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सूर्य गायत्री मंत्र — Word-by-Word Meaning

सूर्य गायत्री मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
आदि नाद (मूल ध्वनि)
विद्महे
Vidmahe
हम जानें / हम जानने का प्रयास करें — प्रकाश-कर्ता (भास्कर) को
धीमहि
Dhimahi
हम ध्यान करें — दिन के कर्ता (दिवाकर) का
तन्नः … प्रचोदयात्
Tannah … Prachodayat
वे सूर्य हमारी बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करें

Complete Translation

ॐ। हम Surya Dev (the Sun God) को जानें, उनका ध्यान करें; वे Surya Dev (the Sun God) हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।

Origin & History

Source: The Gayatri mantra of Surya Dev (the Sun God)

Author: Traditional (Vedic)

सार्वभौम गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परम्परा प्रत्येक महान देव को अपनी गायत्री देती है — पवित्र गायत्री छंद में उस देव से बुद्धि प्रकाशित करने की प्रार्थना। सूर्य गायत्री मंत्र सूर्यदेव — आरोग्य, ओज, आत्मविश्वास, सफलता व अधिकार के दाता — का 'विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्' के कालातीत क्रम में आह्वान करता है — 'हम जानें, हम ध्यान करें, देव हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।' सन्ध्या-कालों में जपा जाने वाला यह एक पूर्ण व कोमल दैनिक साधना है।

Frequently Asked Questions

सूर्य गायत्री मंत्र क्या है?
यह सूर्यदेव का गायत्री मंत्र है: 'ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि। तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्'। पवित्र गायत्री छंद में रचित, यह 'विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्' के क्रम में सूर्यदेव को बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करने हेतु आह्वान करता है।
सूर्य गायत्री मंत्र के क्या लाभ हैं?
यह आरोग्य, ओज, आत्मविश्वास, सफलता व अधिकार के लिए तथा मन की स्पष्टता व बुद्धि को जागृत करने हेतु जपा जाता है। गायत्री मंत्र होने के नाते यह विशेषकर पवित्र व स्थिरताप्रद माना जाता है, जो सूर्यदेव के आशीर्वाद को दैनिक जीवन में लाता है।
इसे कब और कितनी बार जपना चाहिए?
इसे माला पर 108 बार जपें, आदर्शतः प्रातः व अन्य सन्ध्या कालों में, पूर्व की ओर मुख कर। रविवार इसका विशेष दिन है। इसे दैनिक गायत्री साधना का अंग बनाया जा सकता है।
'विद्महे धीमहि प्रचोदयात्' का क्या अर्थ है?
प्रत्येक गायत्री इसी क्रम का अनुसरण करती है: 'विद्महे' — हम जानें; 'धीमहि' — हम ध्यान करें; 'प्रचोदयात्' — वह देव हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें। अतः यह मंत्र देव से हममें बुद्धि जागृत करने की प्रार्थना है।
क्या सूर्य गायत्री मंत्र कोई भी जप सकता है?
हाँ — देवता गायत्री मंत्र भक्ति सहित कोई भी जप सकता है। ये प्रातः स्नान के पश्चात, स्वच्छ मन से, आदर्शतः रविवार को जपे जाते हैं, और एक कोमल, पूर्ण दैनिक अभ्यास हैं।

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