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सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती Meaning — Line by Line

सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Verse 1#

Sukhakarta duhkhaharta varta vighnachi

सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती दर्शनमात्रे मनकामना पुरती

Sukhakarta duhkhaharta varta vighnachi Nuravi puravi prema kripa jayachi Sarvamgi sumdara uti shemdurachi Kamthi jhalake mala muktaphalamchi Jaya deva jaya deva jaya mamgalamurti Darshanamatre manakamana purati

Meaningसुख के कर्ता, दुःख के हर्ता, हर विघ्न को टालने वाले; जिनकी कृपा से भक्त का प्रेम अधूरा नहीं रहता, अपितु पूर्ण होता है। आपका समस्त रूप सुन्दर है, शेंदूर (सिन्दूर) से अलंकृत; आपके कण्ठ पर मोतियों की माला सुशोभित है। जय देव, जय देव, हे मंगलमूर्ति; आपके केवल दर्शन से हृदय की हर कामना पूर्ण होती है।

Verse 2#

Ratnakhachita phara tuja gaurikumara

रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती दर्शनमात्रे मनकामना पुरती

Ratnakhachita phara tuja gaurikumara Chamdanachi uti kumkumakeshara Hirejadita mukuta shobhato bara Runajhunati nupure charani ghagariya Jaya deva jaya deva jaya mamgalamurti Darshanamatre manakamana purati

Meaningरत्नजड़ित मन्दिर आपके लिए सजाया है, हे गौरीपुत्र; चन्दन, कुंकुम व केसर से अलंकृत। हीरों से जड़ा मुकुट आपको भलीभाँति शोभा देता है; आपके चरणों में पायल मधुर ध्वनि करती है। जय देव, जय देव, हे मंगलमूर्ति; आपके केवल दर्शन से हृदय की हर कामना पूर्ण होती है।

Verse 3#

Lambodara pitambara phanivaravamdana

लंबोदर पीतांबर फणिवरवंदना सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना दास रामाचा वाट पाहे सदना संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती दर्शनमात्रे मनकामना पुरती

Lambodara pitambara phanivaravamdana Sarala somda vakratumda trinayana Dasa ramacha vata pahe sadana Samkati pavave nirvani rakshave suravaravamdana Jaya deva jaya deva jaya mamgalamurti Darshanamatre manakamana purati

Meaningहे लम्बोदर, पीताम्बरधारी, नागराज द्वारा पूजित; सीधी सूँड, वक्र दन्त (वक्रतुण्ड) व त्रिनेत्रधारी। आपका सेवक रामदास आपके द्वार पर खड़ा है; संकट में मेरी सहायता कीजिए, अन्तिम समय में रक्षा कीजिए, हे देवों द्वारा पूजित प्रभु। जय देव, जय देव, हे मंगलमूर्ति; आपके केवल दर्शन से हृदय की हर कामना पूर्ण होती है।

Word-by-Word Breakdown

सुखकर्ता दुःखहर्ता
Sukhkarta Dukharta
सुख (आनन्द) के दाता व दुःख (कष्ट) के हर्ता — भगवान् गणेश
मंगलमूर्ती
Mangalmurti
मंगलमूर्ति — शुभस्वरूप; महाराष्ट्र में गणेश का सर्वाधिक प्रचलित नाम
गौरीकुमरा
Gauri-kumara
गौरी-कुमार — गौरी (पार्वती) के पुत्र
लंबोदर
Lambodara
लम्बोदर — बड़े उदर वाले, गणेश का प्रिय नाम
दास रामाचा
Das Ramacha
'दास रामदास' — सन्त-कवि समर्थ रामदास, जिन्होंने यह आरती रची

Origin & History

Source: Composed by Samarth Ramdas

Author: Samarth Ramdas

Period: 17th century CE

सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती की रचना मराठी संत समर्थ रामदास ने की, जिन्होंने अपने युग में मराठा शौर्य की प्रेरणा दी। तीन भक्ति-भरे चरणों में वे गणेश को शेंदुर, मोती और हीरे के मुकुट से अलंकृत निहारते हैं, और स्वयं को 'दास रामाचा' (सेवक रामदास) कहकर प्रभु के द्वार पर खड़े होकर संकट में रक्षा की याचना करते हैं। यह गणेश चतुर्थी की प्राण-आरती बन गई है।

Frequently Asked Questions

सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती क्या है?
सुखकर्ता दुःखहर्ता भगवान गणेश की सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसे 17वीं शताब्दी के संत समर्थ रामदास ने रचा था। इसके नाम का अर्थ है 'सुख देने वाले, दुःख हरने वाले'। यह गणेश चतुर्थी की प्रमुख आरती है, जो गणपति की मूर्ति के समक्ष प्रातः-संध्या गाई जाती है।
सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती किसने रची?
इसे मराठी संत और गुरु समर्थ रामदास (1608–1681) ने रचा था, जो अंतिम चरण में स्वयं को 'दास रामाचा' (सेवक रामदास) के रूप में अंकित करते हैं। तब से यह भारत भर में गणेश की सर्वश्रेष्ठ ज्ञात आरती बन गई है।
सुखकर्ता दुःखहर्ता कब गाई जाती है?
यह प्रतिदिन प्रातः और संध्या गणेश की मूर्ति के समक्ष गाई जाती है, और गणेश चतुर्थी तथा गणेशोत्सव के दस दिनों की प्रमुख आरती है। इसे विवाह, गृहप्रवेश और अन्य शुभ आरंभों पर भी गाया जाता है।
'मंगलमूर्ति मोरया' का अर्थ क्या है?
'मंगलमूर्ति' अर्थात मंगल स्वरूप प्रभु (गणेश), और 'मोरया' चिंचवड के संत मोरया गोसावी से जुड़ा भक्ति-उद्घोष है। आरती के बाद भक्त आनंद से 'गणपति बाप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया' का जयघोष कर प्रभु की वंदना करते हैं।

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