही जाने वाली प्रथम प्रार्थनाओं में से यह एक है।
शुक्लाम्बरधरं गणेश के लिए है या विष्णु के लिए?
श्लोक में शब्दशः प्रभु को 'विष्णु' (सर्वव्यापी) कहा गया है, परंतु सामान्य प्रचलन में यह विघ्नहर्ता भगवान गणेश को पूजा के प्रारंभिक ध्यान रूप में समर्पित किया जाता है। दोनों ही समझ स्वीकार्य हैं।

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