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सूर्य गायत्री मंत्र

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 प्रातः (व सन्ध्या कालों में), विशेषकर रविवार·📜 The Gayatri mantra of Surya Dev (the Sun God)

अन्य नाम / खोज: om bhaskaraya vidmahe divakaraya dhimahi

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अर्थ

सूर्य गायत्री मंत्र — 'ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि। तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्' — सूर्यदेव का गायत्री मंत्र है, जो पवित्र गायत्री छंद में उन्हें बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करने हेतु आह्वान करता है। यह आरोग्य, ओज, आत्मविश्वास, सफलता व अधिकार के लिए तथा बुद्धि को जागृत करने हेतु जपा जाता है। रविवार को व सन्ध्या-कालों में, पूर्व की ओर मुख कर माला पर 108 बार जप सर्वाधिक प्रभावशाली है।

उत्पत्ति और कथा

The Gayatri mantra of Surya Dev (the Sun God) · Traditional (Vedic)

सार्वभौम गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परम्परा प्रत्येक महान देव को अपनी गायत्री देती है — पवित्र गायत्री छंद में उस देव से बुद्धि प्रकाशित करने की प्रार्थना। सूर्य गायत्री मंत्र सूर्यदेव — आरोग्य, ओज, आत्मविश्वास, सफलता व अधिकार के दाता — का 'विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्' के कालातीत क्रम में आह्वान करता है — 'हम जानें, हम ध्यान करें, देव हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।' सन्ध्या-कालों में जपा जाने वाला यह एक पूर्ण व कोमल दैनिक साधना है।

मंत्र

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भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्

Om Bhaskaraya Vidmahe Divakaraya Dhimahi. Tannah Suryah Prachodayat.

अर्थ:ॐ। हम Surya Dev (the Sun God) को जानें, उनका ध्यान करें; वे Surya Dev (the Sun God) हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

🔊Omआदि नाद (मूल ध्वनि)
विद्महे🔊Vidmaheहम जानें / हम जानने का प्रयास करें — प्रकाश-कर्ता (भास्कर) को
धीमहि🔊Dhimahiहम ध्यान करें — दिन के कर्ता (दिवाकर) का
तन्नः … प्रचोदयात्🔊Tannah … Prachodayatवे सूर्य हमारी बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करें

सूर्य गायत्री मंत्र पाठ के लाभ

सूर्यदेव का गायत्री मंत्र — पवित्र गायत्री छंद, जो वैदिक छंदों में सर्वाधिक शक्तिशाली है, के माध्यम से सूर्यदेव की कृपा का आह्वान

आरोग्य, ओज, आत्मविश्वास, सफलता व अधिकार के लिए तथा बुद्धि को जागृत व प्रकाशित करने हेतु (हर गायत्री का हृदय) जपा जाता है

सूर्यदेव का एक पूर्ण, दैनिक वैदिक मंत्र, ध्यान, जप व पूजा के आरम्भ हेतु उपयुक्त

रविवार को, तीनों सन्ध्या कालों (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में, पूर्व की ओर मुख कर सर्वाधिक प्रभावशाली

शान्त, एकाग्र मन से माला पर 108 बार जप; कहा जाता है कि यह स्पष्टता, शान्ति व सूर्यदेव के स्थिर आशीर्वाद लाता है

प्रायः महान गायत्री मंत्र ('ॐ भूर्भुवः स्वः…') के साथ दैनिक साधना के अंग रूप में जपा जाता है

सूर्य गायत्री मंत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयप्रातः (व सन्ध्या कालों में), विशेषकर रविवार

स्नान के पश्चात प्रातःकाल पूर्व की ओर मुख कर शान्त मन से 'ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि। तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्' का माला पर 108 बार जप करें। सभी गायत्री मंत्रों की भाँति यह आदर्शतः सन्ध्या कालों (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में जपा जाता है। सूर्यदेव को हृदय में धारण कर मंत्र को मन में स्थिर होने दें। इसे दैनिक रूप से पूर्ण साधना के रूप में, सार्वभौम गायत्री मंत्र के साथ जपा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह सूर्यदेव का गायत्री मंत्र है: 'ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि। तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्'। पवित्र गायत्री छंद में रचित, यह 'विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्' के क्रम में सूर्यदेव को बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करने हेतु आह्वान करता है।
यह आरोग्य, ओज, आत्मविश्वास, सफलता व अधिकार के लिए तथा मन की स्पष्टता व बुद्धि को जागृत करने हेतु जपा जाता है। गायत्री मंत्र होने के नाते यह विशेषकर पवित्र व स्थिरताप्रद माना जाता है, जो सूर्यदेव के आशीर्वाद को दैनिक जीवन में लाता है।
इसे माला पर 108 बार जपें, आदर्शतः प्रातः व अन्य सन्ध्या कालों में, पूर्व की ओर मुख कर। रविवार इसका विशेष दिन है। इसे दैनिक गायत्री साधना का अंग बनाया जा सकता है।
प्रत्येक गायत्री इसी क्रम का अनुसरण करती है: 'विद्महे' — हम जानें; 'धीमहि' — हम ध्यान करें; 'प्रचोदयात्' — वह देव हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें। अतः यह मंत्र देव से हममें बुद्धि जागृत करने की प्रार्थना है।
हाँ — देवता गायत्री मंत्र भक्ति सहित कोई भी जप सकता है। ये प्रातः स्नान के पश्चात, स्वच्छ मन से, आदर्शतः रविवार को जपे जाते हैं, और एक कोमल, पूर्ण दैनिक अभ्यास हैं।

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