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शुक्लाम्बरधरं विष्णुं

🕉️ hindu·📿 3× जप·🕐 किसी भी पूजा, अध्ययन, यात्रा या नए कार्य के आरंभ में·📜 Traditional invocation (dhyana) shloka

अन्य नाम / खोज: shuklambaradharam vishnum shashivarnam chaturbhujam · shuklambardharam · sarva vighnopashantaye

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अर्थ

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं सार्वभौमिक आवाहन श्लोक है जो किसी भी पूजा, अध्ययन या शुभ कार्य के आरंभ में समस्त विघ्नों के निवारण के लिए पढ़ा जाता है। यद्यपि इसमें 'विष्णु' (सर्वव्यापी) कहा गया है, परंतु यह प्रायः विघ्नहर्ता गणेश को पूजा के प्रारंभिक ध्यान रूप में समर्पित किया जाता है। यह मन को शांत करता है और कार्य के शुभारंभ को पवित्र बनाता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional invocation (dhyana) shloka · Traditional · Classical

यह प्रिय श्लोक सार्वभौमिक 'मंगलाचरण' है — किसी भी पूजा या शुभ कार्य से पूर्व विघ्नों को दूर करने हेतु जपा जाने वाला प्रारंभिक आवाहन। प्रभु को श्वेत वस्त्रधारी, चंद्रमा सम गौर, चतुर्भुज और प्रसन्न मुख वाले बताते हुए, इसे संसार भर में पूजा, अध्ययन और नए आरंभ से पूर्व पढ़ा जाता है, प्रायः समस्त बाधाओं के हर्ता विघ्नेश्वर भगवान गणेश के ध्यान रूप में।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि इस श्लोक के साथ श्रद्धापूर्वक आरंभ किया गया कार्य विघ्नों से मुक्त होकर आगे बढ़ता है — क्योंकि यह जिस शांत प्रभु का आवाहन करता है, वही प्रत्येक विघ्न के शामक हैं।

मंत्र

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शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये

Shuklambaradharam vishnum shashivarnam chaturbhujam Prasannavadanam dhyayet sarvavighnopashantaye

अर्थ:श्वेत वस्त्र धारण किए, सर्वव्यापी, चंद्रमा के समान वर्ण वाले, चतुर्भुज, प्रसन्न मुख वाले प्रभु का मैं ध्यान करता हूँ — समस्त विघ्नों की शांति के लिए।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

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शुक्लाम्बरधरं विष्णुं🔊Shuklambaradharam vishnumश्वेत वस्त्र धारण करने वाले, सर्वव्यापी (विष्णु)
शशिवर्णं चतुर्भुजम्🔊Shashivarnam chaturbhujamचंद्रमा के समान वर्ण वाले और चतुर्भुज
प्रसन्नवदनं ध्यायेत्🔊Prasannavadanam dhyayetप्रसन्न, सौम्य मुख वाले — उनका ध्यान करना चाहिए
सर्वविघ्नोपशान्तये🔊Sarvavighnopashantayeसमस्त विघ्नों की शांति (निवारण) के लिए

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं पाठ के लाभ

किसी भी पूजा, अध्ययन या शुभ कार्य के प्रारंभ में समस्त विघ्नों के निवारण हेतु पढ़ा जाने वाला सार्वभौमिक आवाहन।

यद्यपि इसमें 'विष्णु' (सर्वव्यापी) कहा गया है, परंतु प्रायः यह विघ्नहर्ता भगवान गणेश को पूजा के प्रारंभिक ध्यान रूप में समर्पित किया जाता है।

मन को शांत करता है और किसी भी कार्य के आरंभ को पवित्र बनाता है — परीक्षा, यात्रा, नए कार्य और पाठ से पूर्व जपा जाता है।

बच्चों को सिखाए जाने वाले प्रथम संस्कृत श्लोकों में से एक, स्मरण करने और प्रतिदिन जपने में सरल।

माना जाता है कि यह बाधाओं का मार्ग साफ करता है और शांत, शुभ आरंभ प्रदान करता है।

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं जप विधि

जप संख्या3बार
उत्तम समयकिसी भी पूजा, अध्ययन, यात्रा या नए कार्य के आरंभ में
दिशाEast or North

पूजा या किसी महत्वपूर्ण कार्य के आरंभ में, हाथ जोड़कर और शांत मन से, शांत चतुर्भुज प्रभु का चित्र मन में बसाते हुए पाठ करें — समस्त विघ्नों के निवारण और कार्य के आशीर्वाद हेतु। तीन बार दोहराएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसे किसी भी पूजा, अध्ययन, यात्रा, परीक्षा या नए कार्य के आरंभ में विघ्नों के निवारण हेतु प्रारंभिक आवाहन के रूप में पढ़ा जाता है। पूजा आरंभ करने से पूर्व कही जाने वाली प्रथम प्रार्थनाओं में से यह एक है।
श्लोक में शब्दशः प्रभु को 'विष्णु' (सर्वव्यापी) कहा गया है, परंतु सामान्य प्रचलन में यह विघ्नहर्ता भगवान गणेश को पूजा के प्रारंभिक ध्यान रूप में समर्पित किया जाता है। दोनों ही समझ स्वीकार्य हैं।

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